ऑपरेशन 136: कोबरा पोस्ट के स्टिंग में पर्दाफाश- इंडिया टीवी, दैनिक जागरण, पंजाब केसरी और अमर उजाला सहित 17 मीडिया समूह कैश में पैसे लेकर खबर चलाने को तैयार

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मशहूर खोजी वेबसाइट कोबरा पोस्ट ने सोमवार (26 मार्च) को ‘ऑपरेशन 136’ नाम के अपने स्टिंग ऑपरेशन में कई सनसनीखेज खुलासा किया है। कोबरापोस्ट ने अपने स्टिंग ऑपरेशन में देश के तमाम मीडिया समूहों का काला चिट्ठा खोलकर रख दिया है। वेबसाइट ने अपने स्टिंग में इस बात का पर्दाफाश किया है कि किस तरह देश के कई बड़े-बड़े और नामी मीडिया समूह पैसे लेकर किसी के पक्ष या विपक्ष में खबरें चलाने के लिए तैयार हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर: गूगल

स्टिंग में दिखाया गया है कि किस तरह से तमाम मीडिया समूह खुद को हिंदुत्व ब्रिग्रेड का सिपहसालार बताते हुए खुद पर गर्व कर रहे हैं। साथ ही पैसों के लालच में वह उग्र हिंदुत्व के एजेंडे, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कवरेज से लेकर विरोधी पार्टियों को नीचा दिखाने के लिए तैयार हैं। इतना ही नहीं, वे मीडिया समूह इसके लिए काला धन भी लेने को तैयार हैं।

दिल्ली के प्रेस क्लब में सोमवार को आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में कोबरा पोस्ट ने बताया कि यह मीडिया समूह ‘हिन्दुत्व’ के एजेंडे को भी आगे बढ़ाने के लिए पैसे लेकर राजनीतिक अभियान चलाने को तैयार हो गए। इस स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो में साफ तौर पर दिखाई दे रहा है कि देश की बहुत सारी मीडिया कंपनियों के प्रतिनिधि बिल देने के बजाए कैश में भुगतान लेने को तैयार थे।

स्टिंग ऑपरेशन में जिन प्रमुख मीडिया समूहों का नाम हैं, उनमें हिंदी समाचार पेपर पंजाब केसरी, दैनिक जागरण, अमर उजाला, समाचार एजेंसी यूएनआई और नामी वेबसाइट स्कूपवूप आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा इंडिया टीवी, साधना प्राइम, हिन्दी खबर, सब टीवी, डीएनए, समाचार प्लस, 9 एक्स टशन, आज हिंदी, एचएनएन लाइव 24, स्वतंत्र भारत और रीडिफ.कॉम भी इस स्टिंग में पैसे के बदले खबरें चलाने को तैयार दिखे।

कोबरापोस्ट के स्टिंग ऑपरेशन में खोजी पत्रकार पुष्प शर्मा आचार्य अटल बने हैं। वह मीडिया प्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान खुद को उज्जैन के एक आश्रम से संबंधित बताते हैं। वहीं, कुछ अन्य से मुलाकात में वह खुद को श्रीमद् भगवद गीता प्रचार समिति का प्रतिनिधि बताते हैं। वीडियो के साथ स्टिंग ऑपरेशन में यह दावा किया गया है कि 17 मीडिया समूहों के कंपनियों के कर्मचारियों ने आचार्य अटल के ‘नरम हिंदुत्व’ एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए तैयार नजर आते हैं।

ये मीडिया समूह आम चुनाव नजदीक आने के मद्देनजर इनमें से कई ऐसा कंटेंट प्रकाशित करने के इच्छुक नजर आते हैं। कोबरापोस्ट का अंडरकवर पत्रकार जिन भी मीडिया प्रतिनिधियों से मिला, वो या तो क्षेत्रीय मीडिया कंपनियों के मालिक थे या फिर मीडिया कंपनियों के बिजनेस ऑपरेशंस के सीनियर एग्जीक्यूटिव के पोस्ट पर कार्यरत हैं। कोबरापोस्ट जल्द ही इस स्टिंग ऑपरेशन का दूसरा हिस्सा रिलीज करेगा।

इस स्टिंग ऑपरेशन का नाम ऑपरेशन 136 इसलिए रखा गया, क्योंकि कुछ महीनों पहले आई वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत का स्थान 136वां है। दिल्ली के प्रेस क्लब में जब यह खुलासा हो रहा था तो उस वक्त कई पत्रकारों के जेहन में कहीं न कहीं यह आशंका कौंध रही थी कि कहीं उनके संस्थान का नाम इस ऑपरेशन में न आ जाए। कई टीवी हैरान-परेशान दिखाई दे रहे थे।

मीडिया समूहों की प्रतिक्रियाएं

कोबरा पोस्ट के इस खुलासे के बाद जिन मीडिया समूहों या मीडिया घरानों का नाम लिया गया है उनकी तरफ से पहली प्रतिक्रिया इंडिया टीवी और दैनिक जागरण ने दी है। दैनिक जागरण के प्रमुख और जागरण प्रकाश लिमिटेड के सीईओ संजय गुप्ता ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि बिहार, झारखंड और ओडिशा के लिए दैनिक जागरण के एरिया मैनेजर संजय प्रताप सिंह जैसे दावे वीडियो में करते नजर आ रहे हैं, वैसे अधिकार उनके पास हैं ही नहीं।

गुप्ता ने कहा कि, ‘पहली बात तो यह है कि मुझे वीडियो की विश्वसनीयता पर भरोसा नहीं है।’ उन्होंने कहा कि सिंह अपनी सीमाओं से परे जाकर दावे कर रहे हैं। वहीं, इंडिया टीवी के प्रेसिडेंट सुदीप्तो चौधरी ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि वीडियो से छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने कहा कि अंडरकवर पत्रकार ने जो भी प्रस्ताव दिया, उसे आगे फॉरवर्ड नहीं किया गया और न ही उस पर कोई चर्चा नहीं की गई। कोबरापोस्ट ने जो खुलासा किया है ‘जनता का रिपोर्टर’ के पास वह सभी 17 मीडिया कंपनियों का वीडियो मौजूद हैं।

 

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