नोटबंदी का एक साल: शशि थरूर ने ट्विटर की डीपी को किया ब्लैक, देखिए अन्य कांग्रेसी नेताओं ने कैसे जताया विरोध

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आज यानी 8 नवंबर (बुधवार) को नोटबंदी के फैसले को एक साल पूरे हो गए हैं। इस पर देश की दोनों बड़ी पार्टियों के बीच सियासी तनातनी भी शुरू हो गई है। एक तरफ कांग्रेस के नेतृत्व में 18 विपक्षी पार्टियां नोटबंदी के एक वर्ष पूरा होने पर जहां ‘काला दिवस’ मना रही हैं, वहीं सत्तारूढ़ बीजेपी आज ‘कालाधन विरोधी दिवस’ (रिपीट कालाधन विरोधी दिवस) के रूप में जश्न मना रही है।

Photo: @INCIndia

कांग्रेस और उसके संबंधित संगठन नोटबंदी के विरोध में बुधवार को देशभर में ‘‘काला दिवस’’ मना रहे हैं। इस दौरान कांग्रेस नेता विरोध प्रदर्शन कर रही है और इसमें नारा दिया गया है कि ‘भुगत रहा है देश’। वहीं, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात के सूरत पहुंचे हैं, जहां वह व्यापारियों के साथ बातचीत कर उनकी ‘‘व्यथा’’ को जानेंगे और और वहां विपक्षी दलों के ‘‘काला दिवस’’ प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे।

इस दौरान वह उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और कामगारों के साथ अनौपचारिक बैठक करेंगे। साथ ही वह सूरत के चौक बाजार में विवेकानंद की प्रतिमा के नजदीक ‘काला दिवस’ के अवसर पर कैंडल मार्च में हिस्सा लेंगे। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शाशि थरूर ने नोटबंदी की घोषणा के एक साल पूरा होने के अवसर पर माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्वीटर की डीपी को ब्‍लैक (काला) कर विरोध दर्ज कराया है।

नोटबंदी को बताया ‘त्रासदी’

इस बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने बुधवार सुबह नोटबंदी के बाद लोगों को हुई परेशानियों की ओर इशारा करते हुए ट्विटर पर एक बुजुर्ग की तस्वीर शेयर की जो बैंक की लाइन में खड़े रोते दिख रहे हैं। राहुल ने इस तस्वीर के साथ लिखा, ‘एक आँसू भी हुकूमत के लिए ख़तरा है, तुमने देखा नहीं आँखों का समुंदर होना।’

राहुल गांधी ने एक और ट्वीट कर नोटबंदी को त्रासदी करार दिया है। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने ट्वीट किया, ‘नोटबंदी एक त्रासदी है। हम उन लाखों ईमानदार भारतीयों के साथ हैं, जिनका जीवन और जीविका के साधन प्रधानमंत्री के विचारहीन कदम से बर्बाद हो गया।’

देखिए, कांग्रेस और उनके अन्य नेताओं ने कैसे जताया विरोध

गौरतलब है कि पिछले साल 8 नवंबर 2016 को मोदी सरकार ने 500 और 1000 के नोटों पर बैन लगा दिया था। जिसके बाद आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। नोटबंदी के दौरान लोगों को करीब 50 दिन तक लंबी कतारों में लगाना पड़ा। हालांकि विपक्षी पार्टियों ने नोटबंदी के इस फैसले का जमकर विरोध किया था, लेकिन सरकारी फैसले के सामने किसी की नहीं चली।

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