लाभ के पद का मामलाः केजरीवाल सरकार को बड़ा झटका, AAP के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द, चुनाव आयोग की सिफारिश को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

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चुनाव आयोग द्वारा लाभ का पद (ऑफिस ऑफ प्रॉफिट) मामले में दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार (21 जनवरी) को अपनी मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद अब आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता समाप्त हो गई है। आप विधायकों को अयोग्य घोषित करने को लेकर सरकार ने नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।

File Photo: PTI

आगामी 14 फरवरी को आम आदमी पार्टी सरकार के तीन वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसे में यह दिल्ली की केजरीवाल सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने लाभ के पद वाले मामले में AAP के 20 विधायकों को शुक्रवार (19 जनवरी) को अयोग्य करार देते हुए उनकी सदस्यता रद्द करने की सिफारिश राष्ट्रपति से की थी, जिसके बाद इस सिफारिश पर राष्ट्रपति की ओर से मुहर लगा दी गई।

अब राष्ट्रपति की ओर से मंजूरी मिलने के बाद 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में आप पार्टी के विधायकों की संख्या 66 से घटकर सीधे 46 पर आ गई है। बता दें कि, राष्ट्रपति द्वारा चुनाव आयोग की सिफारिश स्वीकार करने के बाद अब 20 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने होंगे। हालांकि आम आदमी पार्टी के सामने कोर्ट जाने का ही विकल्प बचा है।

हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कल यानी सोमवार (22 जनवरी) को होनी है। अगर हाई कोर्ट से पार्टी राहत नहीं मिलती है तो वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। अगर आप अपने विधायकों की सदस्यता रद्द होने के फैसले को स्वीकार करती है तो अब दूसरा रास्ता उपचुनाव का ही बचता है।

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Posted by Janta Ka Reporter on Saturday, 20 January 2018

20 विधायकों की सदस्यता रद्द होने पर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और और केजरीवाल सरकार में मंत्री गोपाल राय ने कहा कि हम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलकर अपना पक्ष रखना चाह रहे थे, बीचे में ही यह खबर आ गई, अब हम हाई कोर्ट जाएंगे, अगर जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे।

जबकि AAP के एक और वरिष्ठ नेता आशुतोष ने कहा कि आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य ठहराने से संबंधित राष्ट्रपति का आदेश असंवैधानिक और लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। वहीं, कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा कि बीजेपी और चुनाव आयोग ने मामले को 3 सप्ताह से ज्यादा फंसाकर रखा, इससे आम आदमी पार्टी को राज्यसभा चुनाव में फायदा हुआ।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि केजरीवाल सरकार पर 20 विधायकों को संसदीय सचिव बनाकर लाभ का पद देने का आरोप लगा है। आम आदमी पार्टी ने 13 मार्च 2015 को अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया था। इसके बाद 19 जून को वकील प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति के पास इन सचिवों की सदस्यता रद्द करने के लिए आवेदन किया था। जिसके बाद राष्ट्रपति ने शिकायत चुनाव आयोग भेज दी थी।

चुनाव आयोग ने आप के 21 विधायकों को ‘लाभ का पद’ मामले में कारण बताओ नोटिस दिया था। इस मामले में पहले 21 विधायकों की संख्या थी। हालांकि विधायक जनरैल सिंह के पिछले साल विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद इस मामले में फंसे विधायकों की संख्या 20 हो गई है। ‘लाभ के पद’ का हवाला देकर इस मामले में सदस्यों की सदस्यता भंग करने की याचिका डाली गई थी।

दिल्ली सरकार ने दिल्ली असेंबली रिमूवल ऑफ डिस्क्वॉलिफिकेशन ऐक्ट-1997 में संशोधन किया था। इस विधेयक का मकसद संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से छूट दिलाना था, जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नामंजूर कर दिया था। इसके बाद से इन सभी 21 विधायकों की सदस्यता पर और सवाल खड़े हो गए थे। आप के विधायक 13 मार्च 2015 से आठ सितंबर 2016 तक संसदीय सचिव के पद पर थे।

 

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