उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगे से पूर्व आयोजित महापंचायत में भड़काऊ भाषण देने के आरोपी योगी सरकार में मंत्री, सांसद, विधायक सहित भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के चार नेताओं के खिलाफ स्थानीय कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी 2018 को होगी।
HT FILE PHOTOन्यूज एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक मुजफ्फरनगर की एक स्थानीय अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश राणा, पूर्व केंद्रीय मंत्री व मुजफ्फरनगर के सांसद संजीव बालियान, बीजेपी विधायक संगीत सोम और उमेश मलिक के खिलाफ साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगा मामले में गैर-जमानती वॉरंट जारी किए हैं।
इनके खिलाफ मुकदमा चलाने की राज्य सरकार की इजाजत के बाद अदालत ने वॉरंट जारी किए हैं। विशेष जांच समिति (एसआईटी) के अधिकारियों के अनुसार, अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश मैजिस्ट्रेट मधु गुप्ता ने शुक्रवार को वॉरंट जारी करते हुए आरोपियों से 19 जनवरी को अदालत में पेश होने के लिए कहा।
एसआईटी ने आरोपियों पर आईपीसी की धारा 153 ए के तहत कथित तौर पर घृणा फैलाने वाले भाषण देने के संबंध में मुकदमा चलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से अनुमति मांगी थी। सरकार ने इसकी अनुमति दे दी। आरोप है कि इन लोगों ने एक महापंचायत में हिस्सा लिया था और भाषण के जरिए हिंसा भड़काई थी।
इसके अलावा आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है। मुजफ्फरनगर और इसके आस-पास के इलाकों में साल 2013 के अगस्त और सितंबर महीने में सांप्रदायिक हिंसा में 60 लोगों की मौत हो गई थी और 40,000 से ज्यादा विस्थापित हो गए थे।