बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा में साबित किया बहुमत

0

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकार ने शुक्रवार(28 जुलाई) को बिहार विधानसभा में बेहद अहम विश्वास मत जीत लिया।
विस अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने बताया कि जदयू, भाजपा और अन्य के सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में 131 मत पड़े ओैर विपक्ष में 108 मत पड़े। विश्वास मत की प्रक्रिया मत विभाजन के जरिए पूरी हुई।

NDTV

पहले राजग ने राज्यपाल को 132 विधायकों के समर्थन की सूची दी थी। इसमें जदयू के 71, भाजपा के 53, रालोसपा के दो, लोजपा के दो, जीतनराम मांझी की पार्टी हम का एक और तीन निर्दलीय थे। बिहार विधानसभा के 243 सदस्यों में राजद के 80 विधायक, कांग्रेस के 27 विधायक और भाकपा माले के तीन विधायक हैं।

इस दौरान आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज बिहार का युवा उदास हो गया है। मुझे बहाना बनाकर फंसाया गया। छवि बचाने के लिए ये सब किया किया गया। हम लोग इतने मुर्ख नहीं हैं कि समझ न सकें कि ये लोग क्या कर रहे हैं। नीतीश ने पूरे बिहार को धोखा दिया है। उनके अंदर हिम्मत थी तो मुझे बर्खास्त करते।

तेजस्वी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नीतीश कुमार जी रणछोड़ हो गए हैं, हे श्रीराम से जय श्रीराम कह पलटी मार गए। नीतीश के बगल में बैठे थे तो पता नहीं था इनका असली चेहरा अब नजर आया है। सुशील मोदी और नीतीश पर भी तो केस चल रहा है फिर इनदोनों ने शपथ कैसे ले ली?

बता दें कि बिहार में महागठबंधन खत्म हो गया है। नीतीश कुमार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ हो गए हैं। महागठबंधन की सरकार से इस्तीफे के तुरंत बाद नीतीश कुमार को बीजेपी का साथ मिल गया और अब वह दोबारा आज(27 जुलाई) मुख्यमंत्री पद की शपथ ले लिए हैं। वहीं, सीनियर बीजेपी नेता सुशील मोदी ने बतौर उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

क्या है विधानसभा का समीकरण

243 सदस्यीय विधानसभा में नीतीश सरकार को बहुमत के लिए 122 सदस्यों के समर्थन की जरूरत थी। नीतीश के पास 71 विधायक हैं, जबकि बीजेपी और सहयोगियों के पास 58 सीटें हैं। जबकि चार निर्दलीय विधायक हैं। वहीं, सबसे बड़े दल आरजेडी के खाते में 80, कांग्रेस के पास 27 और सीपीएम के पास 3 विधायक हैं।

पटना हाईकोर्ट में RJD की याचिका मंजूर

उधर आरजेडी ने राज्यपाल के फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट में आरजेडी की याचिका मंजूर कर ली गई है। जिसपर सोमवार को सुनवाई होगी। आरजेडी का कहना है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उन्हें सरकार बनाने के लिए बुलाया जाना चाहिए था। हाईकोर्ट ने आज के विश्वासमत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

JDU में बगावत के सुर तेज

24 घंटे के अंदर महागठबंधन छोड़कर बीजेपी के साथ सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार के लिए आगे की राह आसान नहीं नजर आ रही है। नीतीश कुमार द्वारा महागठबंधन तोड़ने के बाद इस बीच उनकी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में बगावत के सुर तेज हो गए हैं।

जेडीयू सांसद अली अनवर की ओर से खुलकर नीतीश कुमार के फैसले का विरोध करने के बाद पूर्व जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव की भी नाराजगी सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार के एनडीए में जाने से शरद यादव नाराज बताए जा रहे हैं।

शायद यही वजह रही कि गुरुवार को नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्‍सा लेने के लिए शरद यादव पटना नहीं गए। इस दौरान वह दिल्‍ली में ही मौजूद रहे। इस बीच खबर आ रही है कि शरद यादव ने दिल्ली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here