राफेल डील: ‘जनता का रिपोर्टर’ के खुलासे पर घिरी मोदी सरकार ने आरोपों को बताया ‘शर्मनाक’, जानिए क्या है पूरा मामला?

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‘जनता का रिपोर्टर’ द्वारा राफेल डील पर किए गए एक खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। इस बीच शुक्रवार (17 नवंबर) को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने आरोपों को शर्मनाक बताते हुए राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे का बचाव किया है। सीतारमण ने कहा कि 36 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद संबंधी सौदे से जुड़े आरोप ‘‘शर्मनाक’’ हैं और ऐसी कलह सशस्त्र बलों के लिए नुकसानदायक है।सीतारमण ने संवाददाताओं को बताया कि, ‘‘यह आरोप शर्मनाक हैं…इस सौदे को पारदर्शी प्रक्रिया का पालन करते हुये अंतिम रूप दिया गया।’’ रक्षा मंत्री ने कहा कि इस सौदे को लेकर कलह सशस्त्र बलों के लिए नुकसानदायक होगी। उन्होंने कहा कि वायुसेना की फौरी जरूरत ही इस करार को करने की अहम वजह थी।

उन्होंने कहा कि 36 राफेल विमानों के लिये अंतिम करार पर सितंबर 2016 में दस्तखत किये गये। इससे पहले भारत और फ्रांस के बीच पांच दौर की लंबी चर्चा हुई और इसे सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने भी मंजूरी दी थी। रक्षा मंत्री ने कहा कि यूपीए सरकार विमान खरीदने के प्रस्ताव पर 10 साल तक चुप्पी साधे बैठी रही।

राहुल गांधी ने साधा निशाना

बता दें कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार (16 नवंबर) को ‘जनता का रिपोर्टर’ के खबर को शेयर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जोरदार हमला बोला। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने मंगलवार को ‘जनता का रिपोर्टर’ के खबर को शेयर करते हुए ट्वीट कर लिखा है, ‘मोदी जी- अच्छा है सूट तो आपने उतार दिया, लेकिन लूट का क्या?’

इसके साथ ही कांग्रेस उपाध्यक्ष ने रिलायंस से भी इस मामले में जवाब मांगा है। साथ ही उन्होंने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए ट्वीट में रिलायंस का नाम लेकर कहा कि वह ‘मेक इन इंडिया’ का जरूरी हिस्सा है।

वहीं, मीडिया से सवाल पूछते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आप (पत्रकार) मुझसे सवाल पूछते हैं मैं ठीक से जवाब देता हूं। आप पीएम से राफेल डील के बारे में क्यों नहीं पूछते? सिर्फ एक बिजनसमैन के लिए उन्होंने पूरी डील बदल दी थी। आप अमित शाह के बेटे के बारे में क्यों नहीं पूछते? यह सवाल मैं आपसे पूछता हूं।

बता दें कि इससे पहले मंगलवार (14 नवंबर) को ‘जनता का रिपोर्टर’ द्वारा राफेल डील पर किए गए एक खुलासे के बाद आनन-फानन में प्रेस कॉन्फेंस कर मोदी सरकार से कई तीखे सवाल पूछे। ‘जनता का रिपोर्टर’ का हवाला देते हुए कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फेंस कर आरोप लगाया है कि राफेल डील पर मोदी सरकार ने ‘राष्ट्रीय हित और राष्ट्रीय सुरक्षा’ के साथ खिलवाड़ किया है, जिसे माफ नहीं किया जा सकता है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने राफेल एयरक्राफ्ट खरीद में मोदी सरकार पर घोटाले का आरोप लगाया है। सुरजेवाला का कहना है कि राफेल खरीद में कोई पारदर्शिता नहीं है। कांग्रेस ने मंगलवार को राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मोदी सरकार ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ (सरकारी सांठगांठ वाले पूंजीवाद) को बढ़ावा देकर राष्ट्रीय और सुरक्षा हितों से समझौता कर रही है।

हालांकि बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में संभावित पूछताछ के डर से कांग्रेस लोगों का ध्यान भटकाना चाहती है। वहीं, रिलायंस डिफेंस लिमिटेड ने भी कांग्रेस के आरोपों को आधारहीन करार दिया है। इस बीच सोशल मीडिया पर यह मामला गर्म होता दिखाई दे रहा है।

कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस ने फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमान की खरीद में घोटाले तथा केंद्र की मोदी सरकार द्वारा राष्ट्रीय हितों एवं सुरक्षा के साथ समझौता करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि इसके कारण सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा। साथ ही सुरजेवाला ने सौदे में सांठगांठ वाले पूंजीवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए सरकार से सवाल किया कि वह यूपीए सरकार के दौरान बातचीत के जरिये तय मूल्य से कहीं अधिक मूल्य पर विमान खरीदकर एक व्यापार समूह के हितों को आगे क्यों बढ़ा रहे हैं। उन्होंने इस सौदे में रक्षा खरीद प्रक्रिया तथा हिन्दुस्तान एयरनोटिक्स लि. के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

सुरजेवाला ने कहा कि यूपीए शासनकाल में 12 दिसंबर, 2012 को राफेल से 10.2 अरब अमेरिकी डॉलर (तब के 54 हजार करोड़ रुपये) में 126 लड़ाकू विमान खरीदने का फैसला लिया गया था। इनमें से 18 विमान को तैयार स्थिति में और 108 को भारत में ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा तकनीक हस्तांतरण के साथ निर्मित किया जाना था।

लेकिन, मोदी सरकार ने 30 जुलाई, 2015 को यह सौदा रद्द कर दिया और अगले ही साल 23 सितंबर 2016 को 8.7 अरब अमेरिकी डॉलर में 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का सौदा किया। बाद में अनिल अंबानी की रिलांयस डिफेंस लिमिटेड ने राफेल की निर्माता कंपनी दासौत एविएशन के साथ भारत में रक्षा उत्पादन के लिए संयुक्त उपक्रम समझौता कर लिया।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि यूपीए काल में किए गए सौदे में हर विमान का मूल्य 526.10 करोड़ आता, लेकिन अब हर विमान का मूल्य 1570.80 करोड़ रुपये आएगा। इससे सरकारी खजाने को काफी बड़ा नुकसान होगा। यही नहीं, फ्रेंच विमान निर्माता कंपनी ने तकनीक हस्तांतरण (ट्रांसफर ऑफ टेक्नॉली) से भी इनकार कर दिया और एचएएल के स्थान पर रिलायंस डिफेंस के साथ समझौता कर लिया।

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा कि विमान को ऊंचे दाम पर क्यों खरीदा जा रहा है तथा एक निजी प्रतिष्ठान के व्यापारिक हितों को एक सार्वजनिक निकाय की अनदेखी कर क्यों बढ़ाया जा रहा है। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद में पूरी तरह अपारदर्शी रखा गया, रक्षा खरीद प्रक्रिया के अनिवार्य प्रावधानों का प्रत्यक्ष उल्लंघन हुआ।

 

 

 

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