NGT ने श्री श्री रविशंकर को थमाया अवमानना का नोटिस, पूछा- क्यों न आप पर कार्रवाई हो

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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने एक अवमानना याचिका पर गुरुवार(27 अप्रैल) को संस्था ऑर्ट ऑफ लिविंग(एओएल) के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रवि शंकर को नोटिस जारी किया है। साथ ही श्री श्री से पूछा है कि क्यों न आप पर कार्रवाई की जाए। 

दरअसल, श्री श्री अपने एनजीओ के सांस्कृतिक कार्यक्रम की इजाजत मिलने पर यमुना के डूब क्षेत्र को नुकसान पहुंचने को लेकर उन्होंने केंद्र और एनजीटी को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा था कि नदि इतनी ही साफ ही थी तो कार्यक्रम को शुरुआत में ही रोका जाना चाहिए था।

एनजीटी अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की अगली तारीख नौ मई से पहले उनका जवाब मांगते हुए कहा कि  प्रतिवादी को नोटिस जारी किया जाए। हालांकि, श्री श्री के एनजीओ आर्ट ऑफ लिविंग के प्रवक्ता और कानूनी सलाहकार केदार देसाई ने कहा कि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। यह कहना कि एक नोटिस जारी किया गया है, तथ्यात्मक रूप से गलत है। मामले को नौ मई तक के लिए टाल दिया गया है।

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वहीं, देसाई की दलील का विरोध करते हुए याचिकाकर्ता के वकील राहुल चौधरी ने कहा कि पीठ ने एओएल के संस्थापक को नोटिस जारी किया है और नौ मई तक उनका जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता मनोज मिश्रा की उनकी याचिका को लेकर खिंचाई करते हुए कहा कि हमारे समक्ष आने से पहले यह प्रेस के पास कैसे पहुंच गया।

पीठ ने कहा कि रजिस्ट्री में याचिका दायर करने से पहले ही आप उसे मीडिया को दे देते हैं, यह आपकी ओर से सही नहीं है। हम आपसे और अधिक जिम्मेदार बनने की उम्मीद करते हैं। वहीं, मिश्रा की ओर से पेश होते हुए अधिवक्ता संजय पारिख ने इसका खंडन किया और अदालत को बताया कि उन्होंने मीडियाकर्मियों को कुछ भी नहीं दिया।

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मिश्रा ने रविशंकर के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उनकी टिप्पणियों ने न्याय की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष व्यवस्था में दखलंदाजी की है। बता दें कि एओएल का विश्व संस्कृति समारोह 11 से 13 मार्च 2016 को यमुना खादर क्षेत्र में हुआ था।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, विशेषज्ञों की टीम ने एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के सामने इस बात की गवाही दी है कि कई सौ एकड़ में आयोजित किए गए इस कार्यक्रम की वजह से नदी का ताल पूरी तरह बर्बाद हो गया है। साक्ष्य में कहा गया कि इस नुकसान की भरपाई कम से कम 10 साल में हो पाएगी और इसमें करीब 42 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल मार्च में श्रीश्री रविशंकर द्वारा कराए गए इस महोत्सव की वजह से यमुना के डूबक्षेत्र में पनपने वाली जैव विविधता हमेशा के लिए बर्बाद हो गई है। इसमें सबसे अधिक नुकसान उस जगह को पहुंचा है, जहां पर रविशंकर ने अपना विशालकाय स्टेज लगवाया था।

तीन दिन तक चले इस कार्यक्रम के समाप्ति के बाद यमुना किनारे दूर-दूर तक सिर्फ गंदगी और कूड़े के ढेर दिखाई दिए थे। इस विशाल महोत्सव से पहुंचे पर्यावरण को नुकसान के मद्देनजर एनजीटी ने श्रीश्री रविशंकर की आर्ट ऑफ लिविंग पर 5 करोड़ का जुर्माना लगाया था। जिसके बाद आर्ट ऑफ लिविंग को इस जुर्माने का भुगतान करना पड़ा था।

 

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