NCERT की किताबें पढ़ाए जाने के फैसले पर उलेमाओं ने कहा- योगी सरकार जबरदस्ती मदरसों के पाठ्यक्रमों में कर रही बदलाव

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उत्तर प्रदेश के मदरसों में एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाए जाने के योगी सरकार के फैसले पर विवाद खड़ा हो गया है। देवबंदी उलेमाओं ने राज्य के मदरसों में एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाये जाने के फैसले से असहमति जताई है।
उलेमाओं ने कहा है कि प्रदेश की योगी सरकार जबरदस्ती मदरसों के पाठ्यक्रमों में बदलाव कर रही है। हम इस फैसले को कतई स्वीकार नहीं करेंगे।

PHOTO: TOI

न्यूज एजेंसी भाषा से बातचीत में दारुम उलूम अशरफिया के मोहतमित मौलाना सालिक अशरफ ने कहा कि राज्य की योगी सरकार के इस फरमान से हम किसी भी तरह से सहमत नहीं हैं। हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। दरअसल मदरसों को ऑनलाइन करने के बाद अब योगी सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है, जिसके मुताबिक मदरसों की मजहबी किताबों के साथ-साथ अब छात्रों को एनसीईआरटी की किताबें भी पढ़ाई जाएगी।

इसमें खास तौर पर गणित और विज्ञान की किताबें एनसीईआरटी की होगी। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने सोमवार (30 अक्टूबर) को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी कि मदरसों में अब एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई होगी।उन्होंने कहा कि मदरसों में अब आधुनिक विषय पढ़ाए जाएंगे ताकि उनमें पढ़ने वाले बच्चे भी अन्य स्कूलों के छात्रों की बराबरी कर सकें।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में तहतानियां, फौकानियां, आलिया और उच्च आलिया स्तर के कुल 19,143 मदरसे बोर्ड में रजिस्टर्ड हैं। NBT में छपी रिपोर्ट के मुताबिक अब तक तहतानियां (1 से 5) और फौकानिया (5 से 8) स्तर के मदरसों में ही यह विषय पढ़ाये जाते थे, लेकिन अब सरकार से मंजूरी मिलने के बाद मदरसा बोर्ड आलिया या उच्च आलिया स्तर (हाई स्कूल व उससे ऊपर) के मदरसों में भी गणित और विज्ञान जैसे विषयों को अनिवार्य करेगा।

अभी तहतानियां और फौकानिया में सरकारी स्कूलों की तर्ज पर हिंदी, अंग्रेजी, गणित आदि विषय पाठयक्रम में शामिल हैं लेकिन मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल (हाई स्कूल और हाई स्कूल के बाद) में गणित, इतिहास, भूगोल व विज्ञान वैकल्पिक विषय के तौर पर पढ़ाये जाते हैं। नये सिलेबस में हिंदी और अंग्रेजी को छोड़कर बाकी सभी विषयों की किताबें उर्दू भाषा में होंगी।

2682 मदरसों की मान्यता रद्द करेगी योगी सरकार

बता दें कि इससे पहले योगी सरकार ने फर्जीवाड़े और अनियमितता रोकने के लिए मदरसों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का फैसला किया था। पिछले दिनों राज्य अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने उन सभी मदरसों को जो सरकारी अनुदान पाते हैं, उन्हें ऑनलाइन करने के लिए डेडलाइन दी थी। लेकिन अंतिम तिथि से पहले वेबसाइट पर अपनी डिटेल्स (विवरण) अपलोड नहीं करने वाले 2,682 मदरसों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी।

एक अधिकारी ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया था कि ऑनलाइन विवरण अपलोड करने की अंतिम तारीख 15 अक्टूबर थी। वहीं, वेब पोर्टल पर विवरण अपलोड करने वाले 16,461 मदरसों की मान्यता बरकरार रहेगी और उन्हें अनुदान का हक होगा, लेकिन 2,682 मदरसों ने अपनी डिटेल्स वेबसाइट पर नहीं दी है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में तहतानियां, फौकानियां, आलिया और उच्च आलिया स्तर के कुल 19,143 मदरसे हैं। इस वेबसाइट पर शिक्षक, मदरसों के अन्य कर्मचारी और छात्रों के विवरण के अलावा इमारत की फोटो और क्लासरूम की माप सहित अन्य दूसरी जानकारियां भी देनी थी।

इससे पहले वेबसाइट पर आ रही दिक्कतों को देखते हुए मदरसा बोर्ड ने ब्योरा देने की आखिरी तारीख दो बार बढ़ाते हुए पहले 30 सितंबर किया गया फिर इसे बढ़ाकर 15 अक्टूबर कर दी गई थी। इसके बावजूद 16,461 मदरसों ने ही अपना विवरण साइट पर अपलोड किया। इस लिहाज से अब 2,682 मदरसे सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं ले पाएंगे।

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