आखिर जो देशभक्त हैं वो चुनाव कैसे हार गए, जेएनयू में लेफ्ट का जीतना क्या पाकिस्तान की साज़िश तो नहीं?

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टाईम्स नॉउ के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी का प्राईम टाईम शो काफी सुर्खियों में रहता है, वहां जाने वाले हर एक मेहमान की शिकायत होती है कि अर्नब डिबेट में नीचा दिखाते हैं, और कभी भी मेंहमानों को बोलने का मौका नहीं दिया जाता है।

आपको याद होगा कैसे देशद्रोह के मुद्दे पर गोस्वामी ने जेएनयू छात्र उमर खालिद को देश द्रोही करार दिया था, यह पहला ऐसा मामला नहीं है। तहलका के पत्रकार असद अशरफ को भी बटला हाउस एनकांटर मुद्दे पर अर्नब ने आईएसआई एजेंट घोषित कर दिया था।

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हम आपको ये सारी चीज़े इसलिए बता रहे हैं क्योकि इस समय सबकी निगाहें जेएनयू छात्रसंघ पर हैं जहां एक बार फिर लेफ्ट विंग के सर जीत का सेहरा बंधा है।

लेफ्ट विंग से जुड़े छात्र संघ ने चारों की चारों सीट जीत कर आरएसएस द्वारा संचालित छात्र संघ ABVP को शर्मनाक शिकस्त से दोचार किया है।

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गौरतलब है कि पिछले साल के चुनाव में ABVP के खाते में एक सीट आयी थी, ऐसे में इस साल इस का एक सीट भी ना जीतना यूनिवर्सिटी में इसके प्रति छात्रों के रवैये को दर्शाता है।

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राजनीतिक रूप से सक्रिय यूनिवर्सिटी में करीब 35 उम्मीदवारों के चुनावी भविष्य का फैसला हुआ है। हाल के महीनों में यूनिवर्सिटीज़ कैम्पस में हुए विवादों की छाया में यह चुनाव हो रहा है और लोगों की नजरें इस पर लगी हुई हैं।

गौरतलब है कि अर्नब गोस्वामी सहित तमाम न्यूज़ चैनस ने जेएनयू को देश द्रोहियों का अड्डा बताया था

अब जेएनयू के छात्र, गोस्वामी का प्रसिध्द डॉयलाग ‘The nation wants to know’ को निशाने पर लेते हुए ये सवाल खड़ा कर रहे हैं क्या अरनब अपने प्राईम टाईम पर इस मुद्दे पर डिबेट करेंगे कि आखिर जो देशभक्त हैं वो चुनाव कैसे हार गए? लेफ्ट के एक बार फिर जेएनयू में जीतने में पाकिस्तान का क्या रोल है? और अगर लेफ्ट ने लाल झंडा फहराया है तो केंद्र सरकार को ज़रूर इस साज़िस के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

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फिलहाल ये तो सोशल मीडिया बज्ज है लेकिन ये देखना वाकई दिलचस्प होगा कि क्या अर्णब अपने प्राइम टाइम में जेएनयू के छात्र संघ पर डिबेट करेंगे या नहीं।

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