मीडिया रिपोर्ट में दावा- विपक्ष के तेवरों को देखते हुए मोदी सरकार तीन तलाक बिल को संसदीय समिति के पास भेजने को तैयार

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राज्यसभा में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के खिलाफ मुस्लिम महिला (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक पर बुधवार (3 दिसंबर) को सरकार और विपक्ष के बीच हुई तीखी बहस के बाद गुरुवार (4 दिसंबर) को सरकार के पास इस बिल को पास कराने का आखिरी मौका था, लेकिन सरकार को सफलता मिलती नहीं दिखाई दे रही है। NDTV के मुताबिक राज्यसभा में संख्याबल पर्याप्त नहीं होने और विपक्ष के तेवरों को देखते हुए मोदी सरकार तीन तलाक बिल को अब एक संसदीय समिति के पास समीक्षा के लिए भेजने की विपक्ष की मांग पर राजी हो गई है। Triple talaqबता दें कि सरकार तीन तलाक बिल को राज्यसभा में भी इसी सत्र में पारित करवाने की कोशिश कर रही थी, जो शुक्रवार को समाप्त हो रहा है। गौरतलब है कि तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के खिलाफ मुस्लिम महिला (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक को बुधवार (3 दिसंबर) को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में पेश किया।

चूंकि सरकार के पास उच्च सदन में बहुमत भी नहीं है, और विपक्ष के साथ-साथ बीजेपी के सहयोगी दल भी चाहते हैं कि इस बिल में तमाम खामियां हैं और उसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए। बिल को लेकर तो सत्तारूढ़ एनडीए के दो अहम सहयोगी दल शिवसेना तथा तेलुगूदेशम पार्टी ने भी उनका साथ नही दे रहे हैं।

इनके अलावा एआईएडीएमके तथा बीजू जनता दल जैसे मित्र दल भी इस मुद्दे पर सरकार को समर्थन नहीं दे रहे हैं, और चाहते हैं कि विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया जाए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राज्यसभा में संख्याबल पर्याप्त नहीं होने के चलते मोदी सरकार अब तीन तलाक बिल को संसदीय समिति के पास समीक्षा के लिए भेजने की विपक्ष की मांग पर सहमत हो गई है।

NDTV के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि अब यह बिल संसद के अगले सत्र में ही पारित हो पाएगा, क्योंकि अब समिति का गठन किया जाना होगा, और फिर वह समिति विधेयक की समीक्षा कर बिल में बदलावों को लेकर सुझाव देगी। बता दें कि तीन तलाक को गैरकानूनी घोषित कर उसके लिए तीन साल तक की कैद की सजा का प्रावधान करने वाले बिल को लोकसभा में पिछले सप्ताह ही पारित कर दिया गया था, जहां केंद्र सरकार खासे बहुमत में है।

लोकसभा में तीन तलाक बिल पास

बता दें कि लोकसभा ने गुरुवार (28 दिसंबर) को बहुचर्चित मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक -2017 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सदन ने विपक्षी सदस्यों की ओर से लाये गये कुछ संशोधनों को मत विभाजन से तथा कुछ को ध्वनिमत से खारिज कर दिया। बिना किसी संशोधन के पास हुए इस विधेयक में एक साथ तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाया गया है।

विधेयक में प्रावधान

एक साथ तीन तलाक अवैध: किसी व्यक्ति द्वारा उसकी पत्नी के लिए एक साथ तीन तलाक, चाहे बोले गए हों, लिखित हों या इलेक्ट्रानिक रूप में हो गैरकानूनी माना जाएगा।

तीन साल तक की जेल: एक साथ तीन तलाक देने वाले को एक से तीन साल तक कारावास और जुर्माना हो सकता है।

गुजारा भत्ता मिलेगा: तीन तलाक पीड़ित पत्नी और बच्चों के जीवन यापन के लिए गुजारा भत्ता मिलेगा। पत्नी अव्यस्क बच्चों की अभिरक्षा की भी हकदार होगी।

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