आचार संहिता उल्लंघन के एक और मामले में पीएम मोदी को मिली ‘क्लीनचिट’, राहुल गांधी को चुनाव आयोग ने भेजा कारण बताओ नोटिस

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चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के एक और मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार (1 मई) को क्लीनचिट दे दी। चुनाव आयोग ने बुधवार को स्पष्ट किया कि पहली बार वोट देने जा रहे मतदाताओं से अपना वोट बालाकोट एयर स्ट्राइक के नायकों और पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को समर्पित करने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान चुनाव प्रचार में सशस्त्र बलों का उल्लेख नहीं करने के उसके निर्देशों का उल्लंघन नहीं करता है। वहीं, दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को उनकी एक टिप्पणी के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का रक्षा बलों पर दिया गया बयान भी आदर्श चुनाव संहिता का उल्लंघन नहीं करता है। प्रधानमंत्री पर हमला करते हुए कमलनाथ ने 14 अप्रैल को कहा था कि जब मोदी बच्चे थे जब जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने देश के रक्षा बलों को बनाया था। कमलनाथ मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के हरसूद में एक रैली को संबोधित कर रहे थे।

पीएम मोदी ने क्या कहा था?

लातूर में प्रधानमंत्री के बयान का हवाला देते हुए आयोग ने कहा, ‘‘परामर्शों, आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों के अनुरूप मामले का विस्तार से परीक्षण किया गया। उस्मानाबाद संसदीय सीट के निर्वाचन अधिकारी की ओर से भाषण की 11 पन्नों की प्रमाणित प्रति भेजी गई थी जिसका परीक्षण किया गया। इसके बाद आयोग का विचार है कि इस मामले में मौजूदा परामर्शों/प्रावधानों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।’’

पीएम मोदी ने नौ अप्रैल को महाराष्ट्र के लातूर के औसा में पहली बार मतदान करने वाले लोगों से कहा, ‘‘ क्या आपका पहला वोट हवाई हमला करने वालों के लिए हो सकता है?’’ प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘‘मैं पहली बार मतदान करने वालों से कहना चाहता हूं…क्या आपका पहला वोट वीर जवानों को समर्पित हो सकता है जिन्होंने पाकिस्तान में हवाई हमले किए।’’

माना जाता है कि महाराष्ट्र के स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों ने चुनाव आयोग से कहा था कि पीएम मोदी का बयान पहली नजर में उसके आदेश का उल्लंघन करता है, जिसमें पार्टियों से प्रचार के दौरान सशस्त्र बलों का इस्तेमाल नहीं करने को कहा गया था।

पीएम मोदी के खिलाफ दो मामलों में हुई थी शिकायत

गौरतलब है कि विपक्षी दलों ने इन दोनों मामलों मे आयोग से शिकायत की थी। वर्धा भाषण के मामले में 30 दिन बाद और लातूर मामले में 20 दिन बाद आयोग ने फैसला सुनाया है। चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लातूर में दिए गए भाषण को आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन नहीं माना है। आयोग ने नौ अप्रैल को लातूर जिले के औसा में दिए गए भाषण के बारे में महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी की रिपोर्ट मांगी थी।

आयोग ने रिपोर्ट का अध्यन करने पर पाया कि चुनाव प्रचार के बारे में जो निर्देश जारी किए गए थे, मोदी का भाषण उसका उल्लंघन नहीं करता है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि पीएम मोदी ने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं से पुलवामा शहीदों के नाम पर वोट मांगा था जिस पर काफी हंगामा हुआ था।

राहुल गांधी को कारण बताओ नोटिस

इस बीच चुनाव आयोग ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को उनकी उस कथित टिप्पणी के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार ने एक नया कानून बनाया है जिसके तहत आदिवासियों को गोली मारी जा सकती है। आयोग ने 23 अप्रैल को मध्य प्रदेश के शहडोल में दिए गए गांधी भाषण का हवाला देते हुए कहा कि आदर्श आचार संहिता के प्रावधान राजनीतिक विरोधियों पर ‘असत्यापित’ आरोप लगाने पर रोक लगाते हैं।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, चुनाव आयोग ने गांधी को नोटिस का जवाब देने के लिए 48 घंटे का वक्त दिया है। इस अवधि में जवाब नहीं देने की सूरत में आयोग अपनी तरफ से कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होगा। भाजपा के दो कार्यकर्ताओं ने आयोग से शिकायत की थी जिसके बाद मध्य प्रदेश के चुनाव अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई।

 

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