मुजफ्फरनगर गैंगरेप मामले को झूठ के द्वारा सांप्रदायिक रंग देने वाले शख्‍स को फॉलो करते हैं PM मोदी

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उत्तर प्रदेश में जब से योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने हैं, उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती राज्य में बिगड़े कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करना है। क्योंकि आए दिन महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और बलात्कार की घटनाएं सामने आ रही हैं। जेवर गैंगरेप और रामपुर में लड़कियों के साथ सरेआम छेड़छाड़ की घटनाओं के बाद अब मुजफ्फरनगर में नाबालिग युवती को बंधक बनाकर 10 दिनों तक गैंगरेप का मामला सामने आया है।उत्तर प्रदेशन्यूज पेपर अमर उजाला के मुताबिक, मुजफ्फरनगर के थाना भोपा क्षेत्र के एक गांव की किशोरी को गांव के ही चार युवकों ने अपहरण कर लिया था। इसके बाद 10 दिन तक युवती को बंधक बनाकर उसके साथ गैंगरेप किया। और आरोपियों ने युवती को बदहवास हालत में गंगनहर की पटरी पर फेंक कर फरार हो गए। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उनकी धरपकड़ शुरू कर दी है।

यह मामला तब सामने आया जब पीड़िता ने खुद किसी तरह भोपा थाना में जाकर पुलिस को जानकारी दी। युवती द्वारा थाने में दर्ज कराए रिपोर्ट के अनुसार 6 सितंबर को युवती मुजफ्फरनगर की नईमंडी कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में अपने मामा के घर जाने के लिए वह बस के इंतजार में दोपहर 11 बजे के करीब अपनी गांव के बाहर गंगनहर पुल पर आकर खड़ी हो गई।

तभी कार सवार चार युवक सलीम, असलम, अकरम और अयूब वहां आए और कहा कि हम तुम्हें लिफ्ट दे देंगे। चारो युवक युवती के गांव के ही थे इसलिए वो उन पर विश्वास करके कार में बैठ गई। आरोप है कि रास्ते में चारों आरोपियों ने किशोरी को तमंचे के दम पर अपहरण कर उसे किसी अज्ञात स्थान पर ले गए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वहां युवती को बंधक बनाकर चारों आरोपियों ने उसके साथ कथित तौर पर 10 दिन तक लगातार गैंगरेप किया।

आरोपियों ने युवती की हालत खराब होता देख उसे गंगनहर पुल पर फेंककर चले गए, जबकि उसके कपडे़ और बैग आरोपियों के पास ही हैं। आरोपियों ने घटना का जिक्र करने पर परिवार सहित जान से मारने की धमकी दी है। पीड़िता ने घर पहुंच सारी घटना परिजनों को बताई। मामला सामने आने के बाद हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने थाने पर हंगामा किया।

सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश

दरअसल, यह मामला दो समुदायों से जुड़े होने की वजह से पुलिस ने फौरन कार्रवाई करते हुए पीड़िता को थाने बुलाकर मुकदमा दर्ज कर लिया। फिलहाल आरोपियों की तलाश की जा रही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पीड़िता नें बताया कि आरोपियों ने न केवल उसे मांस खिलाने की कोशिश की बल्कि उसपर धर्म-परिवर्तन करने के लिए भी दवाब डाला गया।

इस मामले को सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। दरअसल, ट्विटर पर अंशुल सक्सेना नाम के यूजर्स ने इस मामले को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश भरपूर कोशिश की लेकिन यूपी पुलिस ने इसके दावे को खारिज कर दिया। खास बात यह है कि अंशुल नाम के इस शख्स को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फॉलो करते हैं।

अंशुल सक्सेना ने ट्विटर पर लिखा, “सलीम, असलम, अकरम और अयूब ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक लड़की का अपहरण किया और 10 दिनों तक उसके साथ बलात्कार किया। युवकी को मांस खाने और इस्लाम धर्म अपनाने को मजबूर किया गया।”

हालांकि, मुजफ्फरनगर पुलिस ने अंशुल सक्सेना के दावों को खारिज कर दिया। अंशुल सक्सेना के ट्वीट के जवाब में मुजफ्फरनगर पुलिस ट्वीट कर लिखा, ‘उक्त के संबंध में क्षेत्राधिकारी भोपा की जाच्खायानुसार जबरन मांस खिलाने की खबर मिथ्या प्रकाशित की गई है इस तरह की कोई घटना घटित नहीं हुई है।’

दरअसल, यह काफी खतरनाक है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा फॉलो किए शख्स ने कथित तौर पर बलात्कारियों के नामों को उजागर किया क्योंकि वे मुसलमान थे। इस शख्स ने अपने ट्वीट में विशेष तौर पर ‘इस्लाम’ और ‘मांस’ का जिक्र कर इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने की भरपूर कोशिश की। हालांकि पुलिस ने फौरन इसके दावों को खारिज कर मामले को आगे बढ़ने से रोक दिया।

अगर युवती का आरोप सहीं पाया जाता है तो पुलिस को इन दरिंदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकी एक मिसाल कायम हो। साथ ही पुलिस को ऐसे सांप्रदायिक लोगों पर ध्यान देने की जरूरत है जो इस मामले को दो समुदायों से जोड़कर समाज में जहर घोलने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे साजिश को नाकाम करना पुलिस की बड़ी चुनौती है।

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