उत्तर प्रदेश के आधे से अधिक लाइसेंसी बूचड़खाने भी नियमों का पालन न करने की वजह से हुए बंद

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उत्तर प्रदेश में 44 लाइसेंसधारी बूचड़खाने हैं, जबकि बुनियादी नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण 26 बूचड़खानों उत्तर प्रदेश में अस्थायी रूप से बंद किए गए हैं।

बूचड़खाने

योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने के तीसने दिन ही 22 मार्च को राज्य सरकार ने सभी डिवीजनल आयुक्तों, जिला मजिस्ट्रेट्स, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और नगर निगमों को बूचड़खानों का निरीक्षण करने का आदेश दिया था।

उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार ने अपनी कार्रवाई शुरू करने के पांच दिन बाद, गैरकानूनी और मैकेनाइज्ड बूचड़खानों पर अवैध पशु कटान के चलते और नियमों का पालन न करने के कारण अस्थायी रूप से बंद कर दिए है। उन्हें सात दिन के भीतर मुख्य सचिव को रिपोर्ट करने के लिए कहा गया था।

राज्य में 44 लाइसेंसधारी बूचड़खाने हैं, जबकि कटान के लिए जानवरों के संचालन, परिवहन और प्रसंस्करण के लिए निर्धारित व बुनियादी नियमों और दिशा निर्देशों का पालन नहीं करने के की वजह से 26 बूचड़खानों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।

इस बारे में मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने बताया कि पिछले 26 दिनों में 26 लाइसेंस वाले बूचड़खाने बंद हुए है क्योंकि वे निर्धारित नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। यह स्थायी रूप से बंद नहीं किए गए है उन्हें केवल अस्थायी रूप से बंद किया गया है और उन्हें सभी मानदंडों का पालन करने के बाद वापस कार्य करने की अनुमति दी जाएगी।

अस्थायी रूप से बंद किए गए इन बूचड़खानों की बंदी उन 24 नियमों के आधार पर हुई है, जिनमें जानवरों के साथ क्रूरता रोकने और उन्हें एक से दूसरी जगह ले जाने का ऐक्ट शामिल है। इसके अलावा बूचड़खानों को जानवरों की फिटनेट का सर्टिफिकेट भी लेना होता है। ये उन्हें तभी मिलता है, जब चिकित्सक किसी जानवर को खाने लायक स्वस्थ मानते हैं।

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