GST का असर: खादी वस्त्र की बिक्री में भारी गिरावट, टैक्स लगने से 20 फीसदी कम बिके कपड़े और संबंधित उत्पाद

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील और कोशिश ने खादी का कायापलट कर दिया है। जब से पीएम मोदी ने युवाओं से खादी पहनने की अपील किए हैं, उसके बाद खादी उत्पादों की बिक्री में जबरदस्त मांग देखने को मिल रहा है। लेकिन पीएम मोदी की खादी को फैशन बनाने की अपील के बाद खादी की बढ़ती लोकप्रियता को वस्तु एवं सेवा (जीएसटी) से झटका लगा है।

(AH Zaidi/ HT PHOTO)

जी हां, हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, जीएसटी लागू होने के बाद खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) की बिक्री में काफी कमी आई है। खादी और दूसरे ग्रामोद्योग उत्पादों की ब्रिकी में जून के मुकाबले जुलाई माह में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई है।

अखबार की मानें तो खादी एवं ग्रामोद्योग (केवीआईसी) के मुताबिक, बीते 1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद राजधानी स्थित ‘खादी इंडिया आउटलेट’ में जून के मुकाबले जुलाई माह में 43 लाख रुपये कम बिक्री हुई है। बता दें कि खादी पर पांच फीसदी और 1,000 रुपये से अधिक कीमत के कपड़ों पर 12 प्रतिशत जीएसटी है। जबकि जीएसटी से पहले खादी पर किसी तरह का कोई टैक्स नहीं था।

केवीआईसी के आंकड़ों के मुताबिक, ‘खादी इंडिया आउटलेट’ में जून माह में दो करोड़ 62 लाख रुपये की बिक्री हुई थी। जबकि जीएसटी लागू होने के बाद जुलाई में कुल बिक्री दो करोड़ 19 लाख रुपये रही। अगस्त माह में (17 अगस्त तक) एक करोड़ 62 लाख रुपये की बिक्री हुई है। जानकार मानते हैं कि अगस्त के दौरान भी खादी में गिरावट का रुझान रह सकता है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद खादी के उत्पादों में भारी बिक्री देखा गया था। पीएम मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में युवाओं से खादी को फैशन बनाने की अपील की बाद खादी की ब्रिकी में काफी वृद्धि हुई है। केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने हिंदुस्तान को बताया कि प्रधानमंत्री की अपील की बाद 22 अक्तूबर 2016 को राजधानी स्थित ‘खादी इंडिया आउटलेट’ में एक करोड़ 11 लाख की रिकॉर्ड बिक्री हुई थी।

आजादी के बाद पहली बार ‘खादी पर टैक्स’

बता दें कि आजादी के बाद पहली बार खादी पर जीएसटी के रूप में टैक्स लगा है। इससे बुनकर और खादी पहनने वाले परेशान हैं। बुनकरों को न तो कच्च माल मिल पा रहा है और न ही उनके कपड़े बाहर जा रहे हैं। बुनकरों और दुकानदारों का दावा है कि जीएसटी लगने से 75 प्रतिशत खादी कारोबार प्रभावित हुआ है।

व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद खादी की दुकानों में ग्राहक पहुंच तो रहे हैं, लेकिन दाम सुनते ही बैरंग वापस चले जाते हैं। दुकानदारों का कहना है कि सरकार अगर कोई कदम नहीं उठाती है तो खादी वस्त्रों की बिक्री का बंटाधार हो गया है।

 

 

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