“मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज से हर मामले को निपटाया है और दृढता से फैसला लिया है”, विदाई समारोह में बोले जस्टिस अरुण मिश्रा

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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस अरुण मिश्रा आज रिटायर हो रहे हैं, उनका आखिरी कामकाजी दिवस कल यानी 1 सितंबर को ही था। जस्टिस अरुण मिश्रा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट परंपरा के अनुसार मुख्य न्यायाधीश की बेंच में बैठे। बता दें कि, अरुण मिश्रा सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा दिए जाने वाले विदाई समारोह में कोरोना काल की वजह से शामिल नहीं हुए थे और उन्होंने इस पर असमर्थता जताई थी। अरुण मिश्रा ने कहा, “मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज से हर मामले को निपटाया है और दृढता से फैसला लिया है।” उन्होंने अपने सहयोगियों और समर्थन के लिए बार को धन्यवाद दिया।

अरुण मिश्रा

लाइव लाइव की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि उनके निर्णयों का विश्लेषण किया जा सकता है लेकिन आग्रह किया कि उन्हें कोई विशेष रंग नहीं दिया जाना चाहिए। हर फैसले का विश्लेषण करें लेकिन उन्हें यह रंग या वह रंग न दें। उन्होंने पुष्टि की कि बार उनकी ताकत और शक्ति का स्रोत रही। उन्होंने कहा कि, “मैंने हमेशा अपने विद्वान भाइयों द्वारा मुझे दी गई शक्ति के हथियार को उधार लेने की कोशिश की। आप सभी ने जो कुछ भी किया है उसके पीछे शक्ति थी। मैंने बार के सदस्यों से बहुत कुछ सीखा है।”

न्यायमूर्ति मिश्रा ने यह भी कहा कि कभी-कभी वह अपने आचरण में कठोर होते हैं और किसी भी चोट के कारण माफी मांगते हैं। उन्होंने कहा कि “मैंने अक्सर कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया है। अगर मैंने अपने जीवन में किसी को चोट पहुंचाई है, तो कृपया मुझे क्षमा करें।”

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा “लौह न्यायाधीश” : एजी औपचारिक संबोधन में बोलते हुए, अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा को “सुप्रीम कोर्ट का लौह न्यायाधीश” बताया।

जस्टिस अरुण मिश्रा के लिए अटॉर्नी जनरल के के. वेणुगोपाल ने विदाई संदेश देते हुए कहा, ‘निराशाजनक है कि यह विदाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जा रही है, हम उम्मीद कर रहे हैं कि वह दिल्ली में ही रहेंगे। अभी सिर्फ 65 वर्ष के ही हैं। पिछले 30 सालों से मेरे जस्टिस अरुण मिश्रा से अच्छे संबंध हैं, हम सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरुण मिश्रा को मिस करेंगे। हम उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।’

वहीं मुख्य न्यायाधीश बोबडे ने कहा, ‘ एक सहयोगी के रूप में जस्टिस अरुण मिश्रा का साथ होना सौभाग्य की बात है। मैं उनके साथ अदालत में पहली बार बैठा हूं और यह उनके लिए अंतिम बार है, जब वह इस कुर्सी पर बैठे हैं। जस्टिस अरुण मिश्रा अपने कर्तव्यों का पालन करने में साहस और धैर्य का प्रतीक रहे हैं।’

बता दें कि, जस्टिस अरुण मिश्रा आखिरी दिन भी दो अहम फैसले दिए जिनमें एक उज्जैन महाकाल मंदिर में शिवलिंग के संरक्षण और दूसरा टेलिकॉम कंपनियों को अजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) की बकाया रकम के भुगतान की मियाद को लेकर है। इनके अलावा, जस्टिस मिश्रा ने अपने आखिरी दिनों में कुछ और बड़े फैसले दिए।

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