बजट 2018: मिडिल क्लास पर पड़ी महंगाई की मार, जानिए- कस्टम ड्यूटी बढ़ने से क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा?

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वित्त मंत्री अरूण जेटली ने आम चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नीत राजग सरकार के अपने अंतिम पूर्ण बजट में गुरुवार (1 फरवरी) को एक तरफ खेतीबाड़ी, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, सूक्ष्म एवं लधु उद्यमों तथा शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए खजाना खोल कर आम लोगों को लुभाने का प्रयास किया वहीं, वेतन भोगी लोगों और वरिष्ठ नागरिकों को कर और निवेश में राहत देने की भी घोषणाएं की।

Photo: Livemint

वित्त मंत्री ने हालांकि आयकर दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन वेतनभोगियों के लिए 40,000 रुपए वार्षिक की मानक कटौती की जरूर घोषणा की। इससे इस वर्ग के करदाताओं को कुल मिलाकर 8,000 करोड़ रुपए का फायदा होने का अनुमान है। लोकसभा में लगातार पांचवां बजट पेश करते हुए जेटली ने सभी कर योग्य आय पर स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया।

साथ ही सामाजिक कल्याण योजनाओं के वित्त पोषण के लिये 10 प्रतिशत सामाजिक कल्याण अधिभार का भी प्रस्ताव किया। उन्होंने 250 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के लिये कंपनी कर 30 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत करने की भी घोषणा की। वहीं शेयरों की बिक्री से एक लाख रुपये से अधिक पूंजी लाभ पर कर लगाने का प्रस्ताव किया।

करीब दो घंटे (110 मिनट) के भाषण में जेटली ने हालांकि आयकर की दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन उन्होंने वेतनभोगी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिये परिवहन एवं चिकित्सा व्यय के बदले 40,000 रुपये की मानक कटौती देने की जरूर घोषणा की। वित्त मंत्री ने वरिष्ठ नागरिकों के लिये बैंक जमा पर ब्याज से आय की छूट सीमा 10,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया।

साथ ही मियादी जमाओं पर स्रोत पर कर कटौती नहीं होगी। गंभीर बीमारी पर चिकित्सा व्यय सीमा बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया गया है। बजट में शेयरों की बिक्री से एक लाख रुपये से अधिक के पूंजी लाभ पर 10 प्रतिशत कर का प्रस्ताव किया गया है लेकिन यह 31 जनवरी तक यह प्रावधान लागू नहीं होगा।

साथ ही बजट में इक्विटी वाले म्यूचुअल फंड में वितरित आय पर 10 प्रतिशत कर का भी प्रस्ताव किया गया है। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में उत्पाद शुल्क और सेवा कर के समाहित होने के साथ वित्त मंत्री ने केवल सीमा शुल्क में बदलाव किया। मोबाइल फोन पर जहां सीमा शुल्क बढ़ाया गया है, वहीं अप्रसंस्कृत काजू पर कम करने का प्रस्ताव किया गया है।

क्या हुआ सस्ता, क्या हुआ महंगा

वित्त मंत्री ने बजट में मिडिल क्लास को फायदे कम दिए हैं, लेकिन झटके ज्यादा दिए। इस बजट से आम लोगों को काफी उम्मीदें थीं लेकिन कोई राहत नहीं मिली है। ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने देश के बाहर से आने वाली चीजों पर कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) बढ़ा दी है और इस वजह से ज्यादातर चीजें महंगी हो गई हैं।

वित्त मंत्री ने अपने भाषण में बताया कि मोबाइल और टीवी जैसे उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 फीसदी किया गया है। वहीं काजू पर कस्टम ड्यूटी 5 प्रतिशत से 2.5 प्रतिशत की गई है। वहीं एक्साइज ड्यूटी घटने से पेट्रोल और डीजल के दाम भी कम हुए हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम 2 रुपये कम होंगे।

न्यूज एजेंसी वार्ता के मुताबिक, सरकार ने जीएसटी को लागू किये जाने के बाद पेश पहले आम बजट 2018-19 में घरेलू मूल्य वर्धन और ‘मेक इन इंडिया’ को प्रोत्साहित करने के लिए मोबाइल फोन, टेलीविजन, जूस, परफ्यूम, आयातित वाहन, ट्रक बस टायर, कृत्रिम ज्वेलरी, घड़ियां और बच्चों के खिलौने महंगे हो जायेंगे जबकि काजू और सौर पैनल सस्ते होंगे।

संसद में पेश साल 2018-19 के आम बजट में टेलीविजन के कलपुर्जे, मोबाइल फोन, फलों और सब्जियों के जूस, परफ्यूम और टॉयलेट वॉटर, आफ्टरशेव लोशन, वाहनों के कलपुर्जे, पूरी तरह निर्मित वाहन, ट्रक और बस के टायर, सिल्क फेब्रिक, जूता बनाने के समान, हीरे जवाहरात, घड़ियां, बच्चों के वीडियो गेम, मोमबत्ती, पतंग, चश्मे के शीशे, सिगरेट लाइटर, मूंगफली, जैतून, बिनौला और सूरजमुखी के कच्चे तेल और परिस्कृत खाद्य तेलों पर शुल्क बढ़ाया गया है जिससे इनके महंगा होने की आशंका है।

मध्यम और उच्च शिक्षा के लिए आयातित समानों पर लगने वाले तीन प्रतिशत उपकर को समाप्त कर दिया गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में आम बजट पेश करते हुये कहा कि पिछले दो दशक से सीमा शुल्क में कमी करने की नीति रही है, लेकिन इस बार मेक इन इंडिया को गति देने के उद्देश्य से कच्चे माल के रूप में उपयोगी वस्तुओं पर सीमा शुल्क में जहां कमी की गयी है, वहीं घरेलू मूल्य संवर्धन के लिए कुछ उत्पादों पर इसमें बढोतरी की गयी है।

उन्होंने कहा कि कुछ विशेष क्षेत्रों जैसे खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो कलपुर्जे, फुटवियर और फर्नीचर में घरेलू मूल्य वर्धन की व्यापक गुंजाइश है. इसे ध्यान में रखते हुये काजू प्रसंस्करण उद्योग की मदद करने के उद्देश्य से कच्चे काजू पर सीमा शुल्क पांच प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि मोबाइल फोन पर सीमा शुल्क को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत, इसके कुछ कलपुर्जे और सहायक सामान पर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया गया है।

टीवी के कुछ कलपुर्जे पर सीमा शुल्क साढ़े सात और 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है जबकि एलसीडी और एलईडी टेलीविजन के 12 विशेष कलपुर्जे पर 10 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाया गया है। बजट भाषण में कहा गया है कि इन कदमों से देश में रोजगारों के सृजन को काफी बढ़ावा मिलेगा। दरअसल, इनसे आयातित उत्पादों की तुलना में घरेलू उत्पाद सस्ते हो जाएंगे और इसके परिणामस्वरूप इन उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

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