OBOR में शामिल होने से भारत के इनकार को चीन ने बताया घरेलू राजनीतिक तमाशा

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चीन के ‘बेल्ट ऐंड रोड फोरम’ में शामिल होने से भारत के इनकार को चीन के सरकारी मीडिया ने ‘घरेलू राजनीतिक तमाशे का हिस्सा’ बताया है और साथ ही कहा कि इसका मकसद पेइचिंग का ‘विशेष ध्यान खींचने’ के लिए दबाव बनाना है। ग्लोबल टाइम्स ने अपने मंगलवार(16 मई) के संपादकीय में लिखा है कि भारत उम्मीद करता है कि वह अधिक सक्रियता से द्विपक्षीय संबंधों को आकार दे सकता है और साथ ही उम्मीद करता है कि चीन भारत के हितों पर विशेष ध्यान दे। लेकिन देश इस प्रकार से संवाद कायम नहीं करते हैं।

फाइल फोटो।

लेख में कहा गया है, ‘OBOR (वन बेल्ट वन रोड) पर भारत की आपत्ति आंशिक रूप से घरेलू राजनीति का तमाशा है, जिसका मकसद चीन पर दबाव बनाना है। लेकिन बी ऐंड आर में भारत की गैर मौजूदगी से पेइचिंग में इस फोरम पर असर नहीं पड़ा है और इस पहल से विश्व जो तरक्की करेगा, उसमें तो इसका और भी कम असर पड़ेगा।’

बता दें कि भारत 50 अरब डॉलर की चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) योजना पर अपनी संप्रभुत्ता की चिंताओं को लेकर बीआरएफ में शामिल नहीं हुआ है। यह आर्थिक गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है। अखबार ने लिखा है कि यदि भारत खुद को एक बड़ी ताकत के रूप में देखता है तो उसे चीन के साथ बहुत सी असहमतियों का अभ्यस्त होना चाहिए और साथ ही चीन के साथ इन असहमतियों से निपटने का प्रयास करना होगा।

संपादकीय में लिखा गया है कि यह लगभग असंभव है कि दो बड़े देश सभी चीजों पर समझौते पर पहुंच जाएं। इस बात को चीन और अमेरिका के बीच कई मतभेदों से साबित किया जा सकता है। लेकिन चीन और अमेरिका ने सुचारू द्विपक्षीय संबंध बनाए रखे हैं जिनसे भारत सीख सकता है।

इसमें साथ ही कहा गया है कि दोनों देशों को उन लोगों के बारे में भी सतर्क रहना चाहिए जो विध्वंसक ताकत रखते हैं। भारत की गैरमौजूदगी के बावजूद कल(सोमवार) यहां बेल्ट ऐंड रोड फोरम के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बैठक के संपन्न होने और इसके ‘फलदायक’ रहने को रेखांकित करते हुए संपादकीय में कहा गया है, ‘अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया समेत इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल ने इसमें भाग लिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ढांचागत निर्माण पहल के प्रति बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई है।

‘संपादकीय में लिखा है, ‘लेकिन, भारत ने कोई आधिकारिक प्रतिनिधि नहीं भेजा। देश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने शनिवार को कहा कि भारत किसी ऐसी परियोजना को स्वीकार नहीं कर सकता जो उसकी संप्रभुत्ता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करती हो। भारत एकमात्र ऐसा देश नजर आता है जिसने हालिया दिनों में पहल को लेकर नामंजूरी की अभिव्यक्ति की है।’

वहीं, भारत-चीन संबंधों की स्थिति के बारे में संपादकीय में कहा गया है, ‘भारत चीन संबंध में गंभीर मोड़ नहीं आया है। इन सालों में दोनों देशों की सीमा पर शांति रही है जो कि स्थिर द्विपक्षीय संबंधों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण ताकत है।’ इसमें कहा गया है कि दोनों देशों ने अपनी राष्ट्रीय रणनीतियों में आर्थिक और सामाजिक विकास को प्राथमिकता बनाया है।

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