पुणे हिंसा: जिग्नेश मेवानी ने कहा, ‘खुद को अंबेडकर का भक्त बताने वाले PM मोदी दलितों के खिलाफ अत्याचार पर दें जवाब’

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एक जनवरी को पुणे के पास स्थित भीमा-कोरेगांव में दलित समाज के शौर्य दिवस पर भड़की जातीय हिंसा के मामले में गुजरात के निर्दलीय विधायक और दलित कार्यकर्ता जिग्नेश मेवाणी ने शुक्रवार (5 जनवरी) को राजधानी दिल्ली में प्रेस कॉन्फेंस कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। मेवाणी ने कहा कि खुद को बाबा भीमराव अंबेडकर का भक्त बताने वाले पीएम मोदी को दलितों पर हो रहे अत्याचारों पर जवाब देना चाहिए।

(Express Photo/Prem Nath Pandey)

उन्होंने कहा कि क्या दलितों को शांतिपूर्ण रैली का हक नहीं है। दलितों पर लगातार हो रही हिंसा पर पीएम मोदी अपना रुख स्पष्ट करें। मेवाणी ने कहा कि प्रधानमंत्री अब तक इस मामले पर चुप क्यों हैं? बता दें कि भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में जिग्नेश मेवाणी और जेएनयू के छात्र नेता उमर खालिद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। दोनों पर हिंसा को भड़काने का आरोप लगाया गया है।

मेवाणी ने प्रधानमंत्री से महाराष्ट्र हिंसा पर बयान देने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश में दलित सुरक्षित नहीं हैं। मेवाणी ने इस दौरान खुद पर लगे भड़काऊ भाषण देने के आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है। जिग्नेश ने कहा कि गुजरात में भाजपा 150 सीट की बात कर रही थी लेकिन उसे 99 मिली इससे वो चिढ़ी हुई है। गुजरात में मैंने घमंड तोड़ा। इसलिए उन्हें 2019 में खतरा दिख रहा है। इसी कारण से मेरे ऊपर एफआईआर दर्ज की गई है।

मेवाणी ने कहा कि मुझे सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि मोदी सरकार मेरा कद बढ़ता देख घबराई हुई है।उन्होंने कहा कि मैं उस स्पॉट पर नहीं गया जहां हिंसा हुई, मैंने बंद में हिस्सा नहीं लिया और मेरे भाषण का कोई हिस्सा भड़ाकाऊ नहीं है। मेवाणी ने कहा कि मेरा पूरा भाषण फेसबुक पर है और हर कोई इसे सुन सकता है, इसमें कुछ भी गलत नहीं है। इसके बावजूद मेरे ऊपर मुकदमे की वजह मुझे समझ में हीं आती है।

मेवाणी ने कहा, ‘मोदी जी के पीएम बनने के बाद रोहित वेमुला, ऊना, सहारनपुर में भीम आर्मी पर हमला और अब भीमा-कोरेगांव की घटना हुई, लेकिन उन्होंने एक भी मुद्दे पर दलितों का साथ देते हुए कुछ नहीं कहा।’ मेवाणी ने पीएम से सवालिया अंदाज में पूछा कि इस देश में दलितों का उत्पीड़न न हो, इसके लिए मोदी जी का कोई कमिटमेंट है या नहीं। इन सब घटनाओं से एक बात जहन में आ रही है कि दलित इस देश में सुरक्षित नहीं हैं।

जिग्नेश ने कहा कि मैं पेशे से वकील हूं और हमेशा कानून के दायरे में रहकर काम करता हू्ं और हमेशा संविधान का महत्व समझते हैं। उन्होंने कहा कि मैने जिंदगी में कभी कानून बिगाड़ने का काम नहीं किया है। मेवाणी ने कहा कि मैं चुना हुआ प्रतिनिधि हूं और फिर भी अगर मुझे इस तरह से निशाना बनाया जा रहा है तो इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में गरीब, दलित, मजदूर के साथ क्या हो रहा है।

जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद के खिलाफ FIR दर्ज

एक जनवरी को पुणे के पास स्थित भीमा-कोरेगांव में दलित समाज के शौर्य दिवस पर भड़की जातीय हिंसा के मामले में गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी और दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र नेता उमर खालिद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। दोनों पर हिंसा को भड़काने का आरोप लगाया गया है। यह कार्यक्रम यहां 31 दिसंबर को आयोजित हुआ था।

न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक पुणे के विश्राम बाग थाने में जिग्नेश मेवाणी और उमर खालिद पर धारा 153 (A), 505 और 117 के तहत केस दर्ज किया गया है। इस मामले पर पुलिस का कहना है कि जिग्नेश मेवाणी और उमर खालिद के खिलाफ 31 दिसंबर को यहां एक कार्यक्रम में भड़काऊ भाषण देने को लेकर एक शिकायत मिली है। शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज किया गया है।

एक अधिकारी ने बताया कि दोनों पर मराठा और दलित समुदायों के बीच कथित तौर पर दरार पैदा करने और वैमनस्यता फैलाने का आरोप लगाया गया है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (दक्षिण, उत्तर) रवींद्र सेनगांवकर ने कहा कि उनके भाषणों का विश्लेषण किया जा रहा है और उनको पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा। मेवाणी और खालिद ने 31 दिसंबर को यहां ‘एल्गार परिषद’ में हिस्सा लिया था।

शिकायतकर्ताओं अक्षय बिक्कड़ और आनंद धोंड ने आरोप लगाया है कि जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद ने कार्यक्रम के दौरान भड़काऊ भाषण दिया था जिसके चलते दो समुदायों में हिंसा हुई। इस कार्यक्रम में जिग्नेश, उमर के अलावा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर, हैदराबाद यूनिवर्सिटी में खुदकुशी करने वाले दलित छात्र रोहित वेमुला की मां राधिका वेमुला भी शामिल हुईं थीं।

 

 

 

 

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