BJP राज में भी महिलाएं नहीं हैं सुरक्षित, योगी सरकार की नाक के नीचे लखनऊ में अगवा कर छात्रा के साथ गैंगरेप

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महिला पत्रकार

उत्तर प्रदेश में जब से योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने हैं, उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती राज्य में बिगड़े कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करना है। क्योंकि आए दिन महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और बलात्कार की घटनाएं सामने आ रही हैं। जेवर गैंगरेप और रामपुर में लड़कियों के साथ सरेआम छेड़छाड़ की घटनाओं के बाद अब योगी सरकार की नाक के नीचे लखनऊ में महिला से गैंगरेप का मामला सामने आया है।महिला पत्रकारप्रदेश की राजधानी के मोहनलालगंज इलाके में ग्रेजुएशन की छात्रा को शनिवार(2 सितंबर) सुबह कार से अगवा कर तीन युवकों ने उसे बंधक बनाकर रात भर उसके साथ गैंगरेप किया। इतना ही नहीं दरिंदों ने विरोध करने पर छात्रा की बेरहमी से पिटाई की। शांत न रहने पर उसका गला दबाकर हत्या करने की धमकी भी दी गई। छात्रा के गले व शरीर पर कई जगह खरोंच के निशान मौजूद थे। फिलहाल मामले की जांच हो रही है।

दरिंदों के चंगुल से छूटी पीड़ित छात्रा ने अपनी दर्द भरी कहानी बताई तो इसे सुनकर सबके रोंगटे खड़े हो गए। छात्रा ने कहा कि तीनों दरिंदों ने उसके साथ रात भर जबरन हैवानियत की। पीड़िता ने बताया कि तीनों उसे जबरन कार में अपहरण कर ले गए थे और उसे नशीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश कर दिया। मोहनलालगंज कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली युवती बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है। वह उन्नाव के एक कॉलेज में पढ़ती है।

खबरों के मुताबिक, दरिंदे कई दिन से छात्रा से उसकी बड़ी बहन की आपत्तिजनक फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करने की धमकी दे रहे थे। शनिवार सुबह तीनों ने छात्रा को फोन कर उसकी बहन की फोटो देने के बहाने बाईपास पर बुलाया। वहां स्विफ्ट डिजायर सवार दरिंदों ने छात्रा से कार में बैठने को कहा। छात्रा ने बताया कि कार में ड्राइवर के अलावा पिछली सीट पर दो लोग बैठे थे।

जैसे ही वह कार में बैठी, बदमाशों ने उसे नशीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश कर दिया। होश में आने पर छात्रा ने खुद को एक मकान में पाया। उसका मुंह व हाथ बांध दिए गए थे। छात्रा ने बताया कि दरिंदों ने उसके साथ रात में कई बार गैंगरेप किया। रविवार सुबह करीब आठ बजे उसे बेसुध हालत में नवलखेड़ा गांव के पास एक बस में बैठा दिया गया। घर पहुंचकर छात्रा ने पूरी बात बताई, जिसके बाद परिवारीजन कोतवाली पहुंचे।

पुलिस ने नहीं की मदद

पीड़ित छात्रा के पिता ने बताया कि शाम तक जब छात्रा घर नहीं आई तो उसके मोबाइल पर संपर्क किया। तो मोबाइल घर पर ही पड़ा मिला। छात्रा के मोबाइल पर आखिरी कॉल जिस नंबर से आई थी परिजनों ने उस पर संपर्क किया तो वह स्विच ऑफ था। जिसके बाद रात 10 बजे वे कोतवाली पहुंचे।

परिजनों के मुताबिक, कोतवाली में ड्यूटी पर तैनात दारोगा दशरथ मौर्या ने मुंशी से पूरी जानकारी लिखवा ली और रिश्तेदारों के घर तलाश करने की नसीहत देकर वापस कर दिया। परिजनों का आरोप है कि युवती को खोजने के लिए उन्होंने पुलिसकर्मियों से प्रार्थना की, लेकिन दरोगा और दीवान ने उनकी कोई मदद नहीं की।

पीड़ित पिता के मुताबिक उन्होंने दरोगा और दीवान को उनकी बेटी के मोबाइल पर आई कॉल के बारे में भी बताया था, संदिग्ध नंबर भी उन्हें दिया था। लेकिन पुलिसकर्मियों ने उक्त मोबाइल नंबर को ट्रैक करना ही उचित नहीं समझा। परिजनों का कहना है कि अगर पुलिस ने उसी समय संदिग्ध मेबाइल नंबर को ट्रैक कर लिया होता उनकी बेटी के साथ इतनी बड़ी घटना नहीं होती।

 

 

 

 

 

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