मर्सल विवाद: फिल्मी कलाकारों के बारे में BJP प्रवक्ता के बयान पर भड़के फरहान अख्तर, कहा- आपकी हिम्मत कैसे हुई

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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और नोटबंदी पर की गई टिप्पणी के कारण अभिनेता विजय अभिनीत तमिल फिल्म ‘मर्सल’ विवादों में आ गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस फिल्म को लेकर विरोध दर्ज कराया है। इस बीच फिल्म का विरोध कर रही बीजेपी के एक नेता द्वारा फिल्मी कलाकारों पर दिए गए एक बयान को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है।इस विवाद में अब बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता और डायरेक्टर फरहान अख्तर भी कूद पड़े हैं। फरहान अख्तर ने बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव के एक बयान को शेयर करते हुए ट्विटर पर उन्हें धमकी भरे लिहाज में चेतावनी तक दे दी है। फरहान अख्तर ने जीवीएल नरसिम्हा राव से पूछा है कि आपकी हिम्मत कैसे हुई ये कहने की कि फिल्मी कलाकारों का बौद्धिक स्तर कम होता है।

दरअसल, टाइम्स नाउ पर डिबेट के दौरान नरसिम्हा राव ने कहा कि हमारे अधिकांश फिल्मी सितारों को सामान्य ज्ञान की बहुत कम जानकारी होती है। बीजेपी नेता के इस बयान पर फरहान अख्तर ने कड़ी आपत्ति जताई है। फरहान ने इस बयान पर नरसिम्हा राव को टैग करते हुए रविवार (22 अक्टूबर) को लिखा है कि आपकी हिम्मत कैसे हुई? साथ ही उन्होंने फिल्म कलाकारों पर भी निशाना साधते हुए कहा है कि आप सबको शर्म आनी चाहिए, देखिए ये आप लोगों के बारे में क्या कह रहे हैं।

दरअसल, इस फिल्म में वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) का कथित तौर पर उपहास उड़ाया गया है। बीजेपी का आरोप है कि फिल्म में नोटबंदी और जीएसटी को नकरात्मक ढंग से दिखाया गया है। केंद्रीय मंत्री पी राधाकृष्णन ने मांग की है कि उन संवादों को फिल्म से निकाला जाना चाहिए जो उनके अनुसार जीएसटी के बारे में असत्य हैं।

राहुल गांधी ने ‘मर्सल’ का किया समर्थन

इस बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने ‘मर्सल’ में कुछ संवाद हटाए जाने की मांग करने के लिए तमिलनाडु बीजेपी पर जमकर हमला बोला है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार (21 अक्टूबर) को मर्सल के बहाने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए ट्वीट कर कहा, ‘श्रीमान नरेंद्र मोदी सिनेमा तमिल संस्कृति एवं भाषा की सशक्त अभिव्यक्ति है। ‘मर्सल’ में हस्तक्षेप कर तमिल गौरव का विमुद्रीकरण मत करिये।’

वहीं कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने भी इस फिल्म को लेकर सरकार पर तंज किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, ‘फिल्म निर्माताओं को नोटिस: कानून आने ही वाला है, आप केवल सरकार की नीतियों की सराहाना करने वाले वृत्त चित्र बना सकते हैं।’

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि बीजेपी मर्सल में संवाद निकालने को कह रही है। कल्पना करिए कि आज ‘पराशक्ति’ रिलीज हुई होती।

बता दें कि ‘पराशक्ति’ 1952 में आयी तत्कालीन शीर्ष स्टार शिवाजी गणेशन की पहली फिल्म थी, जिसके संवाद द्रमुक प्रमुख एम करूणानिधि ने लिखे थे। उस समय करूणानिधि भी उभरते हुए पार्टी नेता एवं पटकथा लेखक थे। इस सुपर हिट फिल्म के संवाद बहुत ही प्रभावशाली थे, जिसमें सुधार और समतामूलक आदर्शों को महत्व दिया गया है।

‘मर्सल’ विवाद पर शत्रुघ्न सिन्हा का मोदी सरकार पर हमला

इस बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में पार्टी लाइन से अलग अपने विवादित बयानों के लिए चर्चित सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने एक बार फिर ‘मर्सल’ विवाद के जरिए जीएसटी और नोटबंदी को लेकर फिर मोदी सरकार की आलोचना की है।फिल्म ‘मर्सल’ में जीएसटी व नोटबंदी को लेकर दिखाए गए दृश्‍य पर जारी विवाद के सवाल पर बीजेपी सांसद ने कहा कि जो लोग जीएसटी और नोटबंदी का विरोध कर रहे हैं वे देशद्रोही नहीं हैं।

ANI से बात करते हुए सिन्हा ने कहा कि, ‘कुछ लोग जीएसटी का समर्थन करते हैं और कुछ विरोध। इसी तरह कुछ लोग नोटबंदी का समर्थन करते हैं और कुछ विरोध। इसका मतलब यह नहीं है कि इनकी आलोचना करने वाले देशद्रोही हैं।’

इस सीन को हटाना चाहती है BJP

दरअसल, बीजेपी का आरोप है कि इस फिल्म में जीएसटी और नोटबंदी के बारे में ‘गलत जानकारी’ दी गई है। फिल्म के एक दृश्य में बताया गया है कि सरकार जीएसटी ले रही है, लेकिन लोगों को उसके बदले कोई भी सुविधा नहीं दे रही है। बीजेपी जिस सीन को हटाना चाह रही है, वह सीन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

फिल्म के इस सीन में अभिनेता विजय कहते हैं, ‘सिंगापुर में लोग सात फीसदी जीएसटी देते हैं और बदले में सरकार मुफ्त चिकित्सा सेवा दे रही है। भारत सरकार 28 फीसदी जीएसटी वसूल कर रही है। लेकिन सरकार मुफ्त में चिकित्सा सेवा क्यों नहीं दे सकती? क्यों? दवाइयों के लिए हम 12 फीसदी टैक्स दे रहे हैं। लेकिन शराब पर कोई जीएसटी नहीं है। भारत में सरकारी अस्तपाल में ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं हैं।’

विजय आगे कहते हैं, ‘यह जानना चाहता हूं कि ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं होने के पीछे क्या वजह थी। दो साल से अस्पताल के पास ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए देने को पैसे नहीं थे। एक अन्य सरकारी अस्पताल में डायलेसिस के दौरान बिजली चली जाती है। चार लोग मर गए। शर्मनाक, उनके पास पावर बेकअप नहीं था। आईसीयू में रखे गए बच्चे की चूहे द्वारा काटने से मौत हो जाती है। लोगों को सरकारी अस्पताल से डर लगता है।’

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