”टू-जी स्पेक्ट्रम फैसले से PM मोदी, जेटली, विनोद राय और अन्य BJP नेताओं की साजिश का हुआ पर्दाफाश”

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गुरुवार (21 दिसंबर) को CBI की स्पेशल कोर्ट ने टू-जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में अपना फैसला सुनाया। फैसले से उत्साहित, कांग्रेस ने कहा कि इस फैसले ने सत्ता में आने के लिए पिछली UPA सरकार को बदनाम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अरुण जेटली, विनोद राय और अन्य भाजपा नेताओं की छिपी साजिश का पर्दाफाश किया है।

रणदीप सिंह सुरजेवाला

इस बारें में पार्टी की और से कहा गया कि अदालत के फैसले से सच्चाई सामने आ गई है और प्रधानमंत्री मोदी, तत्कालीन CAG प्रमुख विनोद राय और जेटली सहित भाजपा नेताओं को अब स्पष्टीकरण देना चाहिए और UPA सरकार को बदनाम करने के लिए माफी मांगनी चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला समाचार एजेंसी IANS से कहा कि आज BJP का पर्दाफाश हो गया है कि उसने देश का अपमान करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि BJP झूठ का सहारा लेकर सत्ता में आई है। यह झूठ अब उजागर हो गया है कि कांग्रेस पार्टी को बदनाम करने के लिए BJP ने झूठी साजिश रची थी। सच की जीत हुई है।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि यह साजिश जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अरुण जेटली, विनोद राय और अन्य भाजपा नेताओं द्वारा रची गई थी का आज खुलासा हो चुका है। सच तो यह है कि 2 जी स्पेक्ट्रम मामले में कोई भी दोषी नहीं है। फैसला आने के बाद क्या अब ये सभी लोग, जो इन वर्षों से सत्ता में आने के लिए झूठ बोल रहे थे, देश के लिए माफी मांगेंगे? सुरजेवाला ने कहा, क्या यह सच नहीं है कि झूठ फैलाना और साजिश को अंजाम देना भाजपा का चरित्र हैं।

उन्होंने अरुण जेटली को झूठों का सरदार करार दिया है। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि अरुण जेटली जी झूठों के सरदार हैं, झूठों की सरदारी और सरकार के फैसले में अंतर है जो कोर्ट ने आज बताया है। बीजेपी की साजिश बेनकाब हो गई है।

रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा को माफी सिर्फ कांग्रेस और देश से ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया से मांगनी चाहिए क्योंकि इसे दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला कहकर प्रचारित किया गया था। एक माहौल बनाया और देश को बदनाम किया। इससे अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हुआ है और इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए।

दूरसंचार मंत्रालय द्वारा मोबाइल कंपनियों को लाइसेंस जारी किए जाने और 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में यह कथित घोटाला वर्ष 2008 में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में हुआ था। लेकिन वर्ष 2010 में इस मामले ने भारत के नियंत्रक एवं लेखा महापरीक्षक (सीएजी) विनोद राय की रिपोर्ट आने के बाद तूल पकड़ा।

आपको बता दे कि  विनोद राय भारत के 11वें नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) के अध्यक्ष पद पर रहे। उन्होंने जनवरी 2008 में इस पद को संभाला और मई 2013 तक इस पद पर रहे। इसी दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में हुए लाखों करोड़ रुपये के टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले और कोयला घोटाले का सनसनीखेज खुलासा किया था। इसके बाद विनोद राय चर्चा में आए थे।

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