RTI अधिकारी ने आधार कार्ड न होने पर सूचना देने से किया इनकार, CIC ने लगाया 25 हजार रुपये का जुर्माना

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केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने व्यवस्था दी है कि आधार कार्ड नहीं होने पर सूचना देने से इनकार करना सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत दिये गये अधिकार का बड़ा उल्लंघन है और यह आवेदक के साथ उत्पीड़न जैसा है। आयोग ने आवेदक द्वारा पहचान दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर सूचना देने से इनकार करने पर आवासीय एवं शहरी विकास निगम (हुडको) के तत्कालीन आरटीआई अधिकारी पर कानून के तहत अधिकतम 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।न्यूज एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक आवेदक ने हुडको द्वारा खरीदे गये उपहारों तथा इसके सीएमडी द्वारा किये गये खर्चे की जानकारी मांगी थी। यह मामला विश्वास भामबरकर से जुड़ा है जिन्होंने 2013 से 2016 तक उपहारों पर हुडको के खर्चे, एशियाड गांव में इसके चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के आधिकारिक आवास के पुनरोद्धार, आधिकारिक आवास की बिजली के बिल और सीएमडी को भुगतान किये गये पारिश्रमिक सहित अन्य की जानकारी मांगी थी।

सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्यलु ने कहा कि सीपीआईओ डी के गुप्ता ने पांच अगस्त 2016 को पत्र लिखकर भामबरकर से आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र या पासपोर्ट देकर पहचान, पते और नागरिकता साबित करने को कहा था। उन्होंने कहा कि उन्होंने मांगी गई जानकारी देने के बारे में कुछ नहीं कहा। तीस दिन के भीतर कोई जानकारी नहीं दी गई। आवेदक ने यह शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने सबूत मांगे बिना सूचना देने के लिए पहली अपील भी दायर की है।

आचार्यलु ने कहा कि जवाब में गुप्ता ने कहा कि वह इस आवेदक की मंशा का सत्यापन करना चाहते हैं। सूचना आयुक्त ने कहा कि यह बात कानूनी नहीं है और इसलिए स्वीकार्य नहीं है। वह सूचना देने से इनकार करने की बात को सही ठहराने में भी नाकाम रहे, क्योंकि वह धारा आठ या नौ के तहत अपवाद की किसी उपधारा का हवाला भी नहीं दे पाए। उनकी बातों से यह साफ है कि मांगी गई सूचना आरटीआई कानून के तहत किसी अपवाद की श्रेणी में नहीं आती।

उन्होंने कहा कि सीपीआईओ केवल धारा आठ और नौ के तहत ही सूचना से इनकार कर सकता है। वह आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट आदि की कमी के नये आधार नहीं खोज सकते। इस धारा का डॉक्टर डी के गुप्ता ने उल्लंघन किया, क्योंकि उन्होंने 30 दिन और उसके बाद भी कोई जानकारी नहीं दी। आचार्युलु ने कहा कि गुप्ता अधिकतम जुर्माने के भागी हैं और उन्हें पांच बराबर मासिक किस्तों में 25 हजार रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया।

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