नोटबंदी: 500-1000 के पुराने नोट जमा न कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगी सरकार

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बीते साल 8 नवंबर को रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालेधन पर लगाम लगाने के लिए 1000 और 500 रुपये के नोट को बंद करने की घोषणा की थी। अब इस महीने 8 नवंबर को नोटबंदी को एक साल पूरा होने को है। लेकिन एक साल बाद भी नोटबंदी से जुड़े एक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है।नोटबंदी के बाद बंद हो चुके पुराने नोटों से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के सामने केंद्र सरकार ने शुक्रवार (3 नवंबर) को पुराने नोटधारकों को राहत देते हुए कहा कि जो लोग नोटबंदी के वक्त पुराने नोट जमा नहीं करवा पाए थे और जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की हुई है उनके खिलाफ सरकार कोई भी आपराधिक कार्रवाई नहीं करेगी।

मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि जिन लोगों ने पिछले साल 31 दिसंबर 2016 तक 500 और 1,000 रुपये के अमान्य हो चुके पुराने नोटों को नहीं जमा किया था और इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी, इन याचियों के खिलाफ केंद्र सरकार कार्रवाई नहीं करेगी। साथ ही इन पर किसी भी प्रकार का केस दर्ज नहीं होंगे।

साथ ही मीडिया रिपोर्ट के मुतबिक शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वह अपनी इस याचिका को उस संवैधानिक पीठ के पास ले जाएं जो नोटबंदी पर सुनवाई कर रही है। बता दें कि इन याचिकाकर्ताओं ने 31 दिसंबर 2016 तक पुराने नोट जमा नहीं किए जाने के मामले में याचिका डाली थी।

केंद्र ने कहा कि पुराने नोट जमा कराने की मांग करने वाले 14 याचिकाकर्ताओ के खिलाफ 500-1000 के पुराने नोट रखने को लेकर सरकार कोई कार्रवाई नहीं करेगी। AG केके वेणुगोपाल ने कोर्ट को ये उस वक्त भरोसा दिलाया जब याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उनके पास पुराने नोट होने के कारण उन पर आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में नोटबंदी को चुनौती देनेवाली याचिकाएं भी दाखिल हुई हैं जो पांच जजों वाली बेंच के पास लंबित है। शीर्ष अदालत ने कहा कि पांच जजों वाली बेंच जो अंतिम फैसला देगी, उसी के हिसाब से तय होगा कि इन याचियों को उनके पुराने नोट बदलने की इजाजत मिलेगी या नहीं।

 

 

 

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