मनमोहन सिंह ने नोटबंदी को बताया इतिहास की सबसे बड़ी ‘लूट’, कहा- अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र के इतिहास का काला दिन था 8 नवंबर

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कल यानी 8 नवंबर (बुधवार) को नोटबंदी को एक साल पूरे हो जाएंगे। इस पर देश की दोनों बड़ी पार्टियों के बीच सियासी तनातनी भी शुरू हो गई है। एक तरफ कांग्रेस के नेतृत्व में 18 विपक्षी दलों ने इस घोषणा का एक वर्ष पूरा होने पर जहां ‘काला दिवस’ मनाने की घोषण की है, वहीं सत्तारूढ़ बीजेपी ने इस दिन कालाधन विरोधी दिवस (रिपीट कालाधन विरोधी दिवस) मनाने की घोषणा की है।इस बीच पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोटबंदी और जीएसटी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जोरदार हमला बोला है। पूर्व पीएम और जाने-मोन अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह मंगलवार (7 नवंबर) को गुजरात में हैं और वो व्यापारियों को संबोधित कर रहे हैं। इस दौरान सिंह ने पीएम मोदी और उनकी सरकार पर नोटबंदी, जीएसटी, गरीबी और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर जमकर हमला बोला है।

नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए पूर्व पीएम ने इसे देश के इतिहास की सबसे बड़ी लूट बताया है। सिंह ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी छोटे कारोबारियों के लिए बुरे सपने की तरह, आम लोगों को इससे काफी परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि सरकार ने नोटबंदी का जो मकसद बताया वह पूरा नहीं हुआ, कालेधन वालों को पकड़ा नहीं जा सका।

वहीं बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर भी हमला बोलते हुए मनमोहन ने कहा कि गुरूर के चलते बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का फैसला लिया गया। क्या प्रधानमंत्री ने मौजूदा रेलवे ट्रैक्स को अपग्रेड कर हाई स्पीड ट्रेन जैसे विकल्पों पर विचार किया था? सिंह ने पूछा कि क्या बुलेट ट्रेन पर सवाल उठाने से कोई विकास विरोधी और GST-नोटबंदी पर सवाल उठाने से कोई टैक्स चोर हो जाता है। उन्होंने कहा कि हर किसी को चोर और राष्ट्रविरोधी मानने का रवैया लोकतंत्र की बुनियाद के लिए खतरा है।

इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि नोटबंदी हमारे देश की अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन था। यही नहीं 8 नवंबर हमारे प्रजातंत्र में काले दिन के रूप में ही जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि कल (बुधवार) 8 नवंबर को काला दिवस का एक साल पूरा होने जा रहा है। सिंह ने कहा कि कैशलेस व्यवस्था को प्रोत्साहन देने के लिए नोटबंदी जैसे कदम बेकार हैं।

उन्होंने कहा की नोटबंदी और जीएसटी छोटे कारोबारियों के लिए बुरे सपने की तरह है, इससे देश में टैक्स टेररिज्म जैसे हालात पैदा हुए हैं। सिंह ने कहा कि विश्व के किसी भी देश में करेंसी को लेकर इस तरह का कदम नहीं उठाया गया है जिसमें 86 फीसदी नोट बाजार से खत्म हो गए हों। अगर कैश लेन-देन को खत्म ही करना है तो उसके लिए कई और कदम उठाए जा सकते थे, लेकिन नोटबंदी सरकार का बिलकुल नकारा कदम था।

 

 

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