राहुल गांधी को ‘नामदार’ कहने पर भड़की कांग्रेस, कहा- ‘हमे भी मजबूरन पीएम मोदी को सोशल मीडिया पर प्रचलित ‘उपनामों’ से बुलाना पड़ेगा’

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कांग्रेस ने पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को ‘नामदार’ कहने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है और कहा कि यदि मोदी ने अपना तरीका नहीं बदला, तो मजबूरन कांग्रेस के लोग भी उन्हें उनके बारे में प्रचलित विभिन्न उपनामों से बुलाना शुरू करेंगे। बता दें कि एक बार फिर से प्रधानमंत्री ने अपने भाषणों में राहुल गांधी को उनके नाम से संबोधित करना बंद कर दिया है। शनिवार को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में उन्होंने राहुल गांधी को युवराज नहीं बल्कि एक नए ‘श्रीमान नामदार’ नाम से पुकारा।

राहुल गांधी
(Photo Courtesy: Twitter/The Indian Express)

कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद तिवारी ने कहा, ‘यदि हम आपको (मोदी) आपके बारे में जनता के बीच और सोशल मीडिया पर प्रचलित विभिन्न उपनामों से बुलाना शुरू करें, तो आपको अच्छा नहीं लगेगा। इसलिए आप भी अन्य पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं के नाम ठीक से लेने के बारे में सोचिए। आप जिस तरीके से ये सब कर रहे हैं, हमें आपके पद की गरिमा को भुला देना पड़ेगा।’

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक तिवारी ने कहा, ‘हमें वे सभी नाम गिनाने पड़ेंगे, जिस नाम से आम जनता उस व्यक्ति को बुलाती है, जो अपने वादे पूरे नहीं करता, जो सिर्फ बोलता है और करता कुछ नहीं।’ कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आजमगढ़ में अपने भाषण में कहा कि उनकी सरकार मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ रही है, लेकिन उन्होंने भारतीय जनता पार्टी शासित उत्तर प्रदेश में हो रहे दुष्कर्मों के बारे में और अपनी पार्टी के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के बारे में जनता को बताना भूल गए, जिसके खिलाफ सीबीआई ने दुष्कर्म के लिए आरोप-पत्र दायर किया है।

तिवारी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री को उसी स्वर में यह भी घोषणा करना चाहिए था कि वह सेंगर को पार्टी से निष्कासित कर रहे हैं। वह उत्तर प्रदेश में बीजेपी के शासन काल में अंधाधुंध दुष्कर्म की घटनाओं पर बोलना भूल गए।’ उन्होंने कहा कि मोदी एक थके हुए सेनापति की तरह लगे, जिसकी पराजय शुरू हो गई है।

तिवारी ने कहा, ‘बीजेपी को 73 लोकसभा और 323 विधानसभा सीटें देने के बाद उत्तर प्रदेश के लोग प्रधानमंत्री से नौकरियों, रोजगार, किसानों के बकाए, बंद कारखानों और मिलों को फिर से खोले जाने के बारे में कुछ सुनने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन उन्होंने इनमें से किसी के बारे में कुछ नहीं कहा, क्योंकि उनके पास जमीन पर दिखाने के लिए कुछ नहीं है।’

क्या है मामला?

दरअसल, यह पूरा विवाद दैनिक जागरण समूह के उर्दू अखबार डेली इंक़लाब की एक हेडलाइन से। जिस दिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाकात की उसके अगले दिन उर्दू अखबार इंक़लाब ने उनके हवाले से सुर्खी लगाई – ‘हां, कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है।’

हालांकि ये खबर किसी टीवी चैनल, किसी राष्ट्रीय अखबार में नहीं दिखाई दी, लेकिन इंक़लाब अखबार की उस हेडलाइन को भारतीय जनता पार्टी कैसे छोड़ती? विशेष तौर पर रोजगार, विकास और किसान सहित तमाम मुद्दों को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे पीएम कैसे छोड़ते।  क्या राहुल गांधी ने वाकई मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ हुई मुलाकात में कांग्रेस को मुसलमानों की पार्टी बताया?

इस बात को अभी कांग्रेस पार्टी समझ पाती,आजमगढ़ में शनिवार को एक जनसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “श्रीमान नामदार ने कहा कांग्रेस मुस्लिमों की पार्टी है। मुझे आश्चर्य नहीं हो रहा है। पहले जब मनमोहन सिंह की सरकार थी तो स्वयं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। मैं कांग्रेस पार्टी के नामदार से पूछना चाहता हूं- कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है, आपको ठीक लगे आपको मुबारक। पर आप बताइए (मुसलमान) पुरुषों की है या महिलाओं की।”

पीएम मोदी के इस बयान पर कांग्रेस पार्टी ने अपने एक प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल से सफाई दिलवाई। गोहिल ने कहा, “अब किसी छोटे से अख़बार के कोने में कुछ ख़ुद ही छपवा लो और छपवाने के बाद उस न्यूज़ की सच्चाई देखे बिना प्रधानमंत्री ऐसे बयान दें ये हम सब के लिए शर्म की बात है। कल मैं भी उनकी निजी ज़िंदगी के बारे में कुछ लिखवाऊं और कहूं कि ये अख़बार में छपा है?”

 

 

 

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