ICICI बैंक धोखाधड़ी मामला: चंदा कोचर के खिलाफ FIR दर्ज करने वाले CBI अधिकारी का ट्रांसफर, जेटली ने एक दिन पहले ही उठाए थे सवाल

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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व एमडी और सीईओ चंदा कोचर के साथ ही उनके पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन समूह के वेणुगोपाल धूत के खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश रचने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। इस बीच इस मामले केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली द्वारा एजेंसी पर निशाना साधने के एक दिन बाद ही चंदा कोचर के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर दस्तखत करने वाले अधिकारी का तबादला कर दिया गया है।

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, आईसीआईसीआई बैंक-वीडियोकॉन लोन मामले में चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर और वेणुगोपाल धूत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने वाले सीबीआई अधिकारी एसपी सुधांशु धर मिश्रा का ट्रांसफर कर दिया गया। सीबीआई के एसपी सुधांशु धर मिश्रा ने 22 जनवरी को इस एफआईआर पर हस्ताक्षर किए थे।

मिश्रा ने चंदा कोचर के अलावा दीपक कोचर, वीएन धूत और अन्य के खिलाफ दर्ज एएफआईआर पर दस्तखत किए थे। मिश्रा की जगह अब कोलकाता में सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा में एसपी रहे बिस्वजीत दास को चार्ज दिया गया है। वहीं, सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा के नए एसपी सुदीप रॉय होंगे।

बता दें कि एफआईआर दर्ज होने के दो दिन बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने आईसीआईसीआई बैंक-वीडियोकॉन लोन मामले में जांच को लेकर सोशल मीडिया पर सीबीआई को निशाने पर लिया था। जेटली ने यह निशाना ऐसे समय साधा था जब एक ही दिन पहले ही सीबीआई ने चंदा कोचर के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में बैंकिंग क्षेत्र के के.वी.कामत तथा अन्य को पूछताछ के लिए नामजद किया। 24 जनवरी को सीबीआई की टीम ने महाराष्ट्र के चार ठिकानों पर छापे मारे थे।

जेटली ने ट्वीट करते हुए कहा था कि भारत में दोषियों को सजा मिलने की बेहद खराब दर का एक कारण जांच तथा पेशेवर रवैये पर दुस्साहस एवं प्रशंसा पाने की आदत का हावी हो जाना है। उन्होंने ने जांच अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि मेरी हमारे जांच अधिकारियों को सलाह है कि वो साहसिक कदम उठाने की बजाय महाभारत में अर्जुन को दी गई सलाह को फॉलो करें। सिर्फ मछली की आंख पर ध्यान लगाएं।

जेटली ने कहा, ‘‘पेशेवर जांच और जांच के दुस्साहस में आधारभूत अंतर है। हजारों किलोमीटर दूर बैठा मैं जब आईसीआईसीआई मामले में संभावित लक्ष्यों की सूची पढ़ता हूं तो एक ही बात दिमाग में आती है कि लक्ष्य पर ध्यान देने के बजाय अंतहीन यात्रा का रास्ता क्यों चुना जा रहा है? यदि हम बैंकिंग उद्योग से हर किसी को बिना सबूत के जांच में शामिल करने लगेंगे तो हम इससे क्या हासिल करने वाले हैं या वास्तव में नुकसान उठा रहे हैं।’’

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