राजनीतिक दलों को उद्योग घरानों से 956.77 करोड़ का मिला चंदा, BJP को सबसे ज्यादा 705.81 करोड़ का मिला दान

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भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) सत्ता ही नहीं, बल्कि चंदा हथियाने में भी सभी राजनीति पार्टियों को पीछे दिया है। जी हां, यह खुलासा चुनाव सुधार के लिए काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की ओर से जारी रिपोर्ट में हुआ है। एडीआर ने वर्ष 2011-12 से लेकर 2015-16 के बीच सभी राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को मिले कॉरपोरेट चंदे का विश्लेषण किया है।मध्य प्रदेश

एडीआर के मुताबिक, कॉरपोरेट्स और बिजनेस घरानों ने बीजेपी को पिछले चार सालों में सबसे ज्यादा चंदा दिया है।रिपोर्ट के अनुसार, इन चार वर्षों में राजनीतिक दलों को 956.77 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। इस दौरान सीपीएम, एनसीपी और सीपीआई को बीजेपी-कांग्रेस के मुकाबले काफी कम चंदा मिला। बता दें कि राजनीतिक दलों को हर साल उन्हें 20,000 रुपए से अधिक राशि देने वाले दानदाता का पूरा ब्योरा चुनाव आयोग को देना होता है।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012-13 से लेकर 2015- 16 तक राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दलों को कंपनियों और उद्योग घरानों से 956.77 करोड़ रुपए का चंदा मिला है। इनमें बीजेपी को सबसे ज्यादा 2,987 कंपनियों से 705.81 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं, जबकि कांग्रेस को 167 औद्योगिक घरानों से 198.16 करोड़ रुपए का चंदा प्राप्त हुआ है।

एनसीपी को 50 दानदाताओं ने कुल 50.73 करोड़, जबकि सीपीएम को 45 दाताओं के जरिए 1.89 और सीपीआई को 17 दाताओं के माध्यम से 0.18 करोड़ रुपये दान में मिले हैं। वहीं, राष्ट्रीय दल होने के बावजूद बीएसपी को मिले चंदे का विवरण इस रिपोर्ट में नहीं है, क्योंकि उसने यह घोषणा की है कि 20 हजार रुपये से अधिक एक भी दाता ने उसे दान नहीं दिया है। यह रिपोर्ट पार्टियों द्वारा चुनाव आयोग को दी गई जानकारी पर आधारित है।

एडीआर के अनुसार, 89 फीसदी चंदा कॉरपोरेट घरानों से आया है। जबकि नियम के अनुसार, सभी दलों को मिलने वाले राजनीतिक चंदे की नियमित तौर पर चुनाव आयोग को जानकारी देनी होती है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय दलों को सबसे ज्यादा चंदा चुनावी वर्ष 2014 में मिला, जो पांच वर्षों में मिले कुल चंदे का 60 फीसदी है।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘2012-13 से लेकर 2015-16 के बीच राष्ट्रीय स्तर के पांच राजनीतिक दलों को 20,000 रुपए से अधिक का कुल 1,070.68 करोड़ रुपए का चंदा प्राप्त हुआ, जिसमें से 89 प्रतिशत यानी 956.77 करोड़ रुपए उन्हें कंपनियों और उद्योग घरानों से प्राप्त हुआ।’

एडीआर की इससे पहले जारी रिपोर्ट कहती है कि 2004- 05 से 2011-12 के आठ वर्ष में विभिन्न उद्योग घरानों ने राजनीतिक दलों को 378.89 करोड़ रुपए का चंदा दिया। यह राशि इन दलों को ज्ञात स्रोतों से प्राप्त कुल राशि का 87 प्रतिशत थी।

रिपोर्ट के अनुसार 2012- 13 से लेकर 2015-16 के बीच भाजपा और कांग्रेस को 20,000 रुपए से अधिक राशि दानस्वरूप देने वाले उद्योग घराने अथवा कंपनियों का योगदान क्रमश: 92 प्रतिशत और 85 प्रतिशत रहा है। सीपीआई और सीपीएम को मिलने वाला औद्योगिक चंदे क्रमश: चार प्रतिशत और 17 फीसदी रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सत्या ट्रस्ट सबसे ज्यादा कॉरपोरेट चंदा देने वाली संस्था है, जिसने 5 वर्षों में राजनीतिक पार्टियों को 260.87 करोड़ रुपये चंदे के रूप में दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 1933 दानदाताओं में लगभग 384 करोड़ के चंदे में पैन नंबर का जिक्र नहीं है, वहीं 355 करोड़ के चंदे देने वाले का पता ही नहीं चला है। इन अज्ञात चंदों में 99 फीसदी बीजेपी को मिला है।

 

 

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