MP: भिंड डेमो की EVM, पेपर ट्रेल मशीनों में नई की गई थी छेड़छाड़: चुनाव आयोग

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चुनाव आयोग द्वारा गठित एक जांच के अनुसार मध्य प्रदेश में एक उपचुनाव के लिए डेमो कार्यक्रम में इस्तेमाल किए गए ईवीएम मशीनों और पेपर ट्रेल मशीनों में कोई छेड़छाड़ नहीं की गयी थी। मीडिया खबरों में दावा किया गया था कि डेमो कार्यक्रम में कोई भी बटन दबाने पर वोट भाजपा को ही मिल रहा थाा। इसके बाद एक जांच समिति को भिंड जिले के अटेर विधानसभा क्षेत्र में भेजा गया था।

चुनाव आयोग द्वारा जारी एक बयान के अनुसार टीम को 31 मार्च को डेमो के दौरान इस्तेमाल किए गए ईवीएम और वीवीपीएटी में कोई छेड़छाड़ या विसंगित नहीं मिली। आयोग ने कहा कि डेमो के दौरान मशीन बीयू के चार बटन दबाए गए। पहले बटन का चिह्न हैंडपंप था जबकि दूसरे बटन का कमल, तीसरे बटन का चिह्न एक बार फिर हैंडपंप और चौथे बटन का चिह्न हाथ था।

आयोग के अनुसार, इसलिए यह स्पष्ट है कि ईवीएम के विभिन्न बटन दबाए जाने पर संबंधित चुनाव चिह्न सामने दिखे।
टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह कहना पूरी तरह से गलत है कि डेमो के दौरान अलग अलग बटन दबाने पर भी कमल की पर्ची ही प्रकाशित हुयी।

जांच की रिपोर्ट का हवाला देेते हुए कहा गया है कि यह चूक मशीनों में कानपुर नगर के गोविंद नगर विधानसभा क्षेत्र के पहले से दर्ज आंकड़ों को नहीं हटाए जाने से संबंधित है। वहां से ईवीएम नहीं बल्कि वीवीपीएटी प्राप्त किए गए थे औैर डेमो के पहले उनमें डम्मी उम्मीदवारों के चुनाव चिह्न तथा आंकड़े लोड किए गए थे।

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि भिंड में प्रदर्शित ईवीएम उत्तर प्रदेश से नहीं मंगाए गए थे। डेमो में इस्तेमाल किए गए वीवीपीएटी उत्तर प्रदेश से मंगाए गए थे। वीवीपीएटी की संख्या सीमित है और पिछले पांच चुनावों में सभी चुनावी राज्यों में इनका उपयोग किया गया था। 10 उपचुनावों के लिए वीवीपीएटी का आवंटन आयोग ने विभिन्न चुनावी प्रदेशों से किया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ईवीएम और वीवीपीएटी के कामकाज में सटीकता को लेकर कोई संदेह नहीं है। इस विवाद के बाद जिलाधिकारी (जिला निर्वाचन अधिकारी) को हटा दिया गया था।

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