जूनियर से बलात्कार के आरोपी वकील को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दी थी जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने जताई हैरानी

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सुप्रीम कोर्ट ने जूनियर से बलात्कार के आरोपी उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व अधिवक्ता की पहले जमानत याचिका खारिज किए जाने के बावजूद उसे इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत दिए जाने पर गुरुवार को आश्चर्य व्यक्त किया। हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने तीन सितंबर को उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील शैलेन्द्र सिंह चौहान को बलात्कार के मामले में इस आधार पर अंतरिम जमानत दे दी थी कि वह 29 साल से वकालत कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट

न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी की पीठ ने हाई कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए कहा कि इसी मामले में हाई कोर्ट की खंडपीठ के जमानत के आदेश पर इस न्यायालय द्वारा पांच अगस्त को रोक लगाए जाने के बावजूद आरोपी को जमानत दी गई। पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के एकल न्यायाधीश ने तीन सितंबर को अंतरिम आदेश के जरिए एक मुचलके पर सुनवाई की अगली तारीख तक के लिए अंतरिम जमानत दी है। तर्क यह दिया गया है कि याचिकाकर्ता 29 साल से वकालत करने वाला एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता है और उसकी कोई आपराधिक पृष्ठभूमि भी नहीं है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘हम आश्चर्यचकित हैं कि क्या हाई कोर्ट को हमारे पांच अगस्त के आदेश के मद्देनजर कार्रवाई करनी चाहिए थी। यह बहुत ही गंभीर मामला है जिसकी सही तरीके से जांच की जानी चाहिए ताकि अंतत: सच्चाई सामने आए।’’

न्यायालय ने शिकायतकर्ता वकील की अपील पर यह आदेश दिया। शिकायतकर्ता ने अधिवक्ता उत्कर्ष सिंह के माध्यम से यह अपील दायर की थी। शीर्ष अदालत के आदेश के बाद आरोपी वकील ने निचली अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था जो 19 अगस्त को खारिज हो गया था। उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश सी डी सिंह ने बलात्कार के इस मामले में आरोपी अधिवक्ता को अंतरिम जमानत दी थी, जिससे शीर्ष अदालत नाराज हो गई।

उच्च न्यायालय ने यूपी पुलिस को 31 जुलाई को निर्देश दिया था कि चौहान को गिरफ्तार नहीं किया जाए। इस मामले में शिकायतकर्ता 24 वर्षीय जूनियर वकील ने लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र के विभूति खंड थाने में 24 जुलाई को चौहान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि उसी दिन चौहान ने अपने चैंबर में उसके साथ बलात्कार किया हे। चौहान भारतीय दंड संहिता की धारा 328 (अपराध करने की मंशा से विष आदि से क्षति करना), धारा 354 (ए) (यौन उत्पीड़न) और धारा 376 (बलात्कार) के आरोपी हैं। (इंपुट: भाषा के साथ)

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