वैश्विक निंदा का सामना करने के बाद ब्लूम्सबरी इंडिया ने दिल्ली नरसंहार के लिए मुसलमानों के लिए मुसलमानों को अपराधी साबित करने की कोशिश पर लिखी किताब को वापस लेने का किया फैसला

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वैश्विक निंदा का सामना करने के बाद पब्लिशिंग हाउस ब्लूम्सबरी इंडिया (Bloomsbury India) ने इस साल के दिल्ली पोग्रोम के दौरान दिल्ली नरसंहार के लिए मुसलमानों को अपराधी साबित करने की कोशिश पर लिखी किताब को वापस लेने का फैसला किया है। इस पुस्तक लॉन्च कार्यक्रम में भाजपा में शामिल हुए AAP के पूर्व विधायक कपिल मिश्रा को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। दिल्ली के मुस्लिम विरोधी पोग्रोम पर हिंदुत्ववादी व्यक्तियों द्वारा लिखी गई एक पुस्तक को प्रकाशित करने के अपने निर्णय के लिए प्रकाशन को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

ब्लूम्सबरी इंडिया

कंपनी ने एक बयान में कहा, “ब्लूम्सबरी इंडिया ने सितंबर में दिल्ली दंगों को उजागर करने की योजना बनाई थी: सितंबर में द अनटोल्ड स्टोरी, एक पुस्तक जो कि फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए दंगों पर एक तथ्यात्मक रिपोर्ट दे रही है, जो कि लेखकों द्वारा की गई जांच और हस्तक्षेप पर आधारित है। हालांकि, लेखकों द्वारा हमारे ज्ञान के बिना आयोजित एक आभासी पूर्व-प्रकाशन लॉन्च सहित बहुत हालिया घटनाओं के मद्देनजर, उन पार्टियों की भागीदारी के साथ, जिन्हें प्रकाशकों ने मंजूरी नहीं दी होगी, हमने पुस्तक के प्रकाशन को वापस लेने का फैसला किया है।”

कंपनी ने अपने बयान में आगे कहा, “ब्लूम्सबरी इंडिया जोरदार ढंग से बोलने की स्वतंत्रता का समर्थन करता है, लेकिन समाज के प्रति जिम्मेदारी की गहरी भावना रखता है।” ‘दिल्ली दंगा 2020- द अनटोल्ड स्टोरी’ नामक पुस्तक को मोनिका अरोरा, सोनाली चितलकर और प्रेरणा मल्होत्रा ​​ने लिखा है।

गौरतलब है कि, फरवरी में उत्तर पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी जिसमें आईबी अधिकारी अंकित शर्मा और हेड कांस्टेबल रतन लाल सहित 53 लोग मारे गए थे। इस हिंसा के दौरान मारे गए लोगों में ज्यादातर मुसलमान शामिल थे। राजधानी दिल्ली में चार दिनों तक जारी रही इस हिंसा में 200 से अधिक लोग घायल हो गए, इनमें 10 से ज्यादा पुलिसकर्मी भी शामिल थे।

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