गुजरात में 300 से ज्यादा दलितों ने अपनाया बौद्ध धर्म, जानिए क्या है वजह?

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अशोक विजयादशमी के मौके पर शनिवार(30 सितंबर) को गुजरात के अहमदाबाद और वडोदरा में 300 से ज्यादा दलितों ने बौद्ध धर्म अपना लिया। समझा जाता है कि इसी दिन मौर्य शासक सम्राट अशोक ने अहिंसा का संकल्प लिया था और बौद्ध धर्म अपना लिया था।

(AFP Representative Photo)

न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक, गुजरात बौद्ध अकैडमी के सचिव रमेश बांकर ने बताया कि संगठन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में करीब 200 दलितों ने बौद्ध धर्म में दीक्षा ली। इनमें 50 महिलाएं भी शामिल हैं। बांकर ने बताया कि कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) के बौद्ध धर्म के प्रमुख ने दीक्षा दी।

भगवान बुद्ध ने परिनिर्वाण प्राप्त करने के लिए कुशीनगर में ही अपने शरीर का त्याग किया था। कार्यक्रम के संयोजक मधुसूदन रोहित ने बताया कि वडोदरा में एक कार्यक्रम में 100 से अधिक दलितों ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। पोरबंदर के एक बौद्ध भिक्षु ने उन्हें दीक्षा दी।

बीएसपी के क्षेत्रीय समन्वयक रोहित ने बताया कि इस कार्यक्रम के पीछे कोई खास संगठन नहीं था। 100 से अधिक लोगों ने स्वैच्छिक रूप से धर्मांतरण किया। रोहित ने कहा कि हमने धर्मांतरण के लिए संकल्प भूमि (वडोदरा में) को चुना क्योंकि बाबासाहेब अंबेडकर ने छुआछूत के खिलाफ अपनी लड़ाई शुरू करने की खातिर अपनी नौकरी और शहर छोड़ने से पहले यहीं पर पांच घंटे बिताए थे।

उन्होंने कहा कि अशोक विजय दशमी उनके लिए इसलिए अहम है कि इसी दिन अंबेडकर ने 1956 में नागपुर में लाखों लोगों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था। बता दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में तीन गांवों के करीब 180 दलित समुदाय के परिवारों ने हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया था।

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