1984 में राजीव गांधी की वजह से मुझे मंत्री पद नहीं मिला: राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी

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इरशाद अली

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का भारतीय राजनीति में एक अहम कद पहले भी रहा है और अब भी है। कांग्रेस में सोनिया गांधी के रहते हुए भी प्रणब मुखर्जी को दूसरा प्रधानमंत्री कहा जाता था लेकिन भीतराघात राजनीति के चलते प्रणब मुखर्जी कभी भी प्रधानमंत्री की कुर्सी को सुशोभित नहीं कर सके। जबकि मनमोहन सिंह की दूसरी पारी को लेकर आखिर के दिनों में तरह-तरह के सवालों से कांग्रेस और सोनिया गांधी को घेरा गया।

उन्होंने कहा कि 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब लोक सभा के चुनाव हुए तो कांग्रेस को राजीव गांधी के नेतृत्व में ऐतिहासिक जीत हुई । लेकिन राजीव गांधी की वजह से उन्हें कोई भी मंत्री पद नहीं मिला और यह उनके लिए चौंकाने वाला फैसला था ।

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अब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इन सारी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। मौका था राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की जीवनी ‘दि टरबुलेंट इयर्स: 1980-96’ के विमोचन का। रूपा प्रकाशन की और से प्रकाशित और उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी और कर्ण सिंह के द्वारा विमोचित राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की जीवनी अब लोगों के लिये उपलब्ध है।

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी जी अपने निजि जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलूओं से पर्दा हटाया उन्होंने खुलासा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वह अंतरिम प्रधानमंत्री बनना चाहते थे । प्रणब ने इन अटकलों को ‘‘गलत और द्वेषपूर्ण’’ करार दिया है।

अपनी जीवनी ‘दि टरबुलेंट इयर्स: 1980-96’ के दूसरे खण्ड में आगे राष्ट्रपति में लिखते है, ‘‘कई कहानियां फैलाई गई हैं कि मैं अंतरिम प्रधानमंत्री बनना चाहता था, मैंने दावेदारी जताई थी और फिर मुझे काफी समझाया-बुझाया गया था ।’’ प्रणब ने लिखा है, ‘‘और यह कि इन बातों ने राजीव गांधी के दिमाग में शक पैदा कर दिए । ये कहानियां पूरी तरह गलत और द्वेषपूर्ण हैं ।’’

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‘दि टरबुलेंट इयर्स: 1980-96’ में राष्ट्रपति ने विस्तार से बताया है कि प्रधानमंत्री पद के मुद्दे पर उनकी और राजीव गांधी की बातचीत एक बाथरूम में हुई थी। राष्ट्रपति लिखते है कि ‘‘वक्त बीतता जा रहा था । मैं उनसे बात करने को लेकर बहुत उत्सुक था । मैं दंपति :राजीव और सोनिया: के पास गया । राजीव के कंधे के पीछे हल्का सा स्पर्श किया जिससे मैं उन्हें संकेत दे सकूं कि मुझे उनसे कोई जरूरी काम था ।

उन्होंने खुद को सोनिया से अलग किया और मुझसे बात करने के लिए पीछे मुड़े । उन्होंने लिखा है, ‘वह जानते थे कि यदि मामला बहुत जरूरी और गोपनीय नहीं होता तो मैं उन्हें परेशान नहीं करता । वह तुरंत मुझे उस कमरे से सटे बाथरूम में ले गए, ताकि कमरे में दाखिल होने वाला कोई और शख्स हमें बात करते नहीं देख सके ।’

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अपनी जीवनी में राष्ट्रपति ने क्लियर कर दिया है कि उनकी इस तरह की कोई मंशा नहीं थी लेकिन फिर भी कांग्रेस में उनकी वरिष्ठता और कद को कभी भी हल्के में नहीं लिया गया शायद इसलिये सोनिया गांधी ने प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति की भूमिका में देखना चाहा। चूंकि अब ‘दि टरबुलेंट इयर्स: 1980-96’ प्रकाशित हो चुकी है तो लोग उनके जीवन से जुड़े और भी कई अनछुए पहलुओं से रूबरू हो सकेगें।

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