देश को गृह युद्ध में झोंकने वालो, कुछ तो शर्म करो

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ऋचा वार्ष्णेय

अब किसी पडोसी देश को हमसे लड़ने की जरुरत नही न ही किसी आतंक वादी को कोई बम विष्फोट की।

क्यूंकि हम खुद ही आपस में लड़ मर कर उनका काम जो कर रहे हैं। अपने देश को गृह युद्ध में जला रहे हैं। कभी देश द्रोह के नाम पर,कभी जातिवाद के नाम पर और कहीं आरक्षण के नाम पर।

कितने शर्म की बात है, जिस भारत देश की आज़ादी के लिए प्रकाश कौर जैसी माओं के बेटे भगत सिंह, सुखदेव एवं राजवीर ने देश के लिए फांसी को चूमा था और हम जैसे अहसान फरामोश उसी भारत माँ की धरती को शर्मशार कर रहे हैं झूटी सच्ची लड़ाइयां करके।

सुनने में आसान है कि देश के लिए जान दे दी पर हक़ीक़त में बहुत ही मुश्किल। हमारा बच्चा एक वक़्त का खाना खाए बिना सो जाये तो रात भर हमको नींद नही आती है और वही न जाने इसी तरफ कितनी माओं की गोद सुनी हो चुकी है और न जाने कितने सैनिक अभी भी वर्फ की चादरों में भी सिर उठाये भारत माँ की सेवा में लगे हैं। कितनी नव विवाहिता, कितनी सुहागिनें अपने सुहाग को भारत के लिए न्योछावर कर चुकी हैं।

पर हमे कोई शर्म नही।

कोई नदी या पर्वत या पेड़ या कहीं भी ये लिखा है कि इस जाति या इस वर्ग का इंसान मेरा प्रयोग नही कर सकता।

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उस ऊपर वाले ने तो हमे नही बांटा पर हमने जरूर बाँट लिया अपनी जरुरतो के हिसाब से।

देश द्रोह के नाम से देश में गृह युद्ध छेड़ लिया है। क्या आपस में लड़ मरने से देश द्रोह खत्म हो जायेगा और भारत का नाम विश्व के शीर्ष देशो में आ जायेगा? कल तक हम फिल्मकारों को गाली दे रहे थे कि देश का नाम ख़राब कर रहे हैं पर देश के न्यायलय में जाकर क़ानून तोड़कर क्या हम देश का सिर ऊंचा कर रहे हैं?

क्या ऐसा नही हो सकता था कि जो भी इस तरह की निम्न कोटि की सोच वाले व्यक्ति या वर्ग थे, जो भी भारत के लिए अपमानजनक नारे लगा रहे थे, पुलिस सारी जानकारी एवं सही तरीके से जांच करने के बाद बिना किसी शोर गुल के चुपचाप से उन सभी को पकड़ती और कड़ी से कड़ी सजा देती।

उसके बाद इस खबर को चलाया जाता कि इस प्रकार की गतिविधि करने वालो को भारत न ही कभी माफ़ करेगा और न ही छोड़ेगा जिससे सभी को यह सन्देश मिल जाता कि आगे इस प्रकार को कोई भी घटना न घटे।

परन्तु यहाँ स्थिति बिलकुल उलट है और देश की हालत बद से बदतर तर।

एक तरफ लोग भारत माँ की जा जय कर कर रहे हैं और उसी के तुरंत बाद वहीं भारत माता के बेटे दूसरे बेटे को लहूलुहान कर रहे हैं। भद्दी भद्दी गालियां इत्यादि। क्या एक माँ खुश हो सकती है अपने बच्चों को आपस में लड़ता मरता देखकर?

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जो लोग कानून हाथ में ले रहे है क्या उन्होंने देश की पुलिस एवं सरकार को नाकारा समझ रखा है या उनका सरकार से ही विश्वास उठा गया है और सरकार भी इस तरह के उपद्रवियों को रोक पाने में असक्षमता दिखा कर इनकी सोच को सही ठहरा रही है।

इधर हालत सुधरे भी न थे कि खबर आती है कि हरियाणा में आरक्षण को लेकर दंगे फ़साद हो रहे हैं।

जाट वर्ग जो कि प्रसिद्ध है अपने खुद्दारी के लिए वो आज आरक्षण जो कि एक गरीब समुदाय इत्यादि के लिए सुरक्षित था उसकी मांग कर रहा है और वो भी मांग शान्ति पूर्ण नही बल्कि अपने देश की सम्पति का नाश करके। लोगों को नुक्सान पंहुचा कर और उनकी जान लेकर।

बचपन से सुना था, जब भी कोई अपनी खुद्दारी या आत्म सम्मान के लिए लड़ता तो लोग उससे बोलते थे ज्यादा चौधरी बन रहा है और आज सब हरियाणवी जो देश के नाम को ऊँचा करने के लिए देश हो या विदेश में, जी जान से लगे थे और दिन रात लगे हैं वो भी बिना किसी के आरक्षण के, फिर चाहे वो खेल कूद हो या राजनीति या बोलीवुड हर जगत से जुड़ा है हरियाणा।

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चौधरी चरण सिंह, कपिल देव, विरेन्द्र सहवाग, साइना नेहवाल, विजेंद्र सिंह ऐसे बहुत सारे नाम हैं। उनका नाम एक छण में मिटटी में मिला दिया।

आरक्षण उनको दिया जाता है जिनका योग्यता पैसे इत्यादि के आभाव के कारण उभर नही पाती और इनहे आरक्षण की आवश्यकता होती।

अनाथ बच्चों को,अपंगो,आर्थिक रूप से गरीबों को या भारत माँ के लाल उन् देश के जवानो के परिवारो को, जो हमारे भरोसे छोड़ गए जब कि वो वहां हमारे लिए अपने सीने पर गोलियां खाते हैं दिन रात।

भारत माता की जय, हिन्दुस्तान जिंदाबाद या जय हिन्द बोलने से देश महान नही बनेगा बल्कि ये बना था और बनेगा महान हमारे कर्मो से। मुह में राम बगल में छुरा जैसी हरकतों से नही।

पिछले कितने सालो से हम सुनते आ रहे हैं कि भारत विकासशील देश है पर कभी विकसित न हो पाया। जानते हैं क्यों?

इन असामाजिक तत्वों की वजह से, इन जातिवाद, इन लड़ाई झगड़ो इत्यादि से। हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि सब लोग एकता के साथ अपनी अपनी खूबियों के साथ देश के प्रकृतिक खूबियों एवं ऊर्जा का भरपूर प्रोयोग करके देश के स्तर को ऊपर उठाये न की दकियानूसी सोच के कारण नीचे

अभी भी वक़्त है सुधर जाएं।


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