Controversy over EC’s returning officer’s suspicious entry into EVMs room, Kejriwal demands his suspension

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Delhi chief minister, Arvind Kejriwal, on Monday demanded the suspension of an election commission returning officer after it was reported that he had entered the strong room, where EVMs are kept.

returning officer evm room

Reacting to a tweet posted by an Aam Aadmi Party functionary, Kejriwal said, “This officer shud be immediately suspended and EC shud ensure safety of all EVMs.”

AAP’s Jastej Arora had tweeted, “Gagandeep Virk, RO of Gill constituency (Ludhiana) entered strong room with 5-7 people & didn’t allow any representative of party inside.”

AAP has also decided to file an FIR with the local police in Ludhiana against the officer in question.

Janta Ka Reporter had reported how many voters in Punjab and Goa had expressed their fear of manipulation in EVMs as the gap between the polling and counting days this year has been kept for over a month by the Election Commission.

During Delhi assembly polls, Kejriwal’s volunteers had physically guarded the building, where EVM machines were kept after the polls. But, this time the gap between the polling day and the day the votes will be counted in Punjab and Goa is more than a month. Several AAP functionaries say that this is humanly not possible to guard the building for such a prolonged period.

However, soon after Janta Ka Reporter’s editor-in-chief, Rifat Jawaid’s Facebook Live (Watch below), the Kejriwal-led party decided to deploy dozens of volunteers outside strongrooms in Punjab.

https://twitter.com/DineshRedBull/status/828316038001520643

 

3 COMMENTS

  1. भाजपा कभी नहीं बनने देगी राम मंदिर, रविश कुमार का ज़बरदस्त विश्लेषण | BJP will never built Ram Temple
    Krantikaari Indian
    https://youtu.be/jWT5LBxnMAE
    Published on Jan 15, 2017
    भाजपा कभी नहीं बनने देगी राम मंदिर, रविश कुमार का ज़बरदस्त विश्लेषण | BJP will never built Ram Temple
    Ravish Kumar Prime Time Report
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    Entertainment
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    Standard YouTube License

  2. जब-जब कोई इंडियन फिल्म बैन होगी, एक पूर्व चीफ जस्टिस की ये टिप्पणी पढ़ लेना!
    http://www.thelallantop.com/news/you-must-read-a-former-cjis-take-on-film-ban-as-akshay-kumars-jolly-llb-2-has-been-ordered-4-cuts-by-the-bombay-high-court/
    विशालthelallantopvs@gmail.com फरवरी 06, 2017 07:57 PM
    फिल्म ‘जॉली एलएलबी-2’ के एक दृश्य में अक्षय कुमार और अनू कपूर
    न्यायपालिका. देश की वो संस्था, जिस पर हर नागरिक को सबसे ज्यादा भरोसा है. भरोसा इस बात का कि इस द्वार पर आए किसी आदमी के साथ कुछ भी गलत नहीं होगा, उसे न्याय मिलेगा. लेकिन अक्षय कुमार और हुमा कुरैशी की आगामी फिल्म ‘जॉली एलएलबी-2’ इसी संस्था की कैंची में फंस गई है. 10 फरवरी को रिलीज होने जा रही इस फिल्म का रास्ता बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने ब्लॉक कर दिया. कोर्ट ने फिल्म में चार जगह कट लगाने का आदेश दिया है.
    ये विवाद पिछले महीने शुरू हुआ, जब नांदेड़ के एक वकील अजय कुमार एस. वाघमारे ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक पिटीशन डालते हुए अर्जी दी कि फिल्म के टाइटल में से ‘एलएलबी’ हटा दिया जाए. वाघमारे के मुताबिक फिल्म में न्याय जैसे पवित्र पेशे को सतही ढंग से दिखाया गया. इसी मामले में इससे पहले हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए तीन लोगों का एक पैनल बनाने का आदेश दिया था. उसी पैनल ने अब फिल्म देखकर इसमें चार कट लगाने के लिए कहा है.
    ये हैं उन चार सीन्स में आपत्तियांः
    1. एक डरा हुआ जज अपनी कुर्सी के पीछे छुप रहा है.
    2. एक जूता फेंका जा रहा है.
    3. आपत्तिजनक इशारा किया जा रहा है.
    4. बहस के दौरान एक सीन में संवाद ठीक नहीं.
    फिल्म के प्रोड्यूसर्स के पास अभी सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता बचा है.
    हाल के वर्षों में एेसी बहुत सी फिल्में रही हैं जिन पर बैन लगाने की मांग उठी, या कई समूहों ने अघोषित रोक लगाई, तोड़फोड़ की धमकियां दीं या जिन फिल्मों को कोर्ट में घसीटा गया. सेंसर बोर्ड तो परमानेंट वजह है ही. ‘वॉर ऐंड पीस’, ‘गोलियों की रासलीला रामलीला’, ‘मद्रास कैफे’, ‘डर्टी पॉलिटिक्स’, ‘जोधा अकबर’, ‘आरक्षण’, ‘विश्वरूपम’ और ‘उड़ता पंजाब’ कुछ एेसी फिल्में हैं.
    और हमें उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि भारत जैसे विविध विचारों वाले देश में ये विवाद कभी रुकने वाले हैं या फिल्मों को लेकर तरह-तरह के प्रतिरोध रुकने वाले हैं. तो हमें क्या करें? वो कौन सा विचार है जो हमें इस बीच हर बार रास्ता दिखा सकता है? यहीं पर याद आते हैं आर. एम. लोढ़ा. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रहते हुए उन्होंने आमिर खान की फिल्म ‘पीके’ पर बैन के मामले की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की थी जो बहुत ही प्रगतिशील, सुलझी हुई और अनुपालनीय थी.
    ‘पीके’ पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का मामला चला था. कि हीरो भगवान शिव को गुमशुदा बताकर खोज रहा है. कि पोस्टर में हीरो नंगा खड़ा है. जस्टिस लोढ़ा ने जो कहा उसे परमानेंट रूप से सहेज लेना चाहिए और हर उस बार वकीलों, जजों, दर्शकों, पुलिसवालों, नागरिकों, फिल्मकारों, कलाकारों, शिक्षकों, विचारकों और अन्य क्षेत्रों के लोगों को उस टिप्पणी को पढ़ना चाहिए.
    इससे हमें समझने में मदद मिलेगी की कला क्या है और एक कलाकार को एक समाज कैसे देखे और कितनी आजादी दे?
    जस्टिस लोढ़ा ने अगस्त 2014 में ‘पीके’ मामले की सुनवाई के दौरान कहा था:
    “ये कला है. मनोरजंन है. धार्मिक पहलुओं को इसमें नहीं जोड़ा जाना चाहिए. अगर आपको पसंद नहीं आ रहा है, तो आप मत देखिए.
    दूसरों को देखने दीजिए.
    ये फिक्शन है. कला का एक हिस्सा. कला और फिक्शन को धार्मिक बातों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.
    इस मामले में आपको सहिष्णुता दिखानी पड़ेगी.
    अगर हम इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे, तो इसका मतलब होगा कि हम किसी और के फिल्म देखने के अधिकार को छीन रहे हैं.
    ये मनोरंजन है. इसमें इतना ज्यादा संवेदनशील होने की जरूरत नहीं है.
    भारतीय समाज अपने आप में परिपक्व है. इसे (फिल्म) देखकर कोई भी उत्तेजित नहीं होगा.
    लोग मनोरंजन और किसी और चीज के बीच का फर्क जानते हैं.
    आज का युवा बेहद स्मार्ट है. आज का युवा वैसा नहीं है, जैसे हम और आप अपनी जवानी के दिनों में थे. वो जो देखना चाहें, उन्हें देखने दिया जाना चाहिए.
    इंटरनेट के इस दौर में किसी चीज को बैन करने जैसे किसी आदेश की जरूरत नहीं है. आपको इसकी चिंता करने की भी जरूरत नहीं है.”

    पूर्व CJI आरएम लोढ़ा

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