अब देश के अंदर ही अंजाम दी जा रही है सर्जिकल स्ट्राइक

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8 सिमी कार्यकर्ताओं को मारे जाने के तरीके पर अब तरह-तरह के सवाल उठने शुरू हो गए है। पुलिस ने ये एनकाउंटर किस प्रकार से किया इस पर पुलिस ने पूरी तरह से बयान जारी नहीं किए है।
मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार प्रवीन दुबे एनकाउंटर के वक्त मौके पर मौजूद थे। उन्होनें पुलिस के इस एनकाउंटर को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान से कुछ वाजिब सवाल किए है। फेसबुक पर लिखी उनकी पोस्ट वायरल हो गयी है।

शिवराज जी इस सिमी के कथित आतंकवादियों के एनकाउंटर पर कुछ तो है जिसकी पर्दादारी है। मैं खुद मौके पर मौजूद था। सबसे पहले 5 किलोमीटर पैदल चलकर उस पहाड़ी पर पहुंचा, जहां उनकी लाशें थीं। आपके वीर जवानों ने ऐसे मारा कि अस्पताल तक पहुँचने लायक भी नहीं छोड़ा। ना आपके भक्त मुझे देशद्रोही ठहराएं, उससे पहले मैं स्पष्ट कर दूँ, मैं उनका पक्ष नहीं ले रहा, उन्हें शहीद या निर्दोष भी नहीं मान रहा हूँ लेकिन सर इनको जिंदा क्यों नहीं पकड़ा गया..?

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मेरी एटीएस चीफ संजीव शर्मा से वहीं मौके पर बात हुई और मैंने पूछा कि क्यों सरेंडर कराने के बजाय सीधे मार दिया..? उनका जवाब था कि वे भागने की कोशिश कर रहे थे और काबू में नहीं आ रहे थे, जबकि पहाड़ी के जिस छोर पर उनकी बॉडी मिली, वहां से वो एक कदम भी आगे जाते तो सैकड़ों फीट नीचे गिरकर भी मर सकते थे। मैंने खुद अपनी एक जोड़ी नंगी आँखों से आपकी फोर्स को इनके मारे जाने के बाद हवाई फायर करते देखा, ताकि खाली कारतूस के खोखे कहानी के किरदार बन सकें।
उनको जिंदा पकड़ना तो आसान था फिर भी उन्हें सीधा मार दिया, और तो और जिसके शरीर में थोड़ी सी भी जुंबिश दिखी उसे फिर गोली मारी गई। एकाध को तो जिंदा पकड लेते। उनसे मोटिव तो पूछा जाना चाहिए कि वो जेल से कौन सी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए भागे थे? अब आपकी पुलिस कुछ भी कहानी गढ़ लेगी कि प्रधानमंत्री निवास में बड़े हमले के लिए निकले थे या ओबामा के प्लेन को हाइजैक करने वाले थे, तो हमें मानना ही पड़ेगा क्यूंकि आठों तो मर गए… शिवराज जी सर्जिकल स्ट्राइक यदि आंतरिक सुरक्षा का भी फैशन बन गया तो मुश्किल होगी।
फिर कहूँगा कि एकाध को जिंदा रखना था भले ही इत्तू सा। सिर्फ उसके बयान होने तक। चलिए कोई बात नहीं। मार दिया, मार दिया लेकिन इसके पीछे की कहानी जरूर अच्छी सुनाइयेगा, जब वक्त मिले, कसम से दादी के गुजरने के बाद कोई अच्छी कहानी सुने हुए सालों हो गए। आपका भक्त

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