मध्य प्रदेश: 6 की मौत के बाद फिर उग्र हुआ किसानों का प्रदर्शन, 8-10 वाहनों में लगाई आग, DM-SP और पत्रकारों से मारपीट

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मध्य प्रदेश में फसलों के वाजिब दाम सहित अन्य मांगों को लेकर चल रहा किसानों का आंदोलन मंगलवार(7 जून) को हिंसक हो गया। मंदसौर जिले में आंदोलन कर रहे किसानों पर हुई फायरिंग में 6 की मौत हो गई। मुख्यमंत्री ने गोलीबारी में किसानों की मौत की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, डीएम का कहना है कि उन्होंने किसानों पर गोली चलाने का कोई आदेश नहीं दिया था।लेकिन एक बार फिर जिले में किसानों का प्रदर्शन उग्र हो गया है। बुधवार(7 जून) को किसानों ने पुलिस फायरिंग में मारे गए किसान के शव से साथ रास्ता जाम कर दिया। सुबह जब किसान की शवयात्रा निकाली गई, इस दौरान उसके शव को तिरंगे से लपेटा गया था।

DM के साथ मारपीट

इस बीच मंदसौर में किसानों को समझाने के लिए पहुंचे डीएम स्वतंत्र कुमार पर भी किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। फायरिंग से नाराज किसानों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की। जिसके बाद किसी तरह कुछ किसानों ने जिलाधिकारी को वहां से निकाल कर उनकी कार में बैठाया और उन्हें रवाना किया।

साथ ही किसानों की नाराजगी को देखते हुए DM के अलावा SP सहित सभी आलाधिकारी वहां से भाग खड़े हुए। किसानों ने कलेक्टर के कपड़े तक फाड़ दिए और उनके साथ मारपीट की। साथ ही पत्रकारों से भी मारपीट की गई। इसके अलावा उग्र किसानों ने 8-10 वाहनों में आग लगा दी।

बता दें कि मंगलवार को मंदसौर-नीमच रोड पर पिपल्यामंडी इलाके में उग्र किसानों ने 8 ट्रकों और 2 बाइकों को आग लगा दी। जिसके बाद पुलिस और सीआरपीएफ ने स्थिति संभालने की कोशिश की तो भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। हालात बेकाबू होते देख सुरक्षाबलों ने फायरिंग की, जिसमें पांच किसानों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।

मामले को लेकर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। बता दें कि कृषि उत्पादों के उचित मूल्य और अन्य मांगों को लेकर किसान गत एक जून से पश्चिमी मध्यप्रदेश में आंदोलन कर रहे हैं। कलेक्टर एस के सिंह ने इस घटना में पांच लोगों की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि इसकी न्यायिक जांच कराने के आदेश दिये गये हैं।

उन्होंने बताया कि पुलिस को आंदोलन कर रहे किसानों पर किसी भी स्थिति में गोली नहीं चलाने के आदेश दिये गये थे।मरने वालों की पहचान मंदसौर के रहने वाले कन्हैयालाल पाटीदार, बबलू पाटीदार, चेन सिंह सिंह पाटीदार, अभिषेक पाटीदार और सत्यनारायण के तौर पर की गई है। अभिषेक और सत्यनारायण ने इलाज के लिये इन्दौर ले जाते वक्त दम तोड़ दिया।

मंदसौर में कर्फ्यू और इंटरनेट सेवाएं बंद

मंदसौर जिला कलेक्टर ने बताया कि हालात बेकाबू देख मंदसौर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है। वहीं अफवाहों को रोकने के लिए जिले में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। मंदसौर, रतलाम और उज्जैन में इंटरनेट सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई है। साथ ही बल्क मैसेज करने पर भी पाबंदी लगा दी गई है।

एक करोड़ मुआवजा

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। सीएम ने जान गंवाने वालों के परिजनों को एक करोड़ रुपये सहायता और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की है। वहीं, घायलों को 10-10 लाख रुपये और मुफ्त इलाज की बात कही है।

किसानों के साथ युद्ध कर रही है सरकार

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शिवराज सरकार पर निशाना साधा है। राहुल ने ट्वीट कर कहा, ‘भाजपा सरकार देश के किसानों के साथ ‘युद्ध’ जैसी स्थिति में है। भाजपा के ‘न्यू इंडिया’ में अपना हक मांगने पर अन्नदाताओं को गोली मिलती है।’

इसके अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शिवराज सरकार को किसानों का हत्यारा बताते हुए जमकर निशाना साधा है। केजरीवाल ने ट्वीट किया, मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार किसानों की हत्यारी है। देश भर के किसान चुप नहीं रहेंगे। पूरा देश किसानों के साथ है।

कांग्रेस का आज मध्यप्रदेश बंद का एलान

इस बीच फायरिंग के विरोध में किसान संगठनों और कांग्रेस ने आज(7 जून) मध्यप्रदेश बंद का एलान किया है। साथ ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल भी आज(7 जून) को किसानों से मुलाकात करने मंदसौर जाएंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ ने भी बुधवार को आधे दिन प्रदेश बंद का एलान किया है।

1 जून आंदोलन कर रहे हैं किसान

बता दें कि मध्यप्रदेश में किसानों ने गुरुवार(1 जून) को शिवराज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्ज माफी और अपनी फसल के वाजिब दाम की मांग को लेकर किसानों की हड़ताल अभी भी जारी है। किसानों ने पश्चिमी मध्य प्रदेश में अपनी तरह के पहले आंदोलन की शुरूआत करते हुए अनाज, दूध और फल-सब्जियों की आपूर्ति रोक दी है। सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुआ किसानों का आंदोलन 10 दिन तक चलेगा।

किसानों की प्रमुख मांगे

  • स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं।
  • किसानों को फसलों का उचित दाम मिले और समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए।
  • आलू, प्याज सहित सभी प्रकार की फसलों का समर्थन मूल्य घोषित किया जाए।
  • आलू, प्याज की कीमत 1500 रुपये प्रति क्वंटल हो।
  • बिजली की बढ़ी हुई दरें सरकार जल्द से जल्द वापस लें।
  • आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं।
  • मंडी शुल्क वापस लिया जाए।
  • फसलीय कृषि कर्ज की सीमा 10 लाख रुपए की जाए।
  • वसूली की समय-सीमा नवंबर और मई की जाए।
  • किसानों की कर्ज माफी हो।
  • मध्यप्रदेश में दूध उत्पादक किसानों को 52 रुपये प्रति लीटर दूध का भाव तय हो।

 

 

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