दिल्ली के 55 में से 43 मैकडॉनल्ड रेस्तरां बंद, मुश्किल में 1700 कर्मचारी, लोगों में छाई मायूसी

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बोर्ड ऑफ कनॉट प्लाजा रेस्टोरेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (सीपीआरएल) ने गुरुवार(29 जून) को एक बड़ा कदम उठाते हुए राजधानी दिल्ली में चल रहे 55 में से 43 मैकडॉनल्ड रेस्तरां बंद करने का फैसला किया। सीपीआरएल और अमेरिकी मैकडॉनल्ड के बीच 50-50 फीसदी साझेदारी का ज्वाइंट वेंचर है।

इस फैसले से करीब 1,700 कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। लिहाजा कर्मचारी इस फैसले के विरोध में सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं। हालांकि, मैकडॉनल्ड ने उन्हें निलंबन के दौरान भी वेतन देने का भरोसा जताया है। कहा जा रहा है कि रेस्तरां बंद करने का फैसला निश्चित रूप से मैकडॉनल्ड को नुकसान पहुंचाएगा।

वर्ष 2013 में पिज्जा ब्रैंड डॉमिनोज ने कंपनी को कड़ी टक्कर देकर और देश में क्विक सर्विस रेस्तरां के मामले में पहला स्थान प्राप्त कर लिया था। सूत्रों के अनुसार, दोनों के बीच लंबे समय से अंतर्कलह चल रही है। रेस्तरां बंद करने की घोषणा बुधवार सुबह बोर्ड बैठक के दौरान की गई। सीपीआरएल उत्तर और पश्चिम भारत में फास्ट फूड चेन का संचालन करती हैं।

लोगों का गर्मजोशी से स्वागत कर रहे कर्मचारी रेस्तरां बंद होने की खबर दिल छुपाए काम में जुटे हैं। वहीं, गुरुवार को दोपहर में मैक-डी में मौजमस्ती के लिए आए कुछ युवकों को जैसे ही दिल्ली में इस रेस्तरां के बंद होने की खबर मिली, वो मायूस हो गए।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, अगस्त 2013 में विक्रम बख्शी को सीपीआरएल के प्रबंध निदेशक पद से हटा दिया गया था। इसके बाद बख्शी मैकडॉनल्ड के बीच लंबी कानूनी लड़ाई शुरू हुई और मामला कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ऑर्बिट्रेशन में चल रहा है। बख्शी और मैकडॉनल्ड्स के बीच चल रही लड़ाई के बीच सीपीआरएल आवश्यक स्वास्थ्य लाइसेंस रीन्यू कराने में असफल हो गई है।

वेस्टलाइफ डेवलेपमेंट लिमिटेड ने अपनी सब्सिडियरी हार्डकासल रेस्टोरेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (फढछ) के जरिए पश्चिम और दक्षिण भारत में मैकडॉनल्ड ब्रांड के तहत बिजनेस के मास्टर राइट्स लिए हुए हैं। कंपनी अभी 242 रेस्टोरेंट्स चला रही है।

इस बीच मैकडॉनल्ड की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारत मैकडॉनल्ड के लिए एक अच्छा बाजार है। हम सीपीआरएल के साथ इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाने में लगे हैं। मैकडॉनल्ड इन निलंबन के दौरान भी अपने कर्मचारियों को पहले की तरह ही वेतन देगा। उनकी नौकरी जाने की बात गलत है।

 

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