ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित मशहूर हिंदी कवि केदारनाथ सिंह का निधन

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हिन्दी की समकालीन कविता और आलोचना के सशक्त हस्ताक्षर और अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ के प्रमुख कवि डॉ. केदारनाथ सिंह का सोमवार (19 मार्च) रात दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। केदारनाथ सिंह 84 वर्ष के थे। उन्हें वर्ष 2013 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया था। केदारनाथ के उनके परिवार में एक पुत्र और पांच पुत्रियां हैं।

समाचार एजेंसी भाषा को पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि डॉ. केदारनाथ सिंह को करीब डेढ़ माह पहले कोलकाता में निमोनिया हो गया था। इसके बाद से वह बीमार चल रहे थे। पेट के संक्रमण के चलते उनका सोमवार रात करीब पौने नौ बजे एम्स में निधन हो गया।

उनके निधन पर शोक जाहिर करते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया कि, “सुप्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार केदारनाथ सिंह जी के निधन के समाचार से मुझे गहरी वेदना की अनुभूति हुई है। सरल भाषा में जीवन की जटिलताओं की अभिव्यक्ति करने की उनकी अनूठी शैली थी। उनके निधन से हिंदी जगत का एक सशक्त हस्ताक्षर मिट गया है। ईश्वर उनकी दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।”

हिंदी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह का जन्म 1934 में उत्तर प्रदेश के बलिया में हुआ था। वह हिंदी कविता में नए बिंबों के प्रयोग के लिए जाने जाते हैं। साल 2013 में केदारनाथ सिंह की सेवाओं के लिए उन्हें साहित्य के सबसे बड़े सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें इसके अलावा साहित्य अकादमी पुरस्कार और व्यास सम्मान सहित कई सम्मानों से पुरस्कृत किया गया था।

उनकी प्रमुख कविता संग्रहों में ‘अभी बिलकुल अभी’, ‘जमीन पक रही है’, ‘यहां से देखो’, ‘बाघ’, ‘अकाल में सारस’ और ‘उत्तर कबीर’ शामिल हैं। टिप्पणिया आलोचना संग्रहों में ‘कल्पना और छायावाद’, ‘मेरे समय के शब्द’ प्रमुख हैं। उनका अंतिम संस्कार कल दोपहर तीन बजे लोदी रोड शमशान घाट में किया जाएगा।

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