तेलंगाना में सैकड़ों वामपंथी प्रदर्शकारी हुए गिरफ्तार

0

तेलंगाना में वाम दलों और अन्य जन संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को बुधवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ये सभी कार्यकर्ता पुलिस द्वारा की गई दो नक्सलियों की हत्या के विरोध में राज्य विधानसभा तक जुलूस निकालने जा रहे थे।

तेलंगाना डेमोक्रेटिक फ्रंट (टीडीएफ) द्वारा आयोजित जुलूस में शामिल होने हैदराबाद जा रहे कई नेताओं और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं को विभिन्न जिलों से गिरफ्तार किया गया।

प्रख्यात शिक्षाविद् चूका रमैया को हैदराबाद में उनके घर में नजरबंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि ऐसी गिरफ्तारियों से आंदोलन नहीं रुकेगा।

पुलिस ने जुलूस को रोकने के लिए विधानसभा की ओर जाने वाले सभी मार्गो पर निषेधाज्ञा लागू कर दी और इस तरह शहर के मध्य स्थित विधानसभा भवन किले में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

उस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर में तनाव पैदा हो गया है, क्योंकि पुलिस द्वारा लागू निषेधाज्ञा के विरोध में मार्च करने के लिए बड़ी संख्या में छात्र जमा हो गए हैं।

छात्रों को विश्वविद्यालय परिसर के बाहर आने से रोकने के लिए सभी द्वारों पर पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं।

उस्मानिया विश्वविद्यालय और निजाम कॉलेज हॉस्टल से मंगलवार रात को कई छात्रों और उनके नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था।

पुलिस ने सड़कों पर जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी, क्योंकि उनका मानना है कि कुछ नक्सली इस जुलूस में हिंसा भड़का सकते हैं।

राज्य के कई जिलों- वारंगल, खम्माम, महबूबनगर, करीमनगर, मेडक और नलगोंडा में हुई गिरफ्तारियों में महिलाएं और छात्र भी शामिल हैं।

प्रदर्शनकारियों ने राज्य के कई क्षेत्रों में रैली निकाली और सरकार विरोधी नारे लगाए तथा ‘फर्जी मुठभेड़’ बंद करने का आह्वान किया।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की तेलंगाना इकाई के सचिव टी.वीरभद्रम ने कहा कि राज्य भर से तीन से चार हजार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने इन गिरफ्तारियों को अलोकतांत्रिक बताया।

वारंगल जिले में मेडाराम के पास 16 सितम्बर को पुलिस ने दो नक्सलियों -श्रुति और विद्यासागर- को मार गिराया था। पिछले साल तेलंगाना के आंध्र प्रदेश से अलग होने के बाद यह पहली मुठभेड़ थी।

इन हत्याओं को ‘फर्जी मुठभेड़’ बताते हुए 10 वाम दलों सहित 370 संगठन टीडीएफ के बैनर तले एकजुट हुए हैं और इन्होंने इन हत्याओं की निंदा की है। टीडीएफ किसी मौजूदा न्यायाधीश से मामले की जांच कराने की मांग कर रहा है।

पुलिस ने टीडीएफ के ‘चलो विधानसभा’ को स्वीकृति नहीं दी और उसने कहा कि टीडीएफ का गठन भाकपा (माओवादी) की पहल पर हुआ है और यह विरोध प्रदर्शन इस संगठन के मकसद और विचारधारा को मदद पहुंचाने के लिए आयोजित किया जा रहा है।

पुलिस को अशंका है कि तेलंगाना, छत्तीसगढ़, झारखंड आंध्र-ओडिशा सीमा से नक्सली कार्यकर्ता, समर्थक, सहानुभूति रखने वाले बड़ी संख्या में हैदराबाद पहुंचेंगे और व्यापक पैमाने पर हिंसा भड़काएंगे।

 

Previous articleSeven Indian fishermen arrested by Sri Lanka Navy
Next article90 children fall ill in UP, after drinking milk in mid-day meal