सोशल मीडिया पर छलका सुब्रमण्यम स्वामी का दर्द, बोले- ‘पीएम मोदी को मेरे विचारों में दिलचस्पी नहीं, जा सकता हूं चीन’

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केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी को मलाल है कि मोदी सरकार में उनके विचारों को तवज्जो नहीं मिल रही है। उन्होंने अपने एक ट्वीट में इसको लेकर अपना दर्ज जाहिर करते हुए कहा है कि ऐसी हालत में वह चीन जा सकते हैं। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। ट्विटर पर ही लोगों ने स्वामी को सलाह देना शुरू कर दिया है। उनका ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

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सुब्रमण्यम स्वामी ने मोदी सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में उनके विचारों के लिए कोई जगह नहीं है। सोमवार (1 जुलाई, 2019) को भाजपा सांसद ने ट्वीट कर कहा, ‘चीन की प्रसिद्ध सिंघुआ यूनिवर्सिटी ने सितंबर में मुझे स्कॉलर्स की सभा में बोलने के लिए बुलाया है। विषय है: चीन का आर्थिक विकास- 70 वर्षों की समीक्षा।’ ट्वीट में स्वामी ने आगे लिखा है, ‘चूंकि नमो (नरेंद्र मोदी) को मेरे विचारों को जानने में कोई दिलचस्पी नहीं है, इसलिए मैं चीन जा सकता हूं।’

सुब्रमण्यम स्वामी का यह ट्वीट दो दिन पुराना है, जिस पर सोशल मीडिया में अब प्रतिक्रियाएं मिलनी शुरू हुई हैं। मंगेश नाम के यूजर ने लिखा है कि आप राम मंदिर और अन्य हिंदूओं के मुद्दे पर बोलना छोड़ दीजिए, नमो खुश हो जाएंगे। जिसपर स्वामी ने कहा कि राम मंदिर पर नहीं बोलने की वजह से भाजपा लोकसभा में सिर्फ 2 सीटों पर सिमट गई थी।

गौरतलब है कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने और फिर वहां कम उम्र में पढ़ाने वाले स्वामी कई विषयों के प्रखर विद्वान हैं। स्वामी के नाम 24 साल में ही अमेरिका की प्रसिद्ध हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल करने का तमगा है। वह 27 साल की उम्र में हार्वर्ड में पढ़ाने लगे थे। कभी कांग्रेस खासकर राजीव गांधी के करीबी रहे स्वामी बाद में भगवा पार्टी से जुड़ गए।

भाजपा से जुड़ने के बाद उन्होंने यूपीए चैयरमैन सोनिया गांधी समेत कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं के खिलाफ अदालती मुकदमें ठोंक रखे हैं। यही नहीं, वह भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ भी काफी मुखर रहे हैं। आर्थिक मामलों की गहरी जानकारी रखने वाले स्वामी मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था को लेकर सवाल उठाते आए हैं।

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