#MeToo: ‘महिलाओं द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का सामना करने के बजाय धमकी और उत्पीड़न के माध्यम से मुंह बंद कराना चाहते हैं अकबर’

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देश भर में चल रहे ‘मी टू’ अभियान के तहत हर रोज चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। महिलाओं के इस अभियान का बड़े पैमाने पर समर्थन भी मिल रहा है। इस बीच विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर ने मी टू अभियान में यौन शोषण के आरोप लगाए जाने पर पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। अकबर ने विदेश यात्रा से रविवार को लौटने के बाद अपने ऊपर 10 से अधिक महिलाओं के लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए धमकी दी थी कि वह इस मामले में मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।

(Indian Express/File Photo)

उन्होंने सोमवार (15 अक्टूबर) को अपने वकील संदीप कपूर के माध्यम से भारतीय दंड संहिता की धारा 499 के तहत प्रिया के खिलाफ पटियाला कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया। उनके वकील ने याचिका में कहा है कि अकबर देश के सम्मानित पत्रकार रहे हैं और इस पेशे में उनका लंबा करियर रहा है। उन्होंने देश का पहला राजनीतिक समाचार साप्ताहिक निकला था, उनके मुवक्किल के खिलाफ प्रिया रमानी ने बेबुनियाद मनगढ़ंत और ओछे आरोप लगाए हैं जिससे उनकी छवि और गरिमा को धक्का पहुंचा है। इस तरह यह उनकी मानहानि का मामला बनता है।

गौरतलब है कि मानहानि के मामले में दो साल की सजा या दंड अथवा दोनों का प्रावधान है। याचिका में कहा गया है कि अकबर के खिलाफ सोशल मीडिया में इस तरह के आरोप लगाने से उनके मुवक्किल की छवि को परिवार समाज और मित्रों में ठेस पहुंची है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती है। अकबर पर प्रिया रमानी के अलावा गजाला वहाब, अंजू भारती, शुत्पा पॉल, शुमा रहा समेत कई महिला पत्रकारों ने यौन शोषण एवं प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।

सबसे पहले रमानी ने ही मंत्री पर देश में चल रहे ‘मी टू’ अभियान के बीच यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसके बाद करीब दर्जन भर महिला पत्रकारों ने अकबर पर यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ का आरोप लगाया है, जिसके कारण विदेश राज्यमंत्री को पद से हटाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इन महिलाओं का आरोप है कि ‘द एशियन एज’ और अन्य प्रकाशनों के संपादक की हैसियत से अकबर ने उनका यौन-उत्पीड़न किया। हालांकि अकबर ने सभी आरोपों को झूठा और निराधारा बताया है।

महिला पत्रकार ने किया पलटवार

अकबर की तरफ से पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किए जाने के बाद रमानी ने कहा कि अकबर धमकी और उत्पीड़न के जरिए आवाज बंद करने की कोशिश कर रहे हैं। रमानी ने अपने एक बयान में कहा, “मैं काफी निराश हूं कि केंद्रीय मंत्री ने कई महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोपों को राजनीतिक साजिश करार देते हुए खारिज कर दिया। मेरे खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर करके अकबर ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।” रमानी ने अपना बयान सोशल मीडिया पर साझा किया है।

समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, उन्होंने कहा, “अनेक महिलाओं द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का सामना करने के बजाय वह (अकबर) धमकी और उत्पीड़न के माध्यम से मुंह बंद कराना चाहते हैं।” रमानी ने जोर देकर कहा कि वह मानहानि के आरोपों का सामना करेंगी। उन्होंने कहा, “क्योंकि सच और पूर्ण सच ही मेरा बचाव है।” उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं ने अकबर के खिलाफ खुलकर खड़े होने का साहस दिखाया है, उन्होंने अपने व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन को गंभीर खतरे में डालकर ऐसा किया है।

उन्होंने कहा, “इस समय, यह पूछना ठीक नहीं है कि वे (पीड़ित) अब क्यों बोल रही हैं, क्योंकि हम सभी लांछन और शर्म से परिचित हैं कि यौन अपराध की सजा पीड़ित को कैसे भोगनी पड़ती है। इन महिलाओं की मंशा और इरादे को लेकर उन्हें कलंकित करने के बजाए हमें पुरुष और महिलाओं की भावी पीढ़ी के लिए कार्यस्थल को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।” रमानी ने कहा, “इसलिए मैं श्रीमान अकबर के अत्यंत हाल में दिए गए बयान का सख्त विरोध करती हूं, जिसमें पीड़ितों के सदमे और डर या सच बोलने के लिए जरूरी साहस पर ध्यान नहीं दिया गया।”

‘मी टू’ अभियान ने पकड़ा तूल

आपको बता दें कि भारत में जारी ‘मी टू’ अभियान (यौन उत्पीड़न के खिलाफ अभियान) तूल पकड़ता जा रहा है। कई अन्य महिलाएं अपने अनुभवों को सार्वजनिक तौर पर शेयर कर रही हैं। अभिनेत्री तनुश्री दत्ता द्वारा मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर पर यौन शोषण का आरोप लगाए जाने के बाद अब अलग-अलग इंडस्ट्री की बाकी हस्तियों ने भी अपने साथ हुए यौन दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है।

फिल्म इंडस्ट्री से ‘मी टू’ अभियान की शुरुआत होने के बाद इसकी चपेट में मीडिया जगत भी आ गया है और इसकी लपटें मोदी सरकार के एक मंत्री को अपने लपेटे में ले रही हैं। अपने समय के मशहूर संपादक व वर्तमान में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर पर 9 वरिष्ठ महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए हैं। इन महिलाओं ने उन पर तमाम मीडिया संस्थानों में संपादक रहते हुए यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है।

नाना पाटेकर के बाद जहां डायरेक्टर विकास बहल, सिंगर कैलाश खेर, लेखक चेतन भगत, अभिनेता रजत कपूर, मॉडल जुल्फी सैयद, अभिनेता आलोक नाथ, हिंदुस्तान टाइम्स के संपादक प्रशांत झा, रघु दीक्षित, कमेंटेटर सुहेल सेठ, महिला कॉमिक स्टार अदिति मित्तल, बॉलीवुड के शोमैन सुभाई घई, फिल्ममेकर साजिद खान, लेखक-निर्देशक पीयूष मिश्रा और बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी भी ‘मी टू’ की चपेट में आए हैं, जिनपर यौन उत्पीड़न, बदसलूकी, गलत तरीके से छूने जैसे आरोप लगे हैं।

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