मोदी सरकार ने कहा, नोटबंदी के खिलाफ उठने वाली सारी आवाज़ राजनैतिक हैं तो फिर देश में हो रहे ये विरोध प्रदर्शन, क़त्ल क्या है ?

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मोदी सरकार लगातार प्रचार के सभी माध्यमों से यह बताने की कोशिश कर रही है कि नोटबंदी का विरोध देश में कहीं भी नहीं किया जा रहा है। विरोध करने वाले केवल विरोधी है। भारतीय जनसमूह ने नोटबंदी का व्यापक स्वागत किया है। सरकार के अनुसार कतारों में खड़े हुए लोगों को थोड़ी बहुत परेशानी है लेकिन स्थिति भयावह है।

सरकार ने पार्टी समर्थकों और स्वयं सेवकों को केशलेस व्यवस्था को समझाने के लिए लोगों के बीच भेजने की बात भी कहीं है। इसके बाद अब नाज़ारा बिल्कुल बदला हुआ दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो के सामने आने के बाद वास्तविक हालातों की तस्वीर सामने आई है।

बीजेपी वर्कस जब लोगों को कैशलेस ट्रांजेक्शन समझाने पहुंचे तो गुस्साई भीड़ ने उन्हें घेर लिया। उनके पास लोगों के सवालों के जवाब नहीं मिले। इसके अलावा देशभर में कहीं भी कोई बीजेपी नेता कतारों में लोगों का हाल जानने नहीं पहुंच रहा जबकि राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी सहित तमाम छोटे बड़े नेता इन दिनों सड़कों पर है लेकिन बीजेपी नेता लोगों के बीच कहीं नहीं दिखाई दे रहे हैं।

प्रचार माध्यमों से बताया जा रहा है कि हालात सामान्य है इसके अलावा पीएम मोदी लगातार अपने भाषणों में सामान्य स्थिति का जिक्र कर रहे है। कल ही आगरा के एक बीमार पूर्व सैनिक ने बैंक के चक्कर काटने से तंग आकर आत्महत्या कर ली, बिहार में गार्ड की हत्या कर एटीएम लूट लिया गया। हालात दिन ब दिन खराब होते जा रहे है। अपनी बुनियादी जरूरतों से परेशाान लोग कैशलेस ट्रांजेक्शन की तकनीक को समझने मेें दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है।

इसके अलावा नोटबंदी के कारण होने वाली मौतों में लगातार इजाफा होता जा रहा है। उम्मीद की जा सकती है कि सरकार ज़मीनी स्तर पर हालात को समझने में तत्परता दिखाएगी और देश के हालात को और अधिक भयावह होने से बचाएगी। ऊपर दिखाई गई सभी तस्वीरें देश के अलग-अलग हिस्सों से है जो नोटबंदी के बाद बने व्यापक विरोध को दर्शाती है। नीचे दिए इस वीडियो देखने पर पता चलता है कि बीजेपी समर्थक जब कैशलेस ट्रांजेक्शन के बारें में लोगों को समझाने की कोशिश करते है तो पहले तो वह मुस्कुरा कर बातें करते है उसके बाद गुस्साए लोगों के जवाब ना दे पाने के कारण वो खुद ही खिसयाने लगते है।

गौरतलब है कि नोटबंदी से व्यापारियो को उनके काम में अधिक परेशानी आ रही है बैंकों से प्रति सप्ताह 50 हजार रुपए देने की बात कही तो गई, परन्तु उनको ये भी नहीं मिलते। जब वे बैंक जाते है, तो उनको पैसे होने की कह कर उल्टा लौटा दिया जाता है। कभी-कभी किसी व्यापारी को पचास हजार के बदले में मात्र दस हजार ही मिलते है। ऐसी हालत में वे कहां जाए। उनका धंधा चौपट हो गया है।

दिल्ली के नहेरू प्लेस व्यापारी संगठन के सदस्य नरेन्द्र मोदी मुर्दाबाद के जयघोष करते दिख रहे है। काम धंधों के चैपट होने की व्यथा को चिल्ला-चिल्ला कर बंया कर रहे है। चांदनी चौक पर कुछ दिन पहले ही व्यापरियों द्वारा नोटबंदी के विरोध में विशाल प्रर्दशन किया गया था। नोटबंदी के कारण व्यापारी वर्ग हताश है। नकदी संकट के चलते कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। जिसके चलते दिल्ली के नेहरु प्लेस में व्यापारी वर्ग आज सड़कों पर उतर गया।

व्यापारियों ने नेहरु पलेस पर इक्टठा होकर पीएम मोदी का पुतला फूंका और मोदी हाय हाय तानाशाही नही चलेगी के नारे लगाए उन्होंने कहा, कि सरकार ने अंबानी अडानी के घर भरे हैं, हम मोदी जी को संदेश देना चाहते हैं। जनता आपकी लुभावनी बातों में नहीं आने वाली हैं जनता आपके फैसले से त्रस्त हो चुकी है। देखिए वीडियो-

दो दिन पहले ही फतेहपुर में बीजेपी की परिवर्तन रैली में गृहमंत्री राजनाथ सिंह को काले झंडे दिखाकर मोदी मुदाबार्द के नारे लगाए गए थे जिसके कारण बीजेपी की परिवर्तन रैली मेें भारी हंगाम खड़ा हो गया था। नोटबंदी की देशव्यापी लहर के बीच कई शहरो से वीडियों सोशल मीडिया पर दिखाए जा रहे है जिनमें बिहार, पटिलाया, दिल्ली व अन्य राज्य शामिल है।

दो दिन पहले ही वाराणसी में आजतक की रिपोटर जब नोटबंदी के समर्थन पर लोगों से सवाल कर रही थी तब गुस्साई भीड़ ने मोदी मुदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए थे जिसके बाद वह रिर्पोट्र चुपचाप वहां से चली गई थी।

अगर ये मान भी लिया जाए कि नोटबंदी के बाद सड़को पर उतरा ये विरोध केवल विरोधियों की चाल है तो सरकार और सरकार के नुमाइन्दों को लोगों के बीच जाकर, कतारों मेें खड़े हुए लोगों से पुछकर, नोटबंदी की वजह से आत्महत्या करने वाले फौजी के घर जाकर पता करना चाहिए कि उन्हें इससे कोई परेशानी है या नहीं। फिर उसके बाद ही सरकार अखबरों के मुखपृष्ठ पर कैशलेस ट्रांजेक्शन के विज्ञापन दे तो अच्छा लगेगा।

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