पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की सेहत में कोई सुधार नहीं, अभी भी वेंटिलेटर सपोर्ट पर

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सेना के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में भर्ती पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की हालत नाजुक बनी हुई है लेकिन उसमें गिरावट नहीं आई है। उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति की सेहत शुक्रवार सुबह भी वैसी ही बनी रही।

84 वर्षीय प्रणब मुखर्जी को 10 अगस्त को सेना के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उनकी मस्तिष्क की सर्जरी की गई थी। इससे पहले कोविड-19 जांच में उनके संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। अस्पताल ने एक बयान में कहा, ‘‘माननीय श्री प्रणब मुखर्जी की हालत आज सुबह (14 अगस्त 2020) वैसी ही बनी रही। वह अब भी जीवनरक्षक प्रणाली पर हैं। उनकी हालत अभी स्थिर है।’’

मुखर्जी के मेडिकल बुलेटिन के बाद उनकी बेटी ने ट्विटर पर जानकारी दी कि उनकी हालत में गिरावट नहीं आई है।उन्होंने कहा, ‘‘चिकित्सा की विशिष्ट भाषा की गहराई में नहीं जाते हुए, बीते दो दिन में मुझे जो बात समझ में आई है वह यह है कि मेरे पिता की हालत बहुत नाजुक बनी हुई है लेकिन उसमें गिरावट नहीं आई है। रोशनी के प्रति उनकी आंख की प्रतिक्रिया में थोड़ा सुधार आया है।’’

इससे पहले प्रणब के बेटे अभिजीत ने ट्वीट किया था, ‘आप सबकी प्रार्थनाओं से मेरे पिता की हालत फिलहाल रक्‍त प्रवाह के लिहाज से स्थिर है। मैं आप सभी से प्रार्थनाएं जारी रखने की गुजारिश करता हूं। प्‍लीज उनकी जल्‍द रिकवरी के लिए दुआ कीजिए।’

प्रणब मुखर्जी साल 2012 से 2017 के बीच भारत के राष्ट्रपति रहे। मुखर्जी 1982 में 47 वर्ष की आयु में भारत के सबसे कम उम्र के वित्त मंत्री बने। 2004 से उन्होंने तीन महत्वपूर्ण मंत्रालयों- विदेश, रक्षा और वित्त मंत्रालय को संभाला और 2012 में राष्ट्र के सर्वोच्च राष्ट्रपति पद पर आसीन हुए।

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