‘प्रधानमंत्री की तारीफ का हक, पर स्वतंत्रता आंदोलन की आलोचना करने का अधिकार नहीं’ : कंगना रनौत के बयान पर बोले महाराष्ट्र BJP चीफ

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने शुक्रवार को कहा कि अभिनेत्री कंगना रनौत का यह बयान कि 1947 में भारत को मिली आजादी ‘भीख’ थी, पूरी तरह गलत है। रनौत ने हाल में विवादित बयान देते हुए कहा था कि भारत को असल मायने में आजादी 2014 में मिली। उनका इशारा भाजपा के केंद्र में सत्तासीन होने की ओर था। वह अपने इस बयान से आलोचनाओं से घिर गई हैं। यहां तक कि कंगना रनौत के खिलाफ कई जगहों पर शिकायते भी दर्ज की गई है, जबकि कुछ लोगों ने सड़कों पर उनके पुतले भी फूंके।

फाइल फोटो

पाटिल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘स्वतंत्रता के लिए देश के संघर्ष पर कंगना रनौत का बयान पूरी तरह गलत है। किसी को भी स्वतंत्रता आंदोलन पर नकारात्मक टिप्पणी करने का हक नहीं है।’’ हालांकि, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का कहना था कि वह नहीं जानते कि किस ‘भावना’ में अभिनेत्री ने यह बयान दिया।

उन्होंने दावा किया, ‘‘2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद आम आदमी सच्ची आजादी का अनुभव कर रहा है। अब देश में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसे रोज दो वक्त का खाना नसीब नहीं होता हो। केंद्र सरकार 105 रूपये में गरीबों को 35 किलोग्राम खाद्यान्न दे रही है।’’

पाटिल ने कहा कि रनौत प्रधानमंत्री मोदी के सात साल के कामकाज की तारीफ कर सकती हैं लेकिन उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन की आलोचना करने का अधिकार नहीं है।

महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि रनौत को प्रदान किया गया पद्मश्री पुरस्कार स्वतंत्रता पर उनकी विवादास्पद टिप्पणी के लिए वापस ले लिया जाए और स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान करने के लिए अभिनेत्री के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि अभिनेत्री ‘मलाना क्रीम’ की अधिक खुराक के बाद बहुत अधिक बोल रही हैं।

गौरतलब है कि, कंगना रनौत ने टाइम्स नाउ समिट में विवादित बयान देते हुए कहा था कि 1947 में देश को मिली आजादी भीख थी और असल आजादी 2014 में मिली है। कंगना के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस बयान में कंगना का इशारा भाजपा की सरकार की तरफ था।

कंगना के इस बेतुके बयान से देशवासियों में अभिनेत्री के खिलाफ रोष पैदा हो रहा है और वे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, कई लोग कंगना से पद्मश्री वापस लेने की भी मांग कर हैं।

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