मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी

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देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्र के खिलाफ विपक्षी पार्टियों ने महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर ली है। रिपोर्ट के मुताबिक महाभियोग प्रस्ताव पर संभवत: 10 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और वामदलों के सांसद भी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संसद के बजट सत्र के अंतिम दिनों में विपक्षी दल यह प्रस्ताव ला सकते हैं।

File Photo: TOI

समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक एनसीपी के नेताओं ने कहा कि कांग्रेस ने भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई के लिए प्रकिया शुरू कर दी है और इसके लिए वह विभिन्न विपक्षी पार्टियों के सासंदों के हस्ताक्षर ले रही है। हालांकि कांग्रेस ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है।

एनसीपी नेता माजिद मेमन ने कहा कि सबसे बडी विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने देश के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि यह पूछे जाने पर कि अब तक कितने सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं, उन्होंने कहा कि वह हस्ताक्षरकर्ता भर हैं और यह सवाल कांग्रेस से किया जाना चाहिए।

वहीं एनसीपी के एक अन्य सांसद डीपी त्रिपाठी ने दावा किया कि उन्होंने भी कांग्रेस के इस हस्ताक्षर अभियान के तहत हस्ताक्षर किया है। उन्होंने कहा कि यह केवल भ्रष्टाचार नहीं है, आरोप ‘बेहद गंभीर हैं’। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायाधीशों ने जो पत्र लिखा था उससे यह साफ है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खतरा है। त्रिपाठी ने इस बात की पुष्टि की कि हस्ताक्षर करने वालों में एनसीपी, माकपा, भाकपा के सदस्य भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि पिछले दिनों सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र की कार्यशैली पर सवाल उठाने के बाद ही राजनीतिक दलों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। माकपा ने बजट सत्र के पहले हिस्से में भी मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग लाने पर चर्चा की थी। लेकिन उस वक्त सहमति नहीं बन पाई थी।

नियमों के मुताबिक सीजेआई के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश करने के लिए लोकसभा में 100 सांसदों जबकि राज्यसभा में 50 सदस्यों के हस्ताक्षर होना जरूरी है। बता दें कि जस्टिस मिश्रा ने 27 अगस्त, 2017 को पूर्व मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर के सेवानिवृत्ति के बाद भारत के 45वें मुख्य न्यायाधीश बने। उनका कार्यकाल 2 अक्टूबर, 2018 को समाप्त हो रहा है।

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