अब न्यूज पोर्टल और मीडिया वेबसाइटों की निगरानी के लिए नियम-कानून बनाएगी सरकार, स्मृति ईरानी के मंत्रालय ने बनाई 10 सदस्यीय कमेटी

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पिछले दिनों ‘फेक न्यूज़ यानी फर्जी खबरों’ को लेकर पत्रकारों की मान्यता समाप्त करने वाले विवादित आदेश के बाद अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने न्यूज पोर्टल और मीडिया वेबसाइट को रेग्युलेट करने के लिए नियम बनाने को लेकर एक कमिटी का गठन किया है। चार अप्रैल के इस आदेश की कॉपी अधिकारिक रूप से जारी नहीं की गई है, लेकिन इसकी ‘लीक कॉपी’, जिसमें प्रसारण मंत्रालय के डायरेक्टर अमित कटोच के साइन हैं, वह सोशल मीडिया पर उपलब्ध है।

(Indian Express Photo/Prem Nath Pandey/File)

ABP न्यूज के मुताबिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने न्यूज पोर्टल और मीडिया वेबसाइटों के नियमन के लिए नियम बनाने को लेकर एक कमेटी गठित की है। इस सिलसिले में एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया है, जो ‘फेक न्यूज’ पर मंत्रालय के विवादास्पद दिशानिर्देशों की व्यापक आलोचना होने पर उसे वापस लिए जाने के एक दिन बाद आया।

चार अप्रैल को जारी आदेश के मुताबिक इस 10 सदस्यीय कमेटी (समिति) में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और गृह मंत्रालय के सचिव शामिल होंगे। इनके अलावा, इसमें विधि विभाग और औद्योगिक नीति एवं प्रोत्साहन विभाग के सचिव भी रहेंगे।

कमेटी में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई), न्यूज ब्रॉडकॉस्टर एसोसिएशन और इंडियन ब्रॉडकॉस्टर फेडरेशन के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। आदेश में कहा गया है कि निजी टीवी चैनलों पर विषय वस्तु का नियमन ‘कार्यक्रम एवं विज्ञापन संहिता’ करता है, जबकि प्रिंट मीडिया का नियमन के लिए पीसीआई के पास अपने नियम कायदे हैं।

इसमें कहा गया है कि ऑनलाइन मीडिया वेबसाइटों और न्यूज पोर्टल के नियमन के लिए कोई नियम या दिशानिर्देश नहीं है। इसलिए, डिजिटल प्रसारण एवं मनोरंजन/ इंफोटेनमेंट साइटों और न्यूज/ मीडिया एग्रेगेटर सहित ऑनलाइन मीडिया/ न्यूज पोर्टल के लिए एक नियामक ढांचे का सुझाव देने तथा उसे बनाने के लिए एक कमेटी गठित करने का फैसला किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आदेश में कहा गया है कि कमेटी ऑनलाइन मीडिया/न्यूज पोर्टल और ऑनलाइन विषय वस्तु मंचों के लिए उपयुक्त नीति बनाने की सिफारिश करेगी। ऐसा करने में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), टीवी चैनलों के कार्यक्रम एवं विज्ञापन संहिता सहित पीसीआई के नियमों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के मंत्रालय ने ‘फेक न्यूज’ को रोकने के लिए दो अप्रैल को नियमों की घोषणा की थी। इसके तहत ‘फेक न्यूज’ प्रकाशित या प्रसारित करने वाले पत्रकारों की मान्यता निलंबित करने/ स्थायी रूप से खत्म करने की बात कही गई थी।

मंत्रालय ने जारी उस एक विज्ञप्ति में कहा था कि पत्रकारों की मान्यता के लिये संशोधित दिशा-निर्देशों के मुताबिक अगर फर्जी खबर के प्रकाशन या प्रसारण की पुष्टि होती है तो पहली बार ऐसा करते पाये जाने पर पत्रकार की मान्यता छह महीने के लिये निलंबित की जाएगी और दूसरी बार ऐसा करते पाये जाने पर उसकी मान्यता एक साल के लिए निलंबित की जाएगी।

इसके अनुसार, अगर तीसरी बार उल्लंघन करते पाये जाने पर पत्रकार (महिला/पुरूष) की मान्यता स्थायी रूप से रद्द कर दी जाएगी। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर मंत्रालय ने यह दिशानिर्देश वापस ले लिया। दरअसल, मीडिया संगठनों और विपक्षी पार्टियों ने इन नियमों की आलोचना करते हुए इसे स्वतंत्र प्रेस की आवाज दबाने वाला बताया था। वहीं सोशल मीडिया पर भी केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की जमकर आलोचना हुई थी।

 

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