उत्तराखंड: दलित छात्रों ने उच्च जाति की हिंदू महिला का बना खाना खाने से किया इनकार

उत्तराखंड में दलित छात्रों के एक समूह ने एक उच्च जाति की हिंदू महिला द्वारा बनाया गया मध्याह्न भोजन खाने से इनकार कर दिया है। यह तब हुआ जब उच्च जाति के हिंदू छात्रों ने उसी स्कूल में एक दलित महिला द्वारा पकाए गए भोजन को खाने से इनकार कर दिया था। यह घटना उत्तराखंड के चंपावत जिले के सुखीढांग के एक सरकारी इंटर कॉलेज का है।

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गौरतलब है कि, पिछले हफ्ते उच्च जाति के हिंदू छात्रों ने दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाली सुनीता देवी के हाथों का बना खाना खाने से मना कर दिया था। देवी को बाद में राज्य की भाजपा सरकार ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया। हालांकि, उसके बाद दलित समुदाय के कम से कम 23 छात्रों ने एक उच्च जाति की हिंदू महिला विमिलेश उप्रेती द्वारा पकाए गए भोजन को खाने से इनकार करने का फैसला किया, जिसे देवी के प्रतिस्थापन के रूप में काम पर रखा गया था।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को जब दोपहर का भोजन परोसा गया तो 23 दलित छात्रों ने उप्रेती का बना खाना खाने से मना कर दिया। इंटर कॉलेज के प्राचार्य प्रेम सिंह ने कहा, “उन्होंने कहा कि अगर उच्च जाति के छात्र दलित भोजनमाता द्वारा पकाए गए भोजन का बहिष्कार करते हैं, तो वे उच्च जाति की महिला द्वारा बनाए गए भोजन का बहिष्कार करेंगे।”

इस बीच, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद रावण ने उत्तराखंड सरकार के खिलाफ विरोध करने का फैसला लिया। उन्होंने राज्य सरकार को धमकी देते हुए कहा कि, अनुसूचित जाति की भोजनमाता को पद से हटाकर सरकार ने दलित स्वाभिमान को चोट पहुँचाई है।

चंद्रशेखर आजाद रावण ने अपने ट्वीट में लिखा, “उत्तराखंड के चंपावत ज़िले में अनुसूचित जाति की भोजनमाता को पद से हटाकर सरकार ने दलित स्वाभिमान को चोट पहुँचाई है। ASP और भीम आर्मी माँ-बहनों के स्वाभिमान से समझौता नहीं कर सकती। अगर उन्हें फिर से बहाल न किया गया तो हम मुख्यमंत्री पुष्कर धामी का घेराव करेंगे। साथी तैयारी करें।”

इस बीच, भाजपा सरकार के नेतृत्व वाले शिक्षा विभाग ने देवी पर दलित छात्रों को उच्च जाति के हिंदू समुदाय के रसोइए का बहिष्कार करने के लिए उकसाने का आरोप लगाया है।

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