अदालत ने दिल्ली पुलिस को केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो की शिकायत पर जांच करने की अनुमति देने से किया इंकार

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को झटका देते हुए दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली पुलिस को उनकी एक शिकायत के मामले में जांच करने की अनुमति नहीं दी है जिसमें एक फेसबुक पेज के संपादक पर कथित रूप से फर्जी खबरें फैलाकर उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया गया है।

बाबुल सुप्रियो

निचली अदालत ने गुरुवार को अपने आदेश में कहा कि ना तो कानून के तहत आवश्यक अनुमति ली गई, ना ही केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने खुद मजिस्ट्रेट की अदालत में शिकायत दाखिल की। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने कहा, ‘‘शुरुआत में ही सीआरपीसी की धारा 199 का उल्लेख करना प्रासंगिक होगा जिसके अनुसार किसी मौजूदा मंत्री के मानहानि के मामले में शिकायत सरकार से मंजूरी लिए जाने के बाद सरकारी अभियोजक को दाखिल करनी होती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस मामले में शिकायती व्यक्ति खुद मुकदमा लड़ना चाहता है तो सीआरपीसी की धारा 199 के अनुसार शिकायत का मामला सीआरपीसी की धारा 200 के तहत मजिस्ट्रेट की अदालत में दाखिल करना होगा और जांच करने के बाद अगर मजिस्ट्रेट को उचित लगता है तो वह सीआरपीसी की धारा 202 के तहत जांच का आदेश दे सकते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस मामले में न तो मंजूरी ली गयी है और ना ही शिकायती मंत्री/व्यक्ति ने सीआरपीसी की धारा 200 के तहत कोई शिकायत की है। इस लिहाज से आवेदन अभी अधूरा है और इसे निस्तारित किया जाता है।’’

आवेदन के अनुसार सुप्रियो ने दिल्ली में विशेष शाखा की साइबर अपराध इकाई में शिकायत की थी और आरोप लगाया था कि फेसबुक पेज ‘निर्भीक उत्तर’ के संपादक अनिंदो चौधरी नियमित रूप से उनकी और विभिन्न राजनीतिक दलों के अन्य प्रमुख नेताओं की छवि धूमिल करने के लिए फर्जी जानकारी प्रसारित कर रहे हैं। पुलिस ने अदालत से जांच करने की अनुमति मांगी थी जिसे स्वीकार करने से अदालत ने इनकार कर दिया।

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