मैंने पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने के लिए नहीं कहा था: राज्यसभा उपसभापति

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राज्यसभा के उप सभापति पी.जे.कुरियन ने आज कहा कि उन्होंने सरकार से स्वतंत्रत सेनानी भगत सिंह को आतंकवादी बताने वाली इतिहास की किताब को प्रतिबंधित करने के लिए कभी नहीं कहा था, बल्कि इस तरह की सामग्री को किताब से हटाने के लिए कहा था।

जनता दल (युनाइटेड) के सदस्य के.सी.त्यागी ने शून्यकाल के दौरान व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि सरकार ने इंडियाज स्ट्रगल फॉर इंडिंपेंडेस नामक किताब पर ही प्रतिबंध लगा दिया, जबकि उस किताब से केवल उस सामग्री को हटाने के लिए कहा गया था, जिसमें भगत सिंह को आतंकवादी कहा गया है। इस पर कुरियन ने कहा, किताब पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता, केवल उस शब्द को हटाया जाना चाहिए।

कुरियन ने यह भी कहा कि यही बात सभी स्वतंत्रता सेनानियों के लिए है, जिन्होंने देश के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया। सरकार की ओर से प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि केवल दो ही विकल्प हैं, या तो किताब से उन पन्नों को फाड़कर हटा दिया जाए या किताब पर प्रतिबंध लगा दी जाए। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए पूछा कि क्या करना चाहिए-भगत सिंह को आतंकवादी बताने वाले किताब के पन्नों को फाड़ना चाहिए या उस पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार उन लोगों का संरक्षण नहीं करेगी, जिन्होंने स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह को आतंकवादी करार दिया है। सदन में हंगामे के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्य नरेश अग्रवाल ने कहा कि जिन लेखकों ने यह किताब लिखी है, उन्हें दंडित किया जाए। समाचार एजेंसी वेबवार्ता की खबर के अनुसार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता डी. राजा ने भाजपा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी का विरोध किया, जिन्होंने कहा था कि इतिहास की उस किताब के लेखक बिपिन चंद्रा, भाकपा के थे। सन् 1988 में प्रकाशित इंडियाज स्ट्रगल फॉर इंडिपेंडेंस को बिपिन चंद्रा, मृदुला मुखर्जी, आदित्य मुखर्जी, के.एन.पानीक्कर तथा सुचेता महाजन ने लिखा था।

यह पुस्तक देश भर के विश्वविद्यालयों में 25 वर्षो से पाठ्यक्रम का हिस्सा रही है और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन विषय के लिए एक प्रामाणिक पुस्तक के रूप में जानी जाती है।

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