पत्रकार से भाजपा प्रवक्ता और अब मंत्री, NDTV जर्नलिस्ट रविश कुमार का एम जे अकबर के नाम खुला खत

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आदरणीय अकबर जी,

प्रणाम,

ईद मुबारक़। आप विदेश राज्य मंत्री बने हैं, वो भी ईद से कम नहीं है। हम सब पत्रकारों को बहुत ख़ुश होना चाहिए कि आप भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता बनने के बाद सांसद बने और फिर मंत्री बने हैं। आपने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा। फिर उसके बाद राजनीति से लौट कर सम्पादक भी बने। फिर सम्पादक से प्रवक्ता बने और मंत्री। शायद मैं यह कभी नहीं जान पाऊँगा कि नेता बनकर पत्रकारिता के बारे में क्या सोचते थे और पत्रकार बनकर पेशगत नैतिकता के बारे में क्या सोचते थे? क्या आप कभी इस तरह के नैतिक संकट से गुज़रे हैं? हालाँकि पत्रकारिता में कोई ख़ुदा नहीं होता लेकिन क्या आपको कभी इन संकटों के समय ख़ुदा का ख़ौफ़ होता था ?

अकबर जी, मैं यह पत्र थोड़ी तल्ख़ी से भी लिख रहा हूँ। मगर उसका कारण आप नहीं है।आप सहारा बन सकते हैं। पिछले तीन साल से मुझे सोशल मीडिया पर दलाल कहा जाता रहा है। जिस राजनीतिक परिवर्तन को आप जैसे महान पत्रकार भारत के लिए महान बताते रहे हैं, हर ख़बर के साथ दलाल और भड़वा कहने की संस्कृति भी इसी परिवर्तन के साथ आई है। यहाँ तक कि मेरी माँ को रंडी लिखा गया और आज कल में भी इस तरह मेरी माँ के बारे में लिखा गया। जो कभी स्कूल नहीं जा सकी और जिन्हें पता भी नहीं है कि एंकर होना क्या होता है, प्राइम टाइम क्या होता है। उन्होंने कभी एनडीटीवी का स्टुडियो तक नहीं देखा है। वो बस इतना ही पूछती है कि ठीक हो न।अख़बार बहुत ग़ौर से पढ़ती है। जब उसे पता चला कि मुझे इस तरह से गालियाँ दी जाती हैं तो घबराहट में कई रात तक सो नहीं पाई।

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अकबर जी, आप जब पत्रकारिता से राजनीति में आते थे तो क्या आपको भी लोग दलाल बोलते थे, गाली देते थे, सोशल मीडिया पर मुँह काला करते थे जैसा मेरा करते हैं। ख़ासकर ब्लैक स्क्रीन वाले एपिसोड के बाद से। फिर जब कांग्रेस से पत्रकारिता में आए तो क्या लोग या ख़ासकर विरोधी दल, जिसमें इन दिनों आप हैं, आपके हर लेखन को दस जनपथ या किसी दल की दलाली से जोड़ कर देखते थे? तब आप ख़ुद को किन तर्कों से सहारा मिलता था? क्या आप मुझे वे सारे तर्क दे सकते हैं? मुझे आपका सहारा चाहिए।

मैंने पत्रकारिता में बहुत सी रिपोर्ट ख़राब भी की है। कुछ तो बेहद शर्मनाक थीं। पर तीन साल पहले तक कोई नहीं बोलता था कि मैं दलाल हूँ। माँ बहन की गाली नहीं देता था। अकबर सर, मैं दलाल नहीं हूँ। बट डू टेल मी व्हाट शूड आई डू टू बिकम अकबर। वाजपेयी सरकार में मुरली मनोहर जोशी जी जब मंत्री थे तब शिक्षा के भगवाकरण पर खूब तक़रीरें करता था। तब आपकी पार्टी के दफ्तर में मुझे कोई नफ़रत से बात नहीं करता था। डाक्टर साहब तो इंटरव्यू के बाद चाय भी पिलाते थे और मिठाई भी पूछते थे। कभी यह नहीं कहा कि तुम कांग्रेस के दलाल हो इसलिए ये सब सवाल पूछ रहे हो। उम्र के कारण जोशी जी गुस्साते भी थे लेकिन कभी मना नहीं किया कि इंटरव्यू नहीं दूँगा और न ऐसा संकेत दिया कि सरकार तुमसे चिढ़ती है। बल्कि अगले दिन उनके दफ्तर से ख़बरें उड़ा कर उन्हें फिर से कुरेद देता था।

अब सब बदल गया है। राजनीतिक नियंत्रण की नई संस्कृति आ गई है। हर रिपोर्ट को राजनीतिक पक्षधरता के पैमाने पर कसने वालों की जमात आ गई। यह जमात धुआँधार गाली देने लगी है। गाली देने वाले आपके और हमारे प्रधानमंत्री की तस्वीर लगाए हुए रहते हैं और कई बार राष्ट्रीय स्वयं संघ से जुड़े प्रतीकों का इस्तमाल करते हैं। इनमें से कई मंत्रियों को फालो करते हैं और कइयों को मंत्री। ये कुछ पत्रकारों को भाजपा विरोधी के रूप में चिन्हित करते हैं और बाकी की वाहवाही करते हैं।

निश्चित रूप से पत्रकारिता में गिरावट आई है। उस दौर में बिल्कुल नहीं आई थी जब आप चुनाव लड़े जीते, फिर हारे और फिर से संपादक बने। वो पत्रकारिता का स्वर्ण काल रहा होगा। जिसे अकबर काल कहा जा सकता है अगर इन गाली देने वालों को बुरा न लगे तो। आजकल भी पत्रकार प्रवक्ता का एक अघोषित विस्तार बन गए है। कुछ घोषित विस्तार बनकर भी पूजनीय हैं। मुझसे तटस्थता की आशा करने वाली गाली देने वालों की जमात इन घोषित प्रतिकारों को कभी दलाल नहीं कहती। हालाँकि अब जवाब में उन्हें भी दलाल और न जाने क्या क्या गाली देने वाली जमात आ गई है। यह वही जमात है जो स्मृति ईरानी को ट्रोल करती है।

आपको विदेश मंत्रालय में सहयोगी के रूप में जनरल वी के सिंह मिलेंगे जिन्होंने पत्रकारों के लिए ‘प्रेस्टिट्यूड’ कहा। उनसे सहमत और समर्थक जमात के लोग हिन्दी में हमें ‘प्रेश्या’ बुलाते हैं। चूँकि मैं एन डी टी वी से जुड़ा हूँ तो N की जगह R लगाकर ‘रंडी टीवी’ बोलते हैं। जिसके कैमरों ने आपकी बातों को भी दुनिया तक पहुँचाया है। क्या आपको लगता है कि पत्रकार स़ख्त सवाल करते हुए किसी दल की दलाली करते हैं? कौन सा सवाल कब दलाली हो जाता है और कब पत्रकारिता इस पर भी कुछ रौशनी डाल सकें तो आप जैसे संपादक से कुछ सीख सकूँगा। युवा पत्रकारों को कह सकूँगा कि रवीश कुमार मत बनना, बनना तो अकबर बनना क्योंकि हो सकता है अब रवीश कुमार भी अकबर बन जाये।

मै थोड़ा भावुक इंसान हूँ । इन हमलों से ज़रूर विचलित हुआ हूँ। तभी तो आपको देख लगा कि यही वो शख्स है जो मुझे सहारा दे सकता है। पिछले तीन साल के दौरान हर रिपोर्ट से पहले ये ख़्याल भी आया कि वही समर्थक जो भारत के सांस्कृतिक उत्थान की आगवानी में तुरही बजा रहे हैं, मुझे दलाल न कह दें और मेरी माँ को रंडी न कह दें। जबकि मेरी माँ ही असली और एकमात्र भारत माता है। माँ का ज़िक्र इसलिए बार बार कह रहा हूँ क्योंकि आपकी पार्टी के लोग ‘एक माँ की भावना’ को सबसे बेहतर समझते हैं। माँ का नाम लेते ही बहस अंतिम दीवार तक पहुँच कर समाप्त हो जाती है।

अकबर जी, मैं यह पत्र बहुत आशा से लिख रहा हूँ । आपका जवाब भावी पत्रकारों के लिए नज़ीर बनेगा। जो इन दिनों दस से पंद्रह लाख की फीस देकर पत्रकारिता पढ़ते हैं। मेरी नज़र में इतना पैसा देकर पत्रकारिता पढ़ने वाली पीढ़ी किसी कबाड़ से कम नहीं लेकिन आपका जवाब उनका मनोबल बढ़ा सकता है।

जब आप राजनीति से लौट कर पत्रकारिता में आते थे तो लिखते वक्त दिल दिमाग़ पर उस राजनीतिक दल या विचारधारा की ख़ैरियत की चिन्ता होती थी? क्या आप तटस्थ रह पाते थे? तटस्थ नहीं होते थे तो उसकी जगह क्या होते थे? जब आप पत्रकारिता से राजनीति में चले जाते थे तो अपने लिखे पर संदेह होता था? कभी लगता था कि किसी इनाम की आशा में ये सब लिखा है? मैं यह समझता हूँ कि हम पत्रकार अपने समय संदर्भ के दबाव में लिख रहे होते हैं और मुमकिन है कि कुछ साल बाद वो ख़ुद को बेकार लगे लेकिन क्या आपके लेखन में कभी राजनीतिक निष्ठा हावी हुई है? क्या निष्ठाओं की अदला बदली करते हुए नैतिक संकटों से मुक्त रहा जा सकता है? आप रह सके हैं?

मैं ट्वीटर के ट्रोल की तरह गुजरात सहित भारत के तमाम दंगों पर लिखे आपके लेख का ज़िकर नहीं करना चाहता। मैं सिर्फ व्यक्तिगत संदर्भ में यह सवाल पूछ रहा हूँ। आपसे पहले भी कई संस्थानों के मालिक राज्य सभा गए। आप तो कांग्रेस से लोकसभा लड़े और बीजेपी से राज्य सभा। कई लोग दूसरे तरीके से राजनीतिक दलों से रिश्ता निभाते रहे। पत्रकारों ने भी यही किया। मुझे ख़ुशी है कि प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेसी सरकारों की इस देन को बरक़रार रखा है। भारतीय संस्कृति की आगवानी में तुरही बजाने वालों ने यह भी न देखा कि लोकप्रिय अटल जी ख़ुद पत्रकार थे और प्रधानमंत्री बनने के बाद भी अपने अख़बार वीरअर्जुन पढ़ने का मोह त्याग न सके। कई और उदाहरण आज भी मिल जायेंगे।

मुझे लगा कि अब अगर मुझे कोई दलाल कहेगा या माँ को गाली देगा तो मैं कह सकूँगा कि अगर अकबर महान है तो रवीश कुमार भी महान है। वैसे मैं अभी राजनीति में नहीं आया हूँ। आ गया तो आप मेरे बहुत काम आयेंगे। इसलिए आप यह भी बताइये कि पत्रकारों को क्या करना चाहिए। क्या उन्हें चुनाव लड़कर, मंत्री बनकर फिर से पत्रकार बनना चाहिए। तब क्या वे पत्रकारिता कर पायेंगे? क्या पत्रकार बनते हुए देश सेवा के नाम पर राजनीतिक संभावनाएँ तलाश करती कहनी चाहिए? ‘यू कैन से सो मेनी थिंग्स ऑन जर्नलिज़्म नॉट वन सर’ !

मैं आशा करता हूँ कि तटस्थता की अभिलाषा में गाली देने वाले आपका स्वागत कर रहे होंगे। उन्हें फूल बरसाने भी चाहिए। आपकी योग्यता निःसंदेह है। आप हम सबके हीरो रहे हैं। जो पत्रकारिता को धर्म समझ कर करते रहे मगर यह न देख सके कि आप जैसे लोग धर्म को कर्मकांड समझकर निभाने में लगे हैं। चूँकि आजकल एंकर टीआरपी बताकर अपना महत्व बताते हैं तो मैं शून्य टीआरपी वाला एंकर हूँ। टीआरपी मीटर बताता है कि मुझे कोई नहीं देखता। इस लिहाज़ से चाहें तो आप इस पत्र को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं। मगर मंत्री होने के नाते आप भारत के हर नागरिक के प्रति सैंद्धांतिक रूप से जवाबदेह हो जाते हैं।उसी की ख़ैरियत के लिए इतना त्याग करते हैं। इस नाते आप जवाब दे सकते हैं। नंबर वन टी आर पी वाला आपसे नहीं पूछेगा कि ज़ीरो टी आर पी वाले पत्रकार का जवाब एक मंत्री कैसे दे सकता है वो भी विदेश राज्य मंत्री। वन्स एगेन ईद मुबारक सर। दिल से।

आपका अदना,

रवीश कुमार

ये ब्लॉग पहले रविश कुमार के ब्लॉग नईसड़क पर प्रकाशित हुआ था 

32 COMMENTS

  1. ghatiya kaam karne wale ke liye log ghatiya ji likhenge …aur NDTV mein hona apner aap mein ghatiya hone ka poramaan hai

  2. The day this pressitute stops licking ass at 10 janpath, and reverts to honest journalism, people may stop calling him a pressitute.

    • Why are you guys always using such bad language? Is this what your parents have taught you? Shame on you people!!!

  3. बदलाव की पैरवी करने वाला ही बदलाव से डर गया! क्या ये बदलाव तुमसे या किसी से भी पूछ कर आयेगा? अच्छा हो या बुरा ये आयेगा ही, किसी के लिये अच्छा तो किसी के लिये बुरा, जब तुम्हारे लिये अच्छा था तो हमारा लिये बुरा था। बदलाव ही सत्य है। जब किसी को बदलने की औकात मे न रहो तो चाहे उसके साथ रहो या खिलाफ, आखिर न चाहते हुये भी उसे अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाना ही पड़ता है। वैसे आप को अपने चैनल के दलालो को पहले कटघरे मे खड़ा करना चाहिये था, शायद ये पत्र लिखने की नैतिक ताकत बढ़ जाती।

  4. Kya besharam iNssan hai… introspect instead of whining…those who call your mother names are abusive filthy people who show their upbringing as do people who have been misogynistically targeting Ms Irani since long..never heard your ilk complaining, instead you and your friends like sagarika themselves indulge in this sick activity ..

    However people abusing your mother does not change the fact that you are shameless filthy presstitute who is not interested in doing any introspection only playing victim and continuing with your sick ,”kaun jaaat “reporting

  5. Begging for help and taunting for inividualistic gains by raising issues not connected to the problems of masses and claiming to be a sinscere journalist. So many contradictions shows the character of today’s journalism.

  6. रवीशजी, जब आप असहिष्णुता पर अपनी स्क्रीन काली करते हे, और इस दौर को काला अध्याय केहते हे, तब यही आपको जो दर्द हो रहा हे,हमे भी होता हे, हम भी भावुक हे. वेसे जो सवाल आपने अकबर जी से पूछा हे वहीँ आशुतोष या आशिष खेतान से भी पूँछ सकते थे,लेकिन नहीँ वो सेकुलर ब्रिगडे के पत्रकार हे, उस पार्टी को प्रमोट करना हे और इस सरकार को बदनाम करना हे ताकि 2019 में पुनः अपनी सुविधा वाली सरकार ला सको. हाँ tv चेनेल हे तो trp ही मायने रखती हे. रही बात गाली की तो जितनी गाली हम संघी ने 1947 से तुम लोगों से खाई हे उसका कोई हिसाब ही नहीँ हे. बेशर्म हो तो आत्मचिंतन तो करोगे नहीँ, बस aap पार्टी, जोइन कर लो, सारी बात समज आ जयेगी

  7. RAVISH JI BY ABUSING YOURSELF AND BY ADDRESSING A JOURNALIST WHO CAN NOT HELP YOU IN ANY WAY YOU ARE DOING MORE HARM TO YOU. I RESPECT YOU AND MOSTLY WATCH YOU IN PRIME TIME BUT SELF RESPECT IS KEY TO YOUR PERSONALITY YOU CAN NOT CONTROL ANY ONES THOUGHT AND THE KEYBOARD. STAY BLESSED.

  8. रविश कुमार ने कहा है की उन्हें सोशल मीडिया पर दल्ला कहा जाता है . यह पात्र उस बात को सही सिद्ध करता है.क्या रविश कुमार ने ऐसी ही चिट्ठी आशुतोष और सिसोदिया को भी लिखी थी.
    ऊपर से बहुत सज्जन दिखने वाले रविश कुमार का दिल कितना काला है ये इस खुले पात्र में लिखी बांटों से ज़ाहिर होता है.
    दलाल मीडिया और पत्रकारों का मुल्लम्मा उतर चूका है
    रविश कुमार को भी AAP ज्वाइन कर लेनी चाहिए.

  9. पुनश्च: कोई रविश जी के लिए बरनौल की एक ट्यूब भेज दे बहुत जलन हो रही है NDTV के पुरस्कृत पत्रकार को

  10. most confused letter. Ravish should do a self introspection and confirm he is impartial. if Modi does something bad, criticize him, but please note that you are not to harm nation. Tell me a single blog of yours or a programme of yours which has shown Modi’s even a single good work. After all he is PM of India and chosen by Indians. The election system may be faulty, but all other PMs have been because such election system. You have to respect him not as Modi but as PM of india. Think yourself before crying before anybody.

  11. OUR NATION IS RULING BY BIGGEST ANTI-NATIONAL CRIMINAL TODAY ……………………………………………………
    I DONT SAY CONGRESS WAS GODD, IT WAS CORRUPT ,

    BUT CURRENT GOVT IS CRIMINAL, ANTI-NATIONAL, CPRRUPT TOO,

  12. Copied: रवीशजी, जब आप असहिष्णुता पर अपनी स्क्रीन काली करते हे, और इस दौर को काला अध्याय केहते हे, तब यही आपको जो दर्द हो रहा हे,हमे भी होता हे, हम भी भावुक हे. वेसे जो सवाल आपने अकबर जी से पूछा हे वहीँ आशुतोष या आशिष खेतान से भी पूँछ सकते थे,लेकिन नहीँ वो सेकुलर ब्रिगडे के पत्रकार हे, उस पार्टी को प्रमोट करना हे और इस सरकार को बदनाम करना हे ताकि 2019 में पुनः अपनी सुविधा वाली सरकार ला सको. हाँ tv चेनेल हे तो trp ही मायने रखती हे. रही बात गाली की तो जितनी गाली हम संघी ने 1947 से तुम लोगों से खाई हे उसका कोई हिसाब ही नहीँ हे. बेशर्म हो तो आत्मचिंतन तो करोगे नहीँ, बस aap पार्टी, जोइन कर लो, सारी बात समज आ जयेगी

  13. Ravish don’t worry about these abuses of BJP followers, they do it for everyone who dares to express any negative observation towards BJP, Modi, or other party leaders of BJP or even questions about it.

    India will remember this forever and don’t think this situation will ever arise again in India. This negative media campaigning proved it in Delhi and Bihar. Modi did 5 rallies in Delhi and got only 3 seats. Does any of these people have any other answer and promise of freebies. They scold every Delhiites and Biharies for exercising their constitutional right. They(BJP and their supporters) want no elections if possible they will just nominate their favourite persons on CMs and MP/MLA posts. Just like they are doing in prominent posts of UPSC, NIFT, Censor Board, BCCI, etc. etc.

    Assam is exception since there is problem of Bangladeshi Muslim taking majority stake, which congress ignored rather promoted. Lets Hope for Best.

  14. रविश कुमार ने ऍम.जे.अकबर को लिखे खत में लिखा है !!
    उनकी माँ स्कूल नहीं गयी वो ndtv नहीं जानती, प्राइम टाइम नहीं जानती,अनपढ़ है, परंतु ” अखबार बड़े गौर से पढ़ती है ” अब कैसे पढ़ती है पता नहीं..

  15. Well done Ravish sir this time should also pass RSS BJP won’t show there face after 2019.country is in a hand of undemocratic constitutional killer very unfortunate but that’s what Gujarat model is all about.

  16. RAVISH SIR YOU ARE REALLY GREAT …IN SANGHI KUTTON KO BHAUNKNE DO ….INKO BRAHMANWAAD NAAM KE SAANP NE DAS LIYA HAI WAHI ZAHAR INKE KHOON ME DAUD RAHA HAI ….YE KHUD DALAL HAIN AUR HAMESHA SE THE, BRITISH RAJ ME BHI DALALI HI TO KI THI INHONE, KISI GOVERNMENT KE GALAT KAAM PAR
    SAWAL KARNA DALALI KAB SE HO GAYA AGAR SABHI PATRAKAR ZEE NEWS WALO KI TARAH GOVERNMENT KE TALWE CHATNE LAGENGE TO DESH KI AAM JANTA KI TARAF SE KON GOVT. SE SAWAL KAREGA …IN GADHON KI NAZAR ME TO JITNE BHI LOG SANGH KI IDEOLOGY NAHI MANTE WO SAB DESHDROHI HAIN ZARA INSE KOI PUCHE KI INHONE KAUN SA DESHBHAKTI KA KAAM KIYA HAI AAJ TAK…YE JAB VICHARO SE NAHI JEET PATE TO GAALIAN DENE LAGTE HAIN YE INKE HI MANSIK DIWALIYEPAN KI NISHANI HAI …

  17. Ravish , why are you adding more and more insults to yourself. Instead of asking Mr Akbar for the solution (only because he has become a minister) why don’t you introtrospect. I am sure you had the capability to change because you genuinely looked like a good person. But not any more. You are paying for what you have been doing. be it your company, your reporting, your outlook. Look within yourself impartially……… you will get the answer. in fact you have answered on your own in the given letter. but sadly you would not be able to see it because of your lopsided views and vested interests. Ravish there are two ways two make a name “Prakhyaati” (in which MJ Akbar ji comes) and “Kukhyaati” (in which sadly but truly you come). There is still time, introspect and start designing your self for your betterment. You have started sounding anti- national. Please refrain before nation takes care of you.

  18. I have watched your prime time programme many times and found it enjoyable. However I cannot resist concluding all ND TV anchors are working on a common agenda to search and highlight the weak points of Modi and his government. To call your self journalist you should do introspection and ask yourself did you ever think of highlighting positives in programme on the Jan Dhan Yojana, Insurance schemes for farmers and poor, Neem Coated urea, gas cylinders to poor villagers, improvements in Indian railway and electrification. Whenever you take up these issues it is only to denigrate. I have talked to 100 persons at random and 90 tell me the great work done by Prabhu and piuysh. Unfortunately you are too busy to promote Aap who have done everything except governance. Wish you understand the pain suffered by PM mother when you used to shower abuses on him day in and out. Where is law and logic? By writing this letter you have only allowed yourself to be played in the hands of anti modi forces. It is definitely not journalism.

  19. The people of this nation have not forgotten the “Radiya” tapes. It’s so sad to see the NDTV we all loved once dropping to such levels. Anyways, all is not gone. Get back to your World This Week days where Journalism trumped everything else. Respect for your will follow…

  20. दूसरों को सोशल मीडिया का पेड गुंडा और मानसिक बीमार बताने वाले आप, वास्तव में अात्म मुग्धता के इस मुकाम पर पहुँच गए है की अब आपके लिए वापस आना मुमकिन नहीं है. रवीश आपकी यह कुंठा और अंतर्द्वंद आपके पाखंड और दोहरे मानदंड (दोगलेपन) की वजह से है. जिस दिन आपको आत्म बोध हो जायेगा आप का यह द्वन्द समाप्त हो जाएगा. दिक्कत ये है कि आत्म मुग्धता की इस स्थिति ने आपको “अहम ब्रह्मस्मि” बना दिया है और आपके एक तरफ़ा और थोपे गए विचारों के विरुद्ध एक भी शब्द सुनना आप को गवारा नहीं है. “खाता न बही रवीश जो कहें सो सही” से हम बहुत आगे निकल अायें हैं. आज आपके विचार आपके स्टूडियो तक ही सीमित नहीं रह गयें है. अब आपके पास यह सुविधा नहीं है कि आप अपने सुविधा और स्वार्थ के अनुसार विषयों को पेश कर सकें. अब आपकी जिम्मेदारियों, प्रतिबद्धता और मूल्यों पर भी सवाल उठाने का मंच उपलब्ध है. इस लिए अब वन वे ट्रैफिक नहीं चलेगा. आप सौ अनर्गल सवाल उठा सकते हैं, लेकिन कुछ सवालों का जवाब देने के लिए आपको भी तैयार रहना होगा. अपने पिछले साल भर के कार्यकर्मों को बिना पूर्वाग्रह के देखेंगे तो आपको इस अंतर्द्वंद से निकलने में मदद मिलेगी. हम भी चाहते हैं की आप सक्रिय पत्रकारिता में रहें. लेकिन सवालों का जवाब देने के भय से आपको सोशल मीडिया से पलायन नहीं करना चाहिए था. लेकिन बड़ी सफाई किन्तु बेशर्मी से सहानुभूति पाने के लिए आप अपनी माँ का जिक्र बार बार करते हैं. साथ ही आपकी महानता में चार चाँद लग जाते अगर आपने राजीव शुक्ल से लेकर आशुतोष तक को समय समय पार ऐसे ही खुले पत्र लिखे होते. आपने हमेशा की तरह “सेलेक्टिव” होते हुए बड़ी चतुराई से MJ Akabar को ही केवल लिखा है. वास्तव में मेरी नजरो में अकबर और आशुतोष जैसे वो तमाम पत्रकार आप से काही बेहतर हैं जिन्होंने खुले रूप से किसी राजनैतिक दल का दामन थामा. लेकिन आप तो स्वयं को एक निष्पक्ष पत्रकार के रूप में पेश करते है और दल विशेष की चाटुकारिता में लगे रहते हैं.
    बहरहाल रोहित सरदाना का यह पत्र आपको सटीक जवाब है और आपके मुंह पर तमाचा है…

  21. Ravish i should see what you talking on channels now days its show you ppl are just hate present govt and try to hit them left right center which is biased reporting . you should be proud of PM of india who also from humble back round like yours … and criticized him but dont hate him after all he is elected PM …

  22. रवीशजी.आपका.जबाबनही.आया.क्या.रोहीतजीसे.असहमतहै.जबाबदिजीये.भागीये.नही.आपको.असहमतीका.नया.रोग लग.गया.आपके.जबावनहि.हैतो.अपने साथी.यानी.आज तक.या.ए.वी.बीपी़से.जरू.लीजिएगा.सर

  23. रवीसजी.आपने.जबाबनही.दीये.रोहीतजीसे.असहमतहै.आपको.असहमतका.नया.रोग.लग गया.भागीयेनही.जबाब.नहीआतातो.अपनेसाथी.यानी.आज तक.या.ए.वीबीपी.वालोसे.सलाह.लिजीये

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